
म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते वक्त ज्यादातर निवेशकों के मन में यही उलझन रहती है कि लंपसम में निवेश करें या STP (Systematic Transfer Plan) अपनाएं। हाल ही में निवेशक आयुष का अनुभव इसी सवाल को फिर चर्चा में ले आया। आयुष ने इक्विटी म्यूचुअल फंड में STP के जरिए निवेश किया। हालांकि, कुछ समय बाद उसे लगा कि अगर उन्होंने पूरी रकम एक साथ लगा दी होती, तो रिटर्न ज्यादा मिलता। उसका मानना है कि STP की वजह से उन्हें फायदा कम हुआ। हालांकि, एक्सपर्ट्स कहते हैं कि हर बार ऐसा नहीं होता और निवेश का सही तरीका बाजार के हालात और निवेशक की सोच पर निर्भर करता है।
दरअसल, STP में निवेशक पहले अपनी रकम किसी लो-रिस्क फंड जैसे लिक्विड या मनी मार्केट फंड में डालता है। फिर तय समय पर वह रकम किस्तों में इक्विटी फंड में ट्रांसफर होती है। आयुष ने 3 लाख रुपये की रकम को तीन बराबर हिस्सों में बांटकर हर महीने इक्विटी फंड में डाला। पहली किस्त 40 रुपये के NAV पर, दूसरी 39 रुपये पर और तीसरी 42 रुपये के NAV पर निवेश हुई। इस तरह उन्हें कुल 7,444 यूनिट्स मिलीं, जिनकी मौजूदा कीमत करीब 3.20 लाख रुपये रही।
दूसरी ओर अगर वही 3 लाख रुपये उसने शुरुआत में ही 40 रुपये के NAV पर लगा दिए होते, तो उन्हें 7,500 यूनिट्स मिलतीं। जबकि इसकी वैल्यू करीब 3.22 लाख रुपये होती। यानी STP की वजह से उन्हें करीब 2,000 रुपये का अवसर नुकसान (Opportunity Cost) हुआ। हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह नुकसान हर स्थिति में नहीं होता। अगर STP के दौरान बाजार गिरता, तो आयुष को ज्यादा यूनिट्स मिलतीं और उनका औसत खरीद मूल्य कम हो जाता।
उदाहरण के तौर पर, अगर किस्तें 39, 38 और 37 रुपये के NAV पर जातीं, तो यूनिट्स की संख्या ज्यादा होती। इस तरह आज उसका निवेश 3.40 लाख रुपये तक पहुंच सकता था। यानी STP का फायदा तब मिलता है जब बाजार में उतार-चढ़ाव या गिरावट होती है। इसके अलावा, लिक्विड फंड से मिलने वाला रिटर्न भी कुल रिटर्न में जुड़ता है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
असल में, STP को कमाई बढ़ाने का नहीं, बल्कि जोखिम संभालने का तरीका माना जाता है। यह निवेशकों को गलत समय पर पूरी रकम लगाने के डर से बचाता है और भावनात्मक फैसलों पर रोक लगाता है। बाजार अगर तेजी में हो तो लंपसम निवेश ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है, लेकिन गिरावट या अस्थिरता के दौर में STP निवेशकों को मानसिक सुकून देता है।
जानकारों का कहना है कि जो निवेशक लॉन्ग टर्म में सोचते हैं और बाजार का समय पकड़ने की कोशिश नहीं करते, उनके लिए STP एक सुरक्षित और अनुशासित रास्ता है। जबकि अनुभव और जोखिम उठाने की क्षमता वाले निवेशक लंपसम का विकल्प चुन सकते हैं।
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