Loan approval tips: आजकल पर्सनल लोन लेना आसान जरूर लगता है, लेकिन हर किसी का लोन पास हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार बैंक या NBFC आपकी एप्लीकेशन को रिजेक्ट कर देते हैं। ज्यादातर लोग यहीं पर एक बड़ी गलती कर बैठते हैं। वे घबराहट में तुरंत दूसरे बैंक या ऐप पर जाकर लोन के लिए हाथ-पांव मारने लगते हैं। सच तो ये है कि लोन रिजेक्शन एक संकेत होता है कि आपकी प्रोफाइल में कुछ सुधार की जरूरत है। अगर आप चाहते हैं कि अगली बार बैंक खुद आपको फोन करके लोन दे, तो दोबारा अप्लाई करने से पहले इन 6 बातों को गांठ बांध लीजिए।
रिजेक्शन की वजह जानें
बैंक कभी भी बिना वजह लोन मना नहीं करता। रिजेक्शन मिलते ही सबसे पहले अपने बैंक मैनेजर से बात करें या कस्टमर केयर को ईमेल लिखें। उनसे साफ शब्दों में पूछें, "आखिर कमी कहां रह गई?" क्या आपकी सैलरी कम थी? क्या आपके डॉक्यूमेंट्स अधूरे थे? या फिर आपका क्रेडिट स्कोर उम्मीद से कम था? जब तक वजह साफ नहीं होगी, सुधार करना मुश्किल रहेगा।
अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जरूर चेक करें
कई बार गलती आपकी नहीं, सिस्टम की होती है। अपनी क्रेडिट रिपोर्ट डाउनलोड करें और उसे बारीकी से पढ़ें। कई बार ऐसा होता है कि आपने कोई लोन सालों पहले चुका दिया हो, लेकिन बैंक के रिकॉर्ड में वह अब भी 'पेंडिंग' दिख रहा होता है। ऐसी तकनीकी गलतियां आपके स्कोर को मिट्टी में मिला देती हैं। अगर रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी दिखे, तो तुरंत उसे सुधारने के लिए अप्लाई करें।
इनकम और खर्च का बैलेंस बनाएं
बैंक यह देखता है कि आपकी जेब में महीने के आखिर में बचता कितना है। अगर आपकी 50 हजार की सैलरी में से 30 हजार रुपये पहले से ही पुरानी ईएमआई और क्रेडिट कार्ड के बिलों में जा रहे हैं, तो बैंक आपको नया लोन देने का जोखिम नहीं उठाएगा। कोशिश करें कि नया लोन मांगने से पहले अपने कुछ छोटे-मोटे उधार खत्म कर दें ताकि बैंक को लगे कि आप नया बोझ उठाने के काबिल हैं।
बार-बार अप्लाई करना बंद करें
एक बैंक से रिजेक्ट होने के बाद तुरंत दूसरे बैंक के दरवाजे खटखटाना आपकी प्रोफाइल पर निगेटिव असर डालता है। हर बार जब आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक आपकी क्रेडिट हिस्ट्री चेक करता है, जिसे 'हार्ड इंक्वायरी' कहते हैं। जितनी ज्यादा इंक्वायरी होगी, सिबिल उतना ही गिरेगा। एक्सपर्ट्स की मानें तो एक बार रिजेक्ट होने के बाद कम से कम 3 से 6 महीने का ब्रेक लेना चाहिए।
सिबिल स्कोर सुधारना जरूरी
पर्सनल लोन एक 'अनसिक्योर्ड लोन' है, यानी बैंक आपसे कोई गारंटी नहीं लेता। ऐसे में आपका सिबिल स्कोर ही आपकी गारंटी होता है। अगर स्कोर 700 से कम है, तो पहले उसे सुधारने पर ध्यान दें। समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल भरना शुरू करें और धीरे-धीरे स्कोर बेहतर बनाएं।
सही लेंडर और अमाउंट चुनें
जरूरी नहीं कि हर बार सरकारी या बड़ा बैंक ही आपको लोन दे। कई बार एनबीएफसी (NBFCs) या डिजिटल लोन ऐप्स की शर्तें थोड़ी आसान होती हैं। साथ ही, अपनी हैसियत से ज्यादा बड़े अमाउंट की मांग न करें। जितना छोटा और वाजिब अमाउंट होगा, बैंक का भरोसा उतना ही ज्यादा बढ़ेगा।
अगर आप सही तरीके से तैयारी करते हैं और जल्दबाजी से बचते हैं, तो अगली बार लोन अप्रूव होने के चांस काफी बढ़ जाते हैं। समझदारी और प्लानिंग ही यहां आपकी सबसे बड़ी ताकत है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।