
बच्चों की उच्च शिक्षा और उनके करियर के सपनों को पूरा करने के लिए आज के दौर में मोटी रकम की जरूरत होती है। ऐसे में माता-पिता के लिए चिल्ड्रन म्यूचुअल फंड एक शानदार और अनुशासित निवेश का जरिया बनकर उभरे हैं। ये फंड्स खास तौर पर बच्चों के भविष्य के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इनमें निवेश की गई राशि न केवल बढ़ती है, बल्कि जरूरत के समय एक बड़ा फंड भी उपलब्ध कराती है।
ये खास तरह के ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड्स होते हैं। इनका मुख्य मकसद बच्चों की पढ़ाई, विदेश में शिक्षा या उनके जीवन के बड़े पड़ावों के लिए पैसा जमा करना है। इन स्कीम्स में एक अनिवार्य लॉक-इन पीरियड होता है। निवेश करने के बाद आप कम से कम 5 साल या बच्चे के 18 साल का होने तक, जो भी पहले हो, पैसा नहीं निकाल सकते। यह पाबंदी माता-पिता को अनुशासित रखती है ताकि वे बीच में पैसा खर्च न करें।
इन फंड्स का ज्यादातर हिस्सा इक्विटी यानी शेयर बाजार में निवेश किया जाता है। इससे लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है। कुछ फंड्स हाइब्रिड मॉडल भी अपनाते हैं, जिनमें जोखिम कम करने के लिए इक्विटी और डेट दोनों का मिश्रण होता है। फंड मैनेजर बहुत सोच-समझकर स्टॉक्स चुनते हैं ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों को मुनाफा हो सके। लॉक-इन की वजह से फंड मैनेजर पर जल्दी पैसा लौटाने का दबाव नहीं होता, जिससे वे लंबी अवधि के लिए बेहतर फैसले ले पाते हैं।
इन फंड्स का सबसे बड़ा फायदा 'कंपाउंडिंग' की ताकत है। अगर आप बच्चे के जन्म के समय से ही निवेश शुरू कर देते हैं, तो छोटा-छोटा निवेश भी भविष्य में बहुत बड़ा बन जाता है। इससे समय रहते शिक्षा की बढ़ती महंगाई से लड़ने में मदद मिलती है। साथ ही, माता-पिता को मानसिक शांति रहती है कि उनके बच्चे का भविष्य आर्थिक रूप से सुरक्षित है। यह निवेश बच्चों के लिए एक अलग 'बास्केट' की तरह काम करता है, जिसे दूसरी जरूरतों के लिए नहीं छुआ जाता।
चिल्ड्रन म्यूचुअल फंड में आप अपनी सुविधा के अनुसार एसआईपी (SIP) या एकमुश्त (Lumpsum) पैसा लगा सकते हैं। माता-पिता चाहें तो हर साल निवेश की राशि को थोड़ा-थोड़ा बढ़ा (Top-up) भी सकते हैं। अगर आपके दो बच्चे हैं, तो आप दोनों के लिए अलग-अलग खाते खोलकर निवेश का प्रबंधन कर सकते हैं। यह लचीलापन इसे हर परिवार के लिए उपयोगी बनाता है।
यह फंड उन माता-पिता के लिए बेहतरीन है जो अभी-अभी पेरेंट्स बने हैं और लंबे समय के लिए बचत करना चाहते हैं। इसके अलावा, स्कूल जाने वाले बच्चों या किशोरों के माता-पिता भी इसका फायदा उठा सकते हैं। अगर आपके बच्चे को कॉलेज जाने या प्रोफेशनल कोर्स करने में अभी कुछ साल बाकी हैं, तो आप इस माध्यम से प्रवेश परीक्षा की तैयारी या विदेश भेजने के खर्च का इंतजाम कर सकते हैं।
ध्यान रखें कि ये बाजार से जुड़े निवेश हैं, इसलिए इनमें गारंटीड रिटर्न की सुविधा नहीं होती। इक्विटी में निवेश होने के कारण शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव आ सकता है। इसीलिए विशेषज्ञों का मानना है कि हर 2-3 साल में अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूर करनी चाहिए। याद रहे कि लॉक-इन पीरियड खत्म होने से पहले आप अपनी जमा पूंजी नहीं निकाल पाएंगे, इसलिए अपनी लिक्विडिटी की जरूरतों को समझकर ही निवेश करें।
बच्चों के म्यूचुअल फंड लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिनमें कम से कम पांच साल या बच्चे के 18 साल के होने तक का लॉक-इन होता है, जो शिक्षा और भविष्य के मील के पत्थर के लिए एक अनुशासित निवेश पूल बनाने में मदद करता है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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