31 दिसंबर रिवाइज्ड ITR की डेडलाइन निकलने के बाद भी मिलेगा रिफंड, करें यह काम

ITR Filing Deadline: अगर इनकम टैक्स रिटर्न की डेडलाइन निकल गई है तो टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। आप अभी भी गलतियों को ठीक कर सकते हैं। सेक्शन 154 के तहत सुधार के लिए एप्लीकेशन फाइल करना होगा। यह उन गलतियों पर लागू होता है जो आपका रिटर्न प्रोसेस होने के बाद मिलता है।

Jitendra Singh
अपडेटेड7 Jan 2026, 07:23 PM IST
ITR Filing Deadline:  सेक्शन 154 के तहत रिफंड हासिल कर सकते हैं।
ITR Filing Deadline: सेक्शन 154 के तहत रिफंड हासिल कर सकते हैं।

ITR Filing Deadline: वित्त वर्ष 2024-25 (AY 2025-26) के लिए संशोधित और देरी से इनकम टैक्स रिटर्न जमा करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर, 2025 थी। अगर आपने 16 सितंबर, 2025 को या उससे पहले इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया था, तो आपके पास संशोधित ITR फाइल करने का ऑप्शन था। ऐसे में जो लोग आईटीआर में सुधार नहीं कर पाए हैं उनके पास अब भी एक आखिरी विकल्प बचा हुआ है। सेक्शन 154 के तहत सुधार के लिए रिक्वेस्ट फाइल करके करेक्शन करवाया जा सकता है।

दरअसल, असेसमेंट ईयर (AY) 2025-26 के लिए 31 दिसंबर 2025 की डेडलाइन खत्म होने का मतलब ये नहीं कि अब आपके पास कोई रास्ता नहीं बचा। इनकम टैक्स सिस्टम में कुछ ऐसे विकल्प हैं, जिनके जरिए सही मामलों में रिफंड अब भी मिल सकता है। बस सही जानकारी और थोड़ा धैर्य रखने की जरूरत है।

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इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराना का कहना है कि अगर बाद में ITR को सेक्शन 143(1) के तहत प्रोसेस किया जाता है और टैक्सपेयर को कोई गलती बताते हुए एक सूचना मिलती है। ऐसे में कानूनी रूप से एक वैकल्पिक उपाय मिलता है। सुराना का कहना है कि इस तरह के मामलों में टैक्सपेयर्स सेक्शन 154 के तहत सुधार के लिए एप्लीकेशन फाइल कर सकते हैं।

गलती कब होती है स्वीकार?

रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट तब स्वीकार की जाती है जब रिकॉर्ड में कोई साफ़ गलती हो। इसमें अंकगणितीय गलतियां, नुकसान को गलत तरीके से लिखना, गलत टैक्स या ब्याज की गणना, TDS क्रेडिट का मिलान न होना, या CPC इंटिमेशन में दिखाई देने वाली अन्य क्लर्कियल गलतियां जैसे एरर शामिल रहते हैं। सुराना कहते हैं कि सेक्शन 154 के तहत सुधार से रिकॉर्ड में साफ़ दिख रही गलतियों कोऑनलाइन ठीक किया जा सकता है।

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इतना ही नहीं सबसे जरूरी बात यह है कि इससे रिफंड मिल सकता है या मौजूदा रिफंड भी बढ़ सकता है। ये ऑप्शन तब काम आता है जब रिटर्न प्रोसेस हो चुका हो और इंटिमेशन (टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से भेजी गई आधिकारिक जानकारी) मिल चुका हो।

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मतलब, अगर प्रोसेसिंग के बाद कोई गलती पकड़ी जाती है, तो आप ‘रेक्टिफिकेशन’ फाइल करके उसे सुधार सकते हैं, और रिफंड क्लेम कर सकते हैं। ये रिवाइज्ड ITR से अलग है, क्योंकि ये सिर्फ स्पष्ट गलती के लिए है, जैसे कैलकुलेशन की गलती या गलत डेटा। ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करके सर्विसेज सेक्शन में जाकर रेक्टिफिकेशन चुनें, रिलेवेंट असेसमेंट ईयर सिलेक्ट करें, और गलती की वजह बताएं। अगर रिफंड अभी तक नहीं मिला, तो रिफंड री-इश्यू के लिए अप्लाई करें, जहां प्री-वैलिडेटेड बैंक अकाउंट डिटेल्स दें।

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रिफंड स्टेटस चेक करने का आसान तरीका क्या है?

रिफंड का इंतजार करते हुए सबसे जरूरी है कि स्टेटस ट्रैक करें। इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर रिफंड स्टेटस चेक कर सकते हैं। लॉगिन करने के बाद, रिफंड स्टेटस ऑप्शन चुनें, और PAN, असेसमेंट ईयर डालें। अगर रिफंड प्रोसेस हो रहा है, तो मैसेज आएगा जैसे ‘रिफंड इश्यूड’ या ‘प्रोसेसिंग अंडर वे’। अगर डिले है, तो इंटिमेशन का इंतजार करें, जो ईमेल या पोर्टल पर आता है।

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