
LTCG Tax: शेयर बाजार में निवेश करने वाले लाखों निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। पिछले कई दिनों से चर्चा की जा रही थी कि सरकार इक्विटी निवेश पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को खत्म करने जा रही है। सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि अब इस बारे में केंद्र सरकार ने अपनी सफाई दी है। सरकार ने लोकसभा में कहा है कि फिलहाल इक्विटी पर LTCG टैक्स को समाप्त करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इस बयान के बाद बाजार में फैली अनिश्चितता के बादल छंट गए हैं।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह स्पष्टीकरण दिया। उनसे पूछा गया था कि बाजार का भरोसा बढ़ाने, घरेलू निवेशकों की सुरक्षा करने और विदेशी व भारतीय निवेशकों के बीच बराबरी का माहौल बनाने के लिए सरकार कब तक रिटेल और घरेलू निवेशकों के लिए LTCG टैक्स खत्म करेगी। उन्होंने कहा, "फिलहाल, ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।" मंत्री ने यह भी बताया कि कैपिटल गेन्स टैक्स की दरों सहित टैक्स नीतियों की समीक्षा समय-समय पर की जाती है। यह समीक्षा सालाना बजट प्रक्रिया और कानूनी बदलावों के तहत मैक्रो-इकोनॉमिक पैमानों को ध्यान में रखकर की जाती है।
सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान इक्विटी लेनदेन पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स से करीब 2.01 लाख करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ। इस अवधि में टैक्स कलेक्शन में करीब 79 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। Assessment Year (AY) 2025-26 में सरकार ने 1.29 लाख करोड़ रुपये का LTCG टैक्स कलेक्शन किया, जबकि AY 2024-25 में यह 72,249 करोड़ रुपये था। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े AY के आधार पर हैं। AY 2025-26 का संबंध वित्त वर्ष 2024-25 में अर्जित आय से है, जबकि AY 2024-25 का संबंध वित्त वर्ष 2023-24 की आय से है।
सरकार ने बताया कि सूचीबद्ध (लिस्टेड) इक्विटी निवेश पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स की दर घरेलू (रिटेल) निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) दोनों के लिए समान है। हालांकि, सरकार ने हाल ही में सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities या G-Secs) में निवेश करने वाले FPI के लिए कर व्यवस्था में बदलाव किया है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी इस बदलाव के तहत G-Secs में निवेश करने वाले FPI को ब्याज आय और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) दोनों पर आयकर से छूट मिलेगी। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य भारत की कर व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना और पेंशन फंड, बीमा कंपनियों तथा सॉवरेन वेल्थ फंड जैसे दीर्घकालिक विदेशी निवेशकों को आकर्षित करना है।
जब कोई निवेशक सूचीबद्ध शेयरों या इक्विटी आधारित निवेश को निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रखने के बाद लाभ के साथ बेचता है, तो उस लाभ पर लागू नियमों के अनुसार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगाया जाता है। यह भारत के टैक्स सिस्टम का अहम हिस्सा है। यह निवेश से होने वाली आय पर लागू होता है।
सरकार के स्पष्टीकरण का सीधा अर्थ यह है कि फिलहाल इक्विटी निवेश पर लागू मौजूदा LTCG टैक्स व्यवस्था में किसी तत्काल बदलाव की घोषणा नहीं की गई है। इसलिए निवेशकों को निवेश संबंधी निर्णय केवल अफवाहों या अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर नहीं लेने चाहिए।
बाजार से जुड़े कई लोग लंबे समय से शेयरों पर एलटीसीजी टैक्स खत्म करने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि शेयर बाजार में लंबी अवधि के लिए पैसा लगाने वाले निवेशक कंपनियों को पूंजी देते हैं और बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करते हैं। इसलिए लंबे समय के निवेश पर टैक्स में ज्यादा राहत मिलनी चाहिए। निवेशकों को शेयर खरीदते और बेचते समय दूसरे टैक्स और शुल्क भी चुकाने पड़ते हैं। इसी कारण कुछ निवेशक एलटीसीजी टैक्स को अतिरिक्त बोझ मानते हैं।
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