एक EMI मिस और सालों की परेशानी! पर्सनल लोन में देरी कैसे बिगाड़ देती है क्रेडिट भविष्य

पर्सनल लोन की EMI मिस करना मामूली चूक नहीं बल्कि आपकी फाइनेंशियल हेल्थ के लिए बड़ा खतरा है। एक भी EMI मिस होने से क्रेडिट स्कोर में भारी गिरावट आ सकती है और बैंक की नजर में आपकी विश्वसनीयता कमजोर हो जाती है। लगातार देरी से पेनल्टी, NPA का खतरा और कानूनी कार्रवाई तक हो सकती है। 

Rishabh Shukla
अपडेटेड25 Dec 2025, 06:01 PM IST
EMI मिस क्रेडिट स्कोर को कम कर सकती है
EMI मिस क्रेडिट स्कोर को कम कर सकती है

अगर आपने हाल ही में पर्सनल लोन की EMI मिस की है या पेमेंट में देरी हुई है, तो इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। कई लोग मानते हैं कि एक महीने की देरी से कुछ खास फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन असल में इसका असर आपकी फाइनेंशियल प्रोफाइल पर लंबे समय तक रहता है। EMI मिस होना बैंक और क्रेडिट ब्यूरो के लिए यह संकेत होता है कि आपकी पेमेंट डिसिप्लिन कमजोर हो रही है, जो भविष्य के लोन पर सीधा असर डालती है।

क्रेडिट स्कोर पर तुरंत और गहरा असर

क्रेडिट ब्यूरो जैसे CIBIL, Experian, Equifax और CRIF High Mark हर EMI और क्रेडिट कार्ड पेमेंट को रिकॉर्ड करते हैं। एक EMI मिस होने पर आपका क्रेडिट स्कोर 50 से 70 पॉइंट तक गिर सकता है। अगर पेमेंट 30 दिन से ज्यादा लेट होती है, तो यह गिरावट 90 से 100 पॉइंट तक पहुंच सकती है। चूंकि क्रेडिट स्कोर का बड़ा हिस्सा आपकी पेमेंट हिस्ट्री पर आधारित होता है, इसलिए एक गलती पूरी रिपोर्ट को कमजोर बना देती है।

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बैंक की नजर में बिगड़ती साख

EMI समय पर न देने से बैंक आपको हाई-रिस्क कस्टमर मानने लगता है। बैंक को शक होता है कि आपकी इनकम स्थिर नहीं है या आप अपने फाइनेंशियल मैनेजमेंट में लापरवाह हैं। इसका नतीजा यह होता है कि भविष्य में होम लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड के आवेदन पर या तो लोन रिजेक्ट हो जाता है या फिर ऊंची ब्याज दर पर मंजूरी मिलती है।

लेट फीस, पेनल्टी और NPA का खतरा

EMI मिस करने पर बैंक 1% से 2% तक लेट फीस और ओवरड्यू अमाउंट पर पेनल इंटरेस्ट वसूलता है। अगर पेमेंट 90 दिनों से ज्यादा पेंडिंग रहती है, तो लोन अकाउंट को NPA (Non-Performing Asset) घोषित कर दिया जाता है। एक बार NPA टैग लगने के बाद आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को गंभीर नुकसान पहुंचता है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होता।

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बचाव के उपाय और सही रणनीति

इस स्थिति से बचने के लिए ऑटो-डेबिट सेट करना सबसे सुरक्षित उपाय है। इसके साथ ही कम से कम तीन महीने की EMI के बराबर इमरजेंसी फंड रखना जरूरी है। अगर किसी वजह से पेमेंट में दिक्कत आ रही है, तो बैंक से छुपाने के बजाय खुलकर बात करें। कई मामलों में बैंक रिस्ट्रक्चरिंग या मोरेटोरियम का विकल्प दे देता है। समय-समय पर क्रेडिट रिपोर्ट चेक करना भी जरूरी है ताकि किसी गलती को तुरंत सुधारा जा सके।

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