Capital Gains Tax Saving Tips: इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए नए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म्स को नोटिफाई कर दिया है। इसी के साथ देश में टैक्स सीजन शुरू हो चुका है। सैलरीड पर्सन और इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर फाइलिंग की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है। नौकरीपेशा लोगों को 15 जून तक मिलने वाले फॉर्म 16 का इंतजार है, जिससे वे अपनी फाइलिंग प्रक्रिया शुरू कर सकें। लेकिन क्या आप जानते हैं कि निवेश से होने वाले मुनाफे यानी कैपिटल गेन पर लगने वाले टैक्स को कानूनी रूप से काफी कम किया जा सकता है? दरअसल, इनकम टैक्स एक्ट में कुछ ऐसी धाराएं मौजूद हैं, जो आपके टैक्स के बोझ को काफी हद तक हल्का कर सकती हैं। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
इन धाराओं के तहत कैपिटल गेन्स पर मिलती है छूट
1. धारा 48(i) ट्रांसफर पर खर्च: किसी भी कैपिटल गेन एसेट्स को बेचने या ट्रांसफर करने के दौरान जो भी खर्च सीधे तौर पर उस प्रक्रिया से जुड़ा होता है, जैसे ब्रोकरेज या कमीशन उसे आप अपने मुनाफे से घटा सकते हैं।
2.धारा 48(ii) - अधिग्रहण और सुधार की लागत: इसके तहत टैक्सपेयर्स को एसेट खरीदने की लागत और उसमें समय के साथ किए गए सुधारों पर हुए खर्च की कटौती मिलती है। इसमें इंडेक्सेड कॉस्ट का फायदा भी शामिल है। यह महंगाई के अनुसार लागत को समायोजित करता है।
3.धारा 54 - आवासीय घर में निवेश: अगर कोई व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) अपना पुराना मकान बेचकर नया घर खरीदता है या बनाता है, तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर छूट मिलती है। इसकी कुछ तय सीमाएं और शर्तें होती हैं।
4. धारा 54B - कृषि भूमि का पुनर्निवेश: जब खेती की जमीन बेची जाती है और उस मुनाफे का उपयोग करदाता या उसके माता-पिता की ओर से दूसरी खेती योग्य जमीन खरीदने के लिए किया जाता है, तो इस धारा के तहत टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है।
5.धारा 54D - अनिवार्य अधिग्रहण पर राहत: अगर सरकार आपकी जमीन या बिल्डिंग का अनिवार्य रूप से अधिग्रहण कर लेती है, तो उस पर मिलने वाले मुआवजे को नई जमीन या बिल्डिंग में निवेश कर आप टैक्स बचा सकते हैं।
6.धारा 54EC - सरकारी बॉन्ड्स में निवेश: जमीन या मकान की बिक्री से हुए मुनाफे को अगर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) या ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (REC) के नोटिफाइड बॉन्ड्स में निवेश किया जाए, तो टैक्स से राहत मिलती है।
7.धारा 54EE - स्पेशनल फंड्स में छूट: एसेट बेचने के 6 महीने के भीतर अगर मुनाफे को सरकार की तरफ से नोटिफाइड स्पेशल फंड्स की यूनिट्स में निवेश किया जाता है, तो अधिकतम 50 लाख रुपये तक की छूट का दावा किया जा सकता है।
8.धारा 54F - अन्य संपत्तियों पर छूट: अगर आपने घर के अलावा कोई अन्य लॉन्ग टर्म एसेट जैसे प्लॉट या सोना बेचा है और उस पूरी रकम को नया रिहायशी घर खरीदने में इस्तेमाल करते हैं, तो आपको यह छूट मिलती है।
9.धारा 54GB - स्टार्टअप में निवेश: अगर रिहायशी संपत्ति को बेचकर मिला पैसा किसी पात्र स्टार्टअप या नई कंपनी के शेयरों में लगाया जाता है, तो उस लाभ पर टैक्स नहीं देना होता। लेकिन, कंपनी उस पैसे से एक साल के भीतर नए एसेट्स खरीदे।