
अगर आपका क्रेडिट कार्ड खो आया है तो तुरंत कदम उठाना, कार्ड को फ्रीज करना, बैंक को सूचित करना और धोखाधड़ी की रिपोर्ट करना आपको नुकसान से बचा सकता है, आपके पैसे सुरक्षित रख सकता है और आपको आरबीआई के उपभोक्ता संरक्षण नियमों का लाभ दिला सकता है।
कार्ड तुरंत फ्रीज़ और हॉटलिस्ट करें: जैसे ही कार्ड खोने का पता चले, अपने बैंक के मोबाइल ऐप या नेटबैंकिंग से कार्ड को “ऑफ” कर दें ATM, POS, ऑनलाइन, कॉन्टैक्टलेस, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सभी चैनलों के लिए। इसके बाद 24×7 बैंक हेल्पलाइन पर कॉल करके कार्ड को स्थायी रूप से हॉटलिस्ट करवाएँ और नया कार्ड मंगाएँ। आरबीआई ने बैंकों को यह सुविधा अनिवार्य की है कि ग्राहक कार्ड को ऑन/ऑफ कर सकें और हर चैनल के लिए लिमिट तय कर सकें। बैंक से सर्विस रिक्वेस्ट या शिकायत नंबर ज़रूर लें और संभालकर रखें।
तीन वर्किंग डे में संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट करें: अगर आपको कोई अनधिकृत लेनदेन दिखे या शक हो, तो तुरंत लिखित रूप में (ईमेल या ऐप के इनबॉक्स से) तीन कार्यदिवस के भीतर बैंक को बताना जरूरी है। ऐसा करने पर आप आरबीआई के नियमों के अनुसार “ज़ीरो लाइबिलिटी” यानी किसी भी नुकसान से मुक्त रहेंगे। बैंक आपकी रिपोर्ट के 10 कार्यदिवस के भीतर अस्थायी क्रेडिट (“शैडो रिवर्सल”) देगा और जांच करेगा। देर करने से यह सुरक्षा कम हो सकती है और आपकी ज़िम्मेदारी बढ़ सकती है।
1930 पर कॉल करें और साइबरक्राइम में शिकायत करें: अगर धोखाधड़ी में पैसा पहले ही भेज दिया गया है, तो तुरंत नेशनल साइबरक्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। समय पर रिपोर्ट करने से बैंकिंग प्रक्रिया में पैसे को रोका जा सकता है। आपको एक शिकायत नंबर और रसीद मिलेगी, जिसे बैंक की विवाद समाधान टीम के साथ साझा करें।
लेनदेन पर विवाद दर्ज करें और पासवर्ड बदलें: हर गलत लेनदेन की शिकायत बैंक के ऐप या ईमेल से औपचारिक रूप से दर्ज करें। उसमें समय, स्क्रीनशॉट और 1930/NCRP शिकायत नंबर ज़रूर शामिल करें। तुरंत नेटबैंकिंग और कार्ड के कंट्रोल पासवर्ड बदलें, नए कार्ड का पिन सेट करें और पुराने कार्ड को किसी भी सेव किए हुए वॉलेट या वेबसाइट से हटा दें। नए कार्ड पर आप चैनल-वार लिमिट और सुरक्षा फीचर ऑन/ऑफ कर सकते हैं, ताकि भविष्य का जोखिम कम हो।
स्टेटमेंट और क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते रहें: नए स्टेटमेंट में छोटे-छोटे टेस्ट ट्रांज़ैक्शन या सब्सक्रिप्शन चार्जेज़ देखें, जिनका आगे दुरुपयोग हो सकता है। नए कार्ड पर एसएमएस और ईमेल द्वारा रीयल-टाइम नोटिफिकेशन सक्रिय करें। आने वाले कुछ हफ्तों में चारों भारतीय क्रेडिट ब्यूरो की रिपोर्ट चेक करें, ताकि कोई नया खाता या इनक्वायरी आपके नाम से न हो। अगर गड़बड़ी हो तो संबंधित दस्तावेज़ों के साथ आपत्ति दर्ज करें। कई बार बैंक पुलिस रिपोर्ट भी मांग सकता है, जिसे शिकायत को मजबूत करने के लिए देना होगा।
रिकॉर्ड रखें और जरूरत पड़ने पर शिकायत बढ़ाएं: हॉटलिस्टिंग रिक्वेस्ट, बैंक की शिकायत संख्या, 1930/NCRP का सबूत और सभी ईमेल की तारीख़ सहित कॉपी रखें। अगर बैंक संतोषजनक समाधान नहीं देता, तो उसकी शिकायत निवारण प्रक्रिया में आगे बढ़ें और फिर RBI के इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम के ऑनलाइन CMS पोर्टल में शिकायत दर्ज करें। यह स्कीम अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन सहित सेवा में कमी पर लागू होती है।
डिजिटल फुटप्रिंट सुरक्षित करें: नए कार्ड के आने के बाद ही आवश्यक सेवाओं पर उसे अपडेट करें और ट्रांज़ैक्शन लिमिट कम रखें। जिन व्यापारियों की जरूरत नहीं, वहां से कार्ड की अनुमति हटा दें, पुराने शॉपिंग अकाउंट से कार्ड डिलीट करें और CVV या कार्ड की तस्वीर कभी सेव न करें। अंतरराष्ट्रीय या कॉन्टैक्टलेस इस्तेमाल की ज़रूरत न हो तो इन्हें ऑफ ही रखें और केवल जरूरत पड़ने पर अस्थायी तौर पर सीमित लिमिट के साथ ऑन करें।
अपने अधिकार और समयसीमा जानें: अगर आप समय पर रिपोर्ट करते हैं और धोखाधड़ी तीसरे पक्ष की वजह से हुई है, तो आपकी जिम्मेदारी शून्य होगी। अगर रिपोर्ट चौथे से सातवें कार्यदिवस में की जाती है, तो आपकी जिम्मेदारी सीमित होगी। सात दिन के बाद आपकी बैंक की पॉलिसी लागू होगी। लेकिन रिपोर्ट करने के बाद होने वाले नुकसान की ज़िम्मेदारी बैंक की होती है। इन नियमों की जानकारी होने से आप सही समय पर कदम उठा पाएँगे और सुरक्षित रहेंगे।
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