Mutual Fund Ratios: किस फंड में फायदा-किसमें रिस्क, निवेश से पहले इन 5 रेशियो को ध्यान से पढ़ें

Mutual Fund Ratios: म्यूचुअल फंड चुनते वक्त सिर्फ रिटर्न देखना काफी नहीं है। अल्फा, बीटा समेत कुछ अन्य रेशियो हैं जिनपर ध्यान रखना जरूरी है। ये रेशियो यह समझने में मदद करते हैं कि फंड कितना रिस्की है और रिटर्न उस रिस्क के लायक है या नहीं। समझदारी से निवेश करने के लिए ये रेशियो जानना जरूरी है।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड21 Jan 2026, 02:00 PM IST
किस फंड में फायदा-किसमें रिस्क, निवेश से पहले इन 5 रेशियो को ध्यान से पढ़ें
किस फंड में फायदा-किसमें रिस्क, निवेश से पहले इन 5 रेशियो को ध्यान से पढ़ें(istock)

Mutual Fund Ratios: आजकल म्यूचुअल फंड भारत में सबसे पसंदीदा निवेश विकल्पों में से एक हैं। ये इक्विटी, डेट और अलग-अलग एसेट क्लास में ग्रोथ का मौका देते हैं। चूंकि ये मार्केट से जुड़े होते हैं, इनके रिटर्न कभी ऊपर जाते हैं तो कभी नीचे। और इसलिए सिर्फ रिटर्न देखकर निवेश का फैसला लेना अक्सर गलत साबित हो सकता है। यहीं पर कुछ जरूरी म्यूचुअल फंड रेशियो निवेशकों के लिए गेम-चेंजर बन जाते हैं।

Alpha: फंड ने कितना बेहतर किया

अल्फा यह बताता है कि किसी म्यूचुअल फंड ने अपने रिस्क के हिसाब से कितना बेहतर या खराब प्रदर्शन किया। अगर किसी फंड का अल्फा पॉजिटिव है, तो मतलब उसने अपने बेंचमार्क से ज्यादा रिटर्न दिया। जैसे +2 अल्फा का मतलब है कि फंड ने उम्मीद से 2% बेहतर परफॉर्म किया। नेगेटिव अल्फा इस बात का संकेत है कि फंड पीछे रह गया।

Beta: मार्केट रिस्क की झलक

बीटा से पता चलता है कि कोई फंड बाजार के मुकाबले कितना जोखिम भरा है। बीटा अगर 1 है, तो फंड बाजार के साथ-साथ चलता है। 1 से कम बीटा का मतलब कम उतार-चढ़ाव और ज्यादा स्थिरता, जबकि 1 से ऊपर बीटा ज्यादा रिस्की माना जाता है। हाई रिटर्न चाहने वाले निवेशक अक्सर हाई बीटा फंड चुनते हैं, लेकिन जोखिम समझना जरूरी है।

Sharpe Ratio: रिटर्न vs रिस्क

शार्प रेश्यो यह बताता है कि लिए गए जोखिम के मुकाबले फंड ने कितना रिटर्न दिया। जितना ज्यादा शार्प रेश्यो, उतना बेहतर माना जाता है। आमतौर पर 1 से ऊपर का शार्प रेश्यो अच्छा समझा जाता है। 1 से नीचे का मतलब यह हो सकता है कि जोखिम ज्यादा लिया गया, लेकिन रिटर्न उतना खास नहीं मिला।

Standard Deviation:फंड कितना ऊपर-नीचे होता रहता है?

स्टैंडर्ड डेविएशन यह दिखाता है कि फंड के रिटर्न अपने औसत से कितना भटके हैं। ज्यादा स्टैंडर्ड डेविएशन का मतलब ज्यादा उतार-चढ़ाव और ज्यादा रिस्क। कम स्टैंडर्ड डेविएशन वाले फंड उन निवेशकों को पसंद आते हैं जो स्थिर रिटर्न चाहते हैं।

R-Squared: बेंचमार्क से तालमेल

आर-स्क्वैरेड बताता है कि फंड अपने बेंचमार्क इंडेक्सको कितनी नजदीकी से फॉलो करता है। 70 से 100 के बीच आर-स्क्वैरेड वाले फंड बाजार के ट्रेंड को करीब से ट्रैक करते हैं। वहीं 40 से कम आर-स्क्वैरेड वाले फंड ज्यादा स्वतंत्र तरीके से चलते हैं, जो एक्टिव फंड्स के लिए ठीक माना जाता है।

निवेश करने से पहले इन पांच रेशियो को समझना जरूरी है। ये बताते हैं कि आपका फंड कितना रिस्की है, कितना स्थिर है और बेंचमार्क से कितना बेहतर कर रहा है। सही जानकारी से आप अपने निवेश को ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद बना सकते हैं।

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