Multi cap vs Flexi Cap Funds: अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश की योजना बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। बहुत से निवेशक मल्टीकैप (Multi Cap) और फ्लेक्सीकैप (Flexi Cap) फंड्स के बीच उलझन में रहते हैं। ऐसे में यहां कुछ आंकड़े दिए गए हैं, जिसकी मदद से आप बेहतर फैसला ले सकते हैं। हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 1, 3 और 5 वर्षों के औसत रिटर्न में मल्टीकैप फंड्स ने फ्लेक्सीकैप फंड्स को पीछे छोड़ दिया है। इसकी प्रमुख वजह मल्टीकैप फंड्स का मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अनिवार्य निवेश है, जिसने तेजी वाले बाजार में बेहतर रिटर्न दिया है।
इस अंतर पर इसलिए फोकस बढ़ रहा है क्योंकि दोनों ही कैटेगरी अलग-अलग मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में निवेश करते हैं, लेकिन उनके एलोकेशन के तरीके बहुत अलग हैं। एक कैटेगरी लार्ज, मिड और स्मॉल कैप में निवेश के लिए एक तय नियमों का पालन करती है, जबकि दूसरी कैटेगरी में फंड मैनेजर को पूरी आजादी होती है। इसलिए, हाल के मार्केट साइकल के नतीजों ने इस बात पर एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नियमों पर आधारित एलोकेशन, फ्लेक्सिबल पोजिशनिंग से बेहतर काम कर रहा है।
क्या होता है Multi Cap Fund?
सेबी के नियमों के अनुसार मल्टीकैप फंड्स को अपनी कुल इक्विटी का कम से कम 25-25% हिस्सा लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेश करना अनिवार्य होता है। इससे निवेशकों को तीनों मार्केट कैपिटलाइजेशन का संतुलित एक्सपोजर मिलता है। तेजी वाले बाजार में मिड और स्मॉलकैप शेयर अच्छा प्रदर्शन करते हैं, इसलिए इन फंड्स का रिटर्न अक्सर बेहतर रहता है।
Flexi Cap Fund कैसे अलग है?
फ्लेक्सीकैप फंड्स में फंड मैनेजर को निवेश का पूरा लचीलापन मिलता है। वह बाजार की स्थिति के अनुसार लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश का अनुपात बदल सकता है। यही वजह है कि बाजार में गिरावट या अस्थिरता के दौरान फ्लेक्सीकैप फंड्स अपेक्षाकृत बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
1, 3 और 5 साल में किसने किया बेहतर प्रदर्शन?
हालिया विश्लेषण के अनुसार मल्टीकैप फंड्स ने पिछले 1, 3 और 5 वर्षों में औसतन फ्लेक्सीकैप फंड्स से अधिक रिटर्न दिया है। इसका कारण मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूत तेजी रही, जिसका फायदा मल्टीकैप फंड्स को मिला। हालांकि, अलग-अलग फंड्स का प्रदर्शन उनके पोर्टफोलियो और फंड मैनेजर की रणनीति पर भी निर्भर करता है।
जोखिम भी है अधिक
विशेषज्ञों का कहना है कि मल्टीकैप फंड्स में बेहतर रिटर्न की संभावना के साथ जोखिम भी अधिक रहता है। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। वहीं फ्लेक्सीकैप फंड्स में फंड मैनेजर जोखिम के अनुसार पोर्टफोलियो बदल सकता है, जिससे अस्थिर बाजार में नुकसान सीमित रखने में मदद मिल सकती है।
किस निवेशक के लिए कौन सा फंड?
अगर आपका निवेश का लक्ष्य 7-10 वर्ष या उससे अधिक का है और आप बाजार के उतार-चढ़ाव को सहन कर सकते हैं, तो मल्टीकैप फंड बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, यदि आप अपेक्षाकृत कम जोखिम के साथ लंबी अवधि में स्थिर रिटर्न चाहते हैं, तो फ्लेक्सीकैप फंड अधिक उपयुक्त माना जाता है।
निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि केवल पिछले रिटर्न देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। फंड का ट्रैक रिकॉर्ड, फंड मैनेजर का अनुभव, जोखिम प्रोफाइल, निवेश अवधि और अपने वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही किसी फंड का चयन करें। म्यूचुअल फंड बाजार जोखिमों के अधीन होते हैं और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते।
लंबी अवधि में दोनों कैटेगरी में है वेल्थ क्रिएशन की क्षमता
मल्टीकैप और फ्लेक्सीकैप दोनों ही इक्विटी म्यूचुअल फंड की मजबूत श्रेणियां हैं। जहां मल्टीकैप फंड्स ने हाल के वर्षों में बेहतर औसत रिटर्न दिया है, वहीं फ्लेक्सीकैप फंड्स ने बाजार के अलग-अलग दौर में बेहतर स्थिरता दिखाई है। ऐसे में सही विकल्प का चुनाव आपकी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश के उद्देश्य पर निर्भर करेगा।