म्यूचुअल फंड में बदला ट्रेंड, अब सिर्फ इक्विटी नहीं, गोल्ड-सिल्वर और मल्टी-एसेट फंड्स में पैसा लगा रहे निवेशक

MF investment shift from equity to non-equity: म्यूचुअल फंड बाजार में बड़ा बदलाव दिख रहा है। निवेशक अब इक्विटी के बजाय गोल्ड-सिल्वर ETF और मल्टी-एसेट फंड्स को पसंद कर रहे हैं। लिक्विड फंड्स में भी रिटेल भागीदारी तेजी से बढ़ी है।

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड26 Dec 2025, 07:54 PM IST
म्यूचुअल फंड्स में बदल रहा निवेश करने का ट्रेंड (सांकेतिक तस्वीर)
म्यूचुअल फंड्स में बदल रहा निवेश करने का ट्रेंड (सांकेतिक तस्वीर)

Gold and Silver ETF growth: बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच म्यूचुअल फंड निवेशकों का नजरिया बदल रहा है। अब तक शेयर बाजार पर निर्भर रहने वाले निवेशक अब दूसरे विकल्पों पर भरोसा जता रहे हैं। साल 2025 में गोल्ड, सिल्वर और मल्टी एसेट जैसी योजनाओं में निवेश काफी बढ़ा है। यह बदलाव निवेशकों को सुरक्षित और बेहतर रिटर्न दिलाने में मदद कर रहा है।

इक्विटी का दबदबा हुआ कम

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में लंबे समय से इक्विटी फंड्स का राज रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 80% म्यूचुअल फंड खाते इक्विटी स्कीमों से जुड़े हैं। वहीं, 90% व्यक्तिगत निवेशकों की संपत्ति भी एक्टिव इक्विटी फंड्स में लगी है। हालांकि, अब यह रुझान बदल रहा है। जनवरी 2025 में कुल फोलियो में एक्टिव इक्विटी का हिस्सा 69% था। अक्टूबर 2025 तक यह घटकर 67% पर आ गया है।

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सोने और चांदी ने मारी बाजी

जब शेयर बाजार में गिरावट आई, तो सोने और चांदी की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को अपनी ओर खींचा। अक्टूबर के महीने में गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में करीब 20 लाख नए खाते खुले। यह आंकड़ा एक्टिव इक्विटी फंड्स में जुड़े नए खातों से 30% ज्यादा है। बाजार की अस्थिरता ने कमोडिटी आधारित इन स्कीमों को निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है।

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मल्टी एसेट फंड्स का बढ़ा क्रेज

बाजार के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए निवेशकों ने मल्टी एसेट फंड का सहारा लिया है। इस साल हाइब्रिड म्यूचुअल फंड कैटेगरी में 34,300 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया है। ये फंड अलग-अलग एसेट क्लास में पैसा लगाकर जोखिम को कम करते हैं। इसके अलावा, लिक्विड फंड में भी 4.28 लाख नए खाते जुड़े हैं। लोग अब सेविंग अकाउंट के विकल्प के तौर पर लिक्विड फंड का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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फंड हाउस और निवेशकों को फायदा

म्यूचुअल फंड अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव अच्छी बात है। इससे फंड हाउस की निर्भरता सिर्फ इक्विटी पर नहीं रहेगी और उन्हें स्थिर कमाई होगी। साथ ही, अब रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) को इक्विटी का दर्जा मिलने से इसमें भी निवेश बढ़ने की उम्मीद है। आने वाले समय में नए प्रॉडक्ट्स बाजार के दायरे को और बड़ा करेंगे।

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स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स की एंट्री

बाजार में जल्द ही स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) अपनी जगह बना सकते हैं। ये फंड उन जरूरतों को पूरा करेंगे जो मौजूदा स्कीमों से पूरी नहीं होतीं। अपनी हाई रिटर्न क्षमता के कारण ये फंड उन निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं जो फिलहाल पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) का इस्तेमाल करते हैं। यह नई कैटेगरी म्यूचुअल फंड के दायरे को और विस्तार देगी।

Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। इसमें बताए गए विचार और सुझाव एक्सपर्ट के हैं, मिंट हिंदी के नहीं। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि निवेश संबंधी कोई फैसला लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि बाजार की स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और हालात अलग-अलग हो सकते हैं।

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