
Motor Insurance News : गाड़ी का बीमा होना ही काफी नहीं है, बल्कि पॉलिसी की शर्तों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। अक्सर लोग सोचते हैं कि एक्सीडेंट या चोरी होने पर इंश्योरेंस कंपनी पैसा देगी ही, लेकिन आपकी एक छोटी सी चूक कंपनी को क्लेम खारिज करने का कानूनी अधिकार दे देती है।
दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के हालिया फैसले ने यह साफ कर दिया है कि रोजमर्रा की लापरवाही भारी पड़ सकती है। आइए समझते हैं कि वास्तविक परिस्थितियों में बीमा कंपनियां किन तकनीकी और कानूनी आधारों पर आपके दावों को खारिज करती हैं और एक पॉलिसीधारक के तौर पर आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
हाल ही में 'रमेश रावत बनाम न्यू इंडिया एश्योरेंस' मामले में दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। इस मामले में एक मारुति विटारा ब्रेजा कार चोरी हो गई थी, लेकिन कार में चाबी लगी रह गई थी। आयोग ने माना कि चाबी खराब होने के बावजूद उसे कार में छोड़ना एक बड़ी लापरवाही थी। इस आधार पर बीमा कंपनी द्वारा क्लेम को खारिज किए जाने के फैसले को सही ठहराया गया।
दुर्घटना के समय ड्राइवर के पास सही लाइसेंस होना अनिवार्य है। बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, बजाज जनरल इंश्योरेंस के चीफ टेक्निकल ऑफिसर अमरनाथ सक्सेना कहते हैं कि चालक के पास उसी श्रेणी के वाहन का वैध लाइसेंस होना चाहिए। यदि लाइसेंस एक्सपायर हो गया है या अवैध है, तो कंपनी दावा मानने से इनकार कर सकती है। इसी तरह, यदि ड्राइवर शराब या किसी अन्य नशे में पाया जाता है, तो इसे मोटर यान अधिनियम, 1988 और पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन मानकर क्लेम रिजेक्ट कर दिया जाता है।
बिजनेस स्टैंर्डड की रिपोर्ट में पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में मोटर इंश्योरेंस डिपार्टमेंट के हेड पारस पसरीचा की राय दी गई है। इसके मुताबिक, बीमा लेते समय वाहन के उपयोग की जानकारी देना जरूरी है। यदि आप अपनी पर्सनल कार का इस्तेमाल सवारी ढोने या सामान की डिलीवरी जैसे कमर्शियल कामों के लिए करते हैं, तो जोखिम बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में दुर्घटना होने पर बीमा कंपनी क्लेम देने से इनकार कर सकती है क्योंकि प्रीमियम केवल निजी उपयोग के आधार पर तय किया गया था।
| कारण | बचाव का तरीका |
|---|---|
| चाबी कार में छोड़ना | वाहन छोड़ते समय हमेशा चाबी साथ रखें |
| एक्सपायर्ड लाइसेंस | लाइसेंस को समय पर रीन्यू कराएं |
| कमर्शियल उपयोग | निजी वाहन का इस्तेमाल व्यापार के लिए न करें |
| सूचना में देरी | घटना के तुरंत बाद FIR और कंपनी को सूचित करें |
| अनधिकृत बदलाव | CNG किट या मॉडिफिकेशन की जानकारी कंपनी को दें |
इंश्योरेंस समाधान की सीओओ शिल्पा अरोड़ा का कहना है कि चोरी या एक्सीडेंट के बाद पुलिस और बीमा कंपनी को तुरंत सूचना देना जरूरी है। सूचना में देरी क्लेम खारिज होने का एक बड़ा कारण बनती है। साथ ही, बीमा सर्वेयर की जांच से पहले खुद गाड़ी की मरम्मत करवाना भी गलती है। कंपनी को यह जांचना होता है कि नुकसान कितना और किस वजह से हुआ है, तभी वह खर्च का भुगतान करती है।
गाड़ी में बिना बताए सीएनजी किट लगवाना या कोई अन्य मॉडिफिकेशन कराना जोखिम भरा है। शिल्पा अरोड़ा के अनुसार, अनधिकृत बदलावों से न केवल क्लेम खारिज हो सकता है, बल्कि वाहन का चालान भी हो सकता है। इसके अलावा, बीएमआर लीगल के पार्टनर शैंकी अग्रवाल बताते हैं कि बीमा केवल बाहरी आकस्मिक नुकसान को कवर करता है। अगर इंजन या गियरबॉक्स में मैकेनिकल खराबी आती है या पुर्जे घिसने की वजह से नुकसान होता है, तो वह बीमा के दायरे में नहीं आता।
इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस के महाप्रबंधक अभिषेक वर्मा चेतावनी देते हैं कि यदि दुर्घटना के समय पॉलिसी लैप्स है, तो कंपनी की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। समय पर रीन्यूअल न कराने से 'नो क्लेम बोनस' का लाभ भी खत्म हो जाता है। इसके अलावा, चोरी के दावों में वाहन के स्वामित्व और शर्तों के पालन से जुड़े सभी जरूरी कागज जमा करना अनिवार्य है।
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