Explained: NPS में अब हेल्थ इंश्योरेंस भी! महंगे प्रीमियम की होगी छुट्टी, बुढ़ापे में मिलेगा बड़ा सहारा

NPS: पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े बदलाव कर रहा है। इससे अब सब्सक्राइबर्स को हेल्थ कवर भी मिलेगा। NPS में बचत का 30% तक हिस्सा इलाज के खर्च के लिए अलग से रखा जा सकता है।

Jitendra Singh
पब्लिश्ड17 Feb 2026, 06:43 PM IST
NPS: पेंशन की रकम से बीमारी का भी इलाज हो जाएगा।
NPS: पेंशन की रकम से बीमारी का भी इलाज हो जाएगा।

NPS: अगर आप नेशनल पेंशन सिस्टम (National Pension System) यानी NPS में निवेश करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। पेंशन से जुड़ी सबसे बड़ी रेगुलेटर संस्था पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने बड़ा फैसला लिया है। सब्सक्राइबर्स को अब हेल्थ कवर भी मिल सकता है। PFRDA का कहना है कि तीन पेंशन फंड मैनेजर इस दिशा में काम कर रहे हैं। ये प्लान पेंशन प्रोडक्ट को हेल्थ इंश्योरेंस या हेल्थकेयर सर्विस के साथ जोड़ेंगे। इससे पेंशन के साथ इंश्योरेंस भी मिलेगा।

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक, ICICI, Axis और टाटा के पेंशन फंड हेल्थ से जुड़े नए प्लान पर काम कर रहे हैं। इसमें कोई भी व्यक्ति अपनी पसंद के किसी भी पेंशन फंड मैनेजर के साथ स्वास्थ्य अकाउंट में रकम जमा कर सकता है। यह मौजूदा NPS मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के तहत तय इन्वेस्टमेंट गाइडलाइंस के हिसाब से पैसे इन्वेस्ट करेगा। यह स्कीम खासतार से उन लोगों को ध्‍यान में रखकर तैयार की गई है, जो रिटायरमेंट की बचत के साथ-साथ अपने मेडिकल खर्चों के लिए भी एक सुरक्षित फंड बनाना चाहते हैं।

30% अलग जमा कर सकते हैं रकम

इसी साल जनवरी में PFRDA ने हेल्थ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया था। सब्सक्राइबर्स को हेल्थ कवर देना इसी पहल का हिस्सा है। इसके तहत निवेशक अपने पेंशन प्लान में से 30 फीसदी तक रकम मेडिकल जरूरतों के लिए अलग रख सकते हैं। ये एक तरह का “मेडिकल पेंशन” फंड बनेगा, जो सिर्फ इलाज के काम आएगा। इससे एक खास “मेडिकल पेंशन” पूल बन जाएगा। इसका मकसद लोगों को बुढ़ापे में बढ़ते हेल्थकेयर खर्चों के लिए फाइनेंशियली तैयार रहने के लिए बढ़ावा देना है, जो अक्सर रिटायरमेंट के सबसे बड़े रिस्क में से एक होता है।

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क्या है NPS स्वास्थ्य पेंशन स्कीम?

NPS स्वास्थ्य पेंशन स्कीम को खास तौर पर इलाज से जुड़ी जरूरतों के लिए बनाया गया है। इस योजना में जमा किया गया पैसा भविष्य में डॉक्टर की फीस, दवाइयों और अस्पताल में भर्ती होने के खर्च के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। सरल भाषा में कहें, तो अब आपकी पेंशन की रकम सिर्फ रिटायरमेंट के लिए नहीं, बल्कि बीमारी के समय भी आपके काम आएगी।

NPS में हेल्थ से जुड़े प्लान का मिलेगा फायदा

दरअसल, NPS में कई निवेशक होते हैं, इसलिए पेंशन फंड बड़े पैमाने पर बात कर सकते हैं। इससे हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों से सस्ते टॉप-अप प्लान मिल सकते हैं। हॉस्पिटल्स भी बड़े वॉल्यूम की वजह से इलाज में बेहतर डील भ मिल सकती है। इसके साथ ही इलाज के बाद हॉस्पिटल को पेमेंट तुरंत मिलेगा। ये सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम से अलग है, जहां पेमेंट में महीनों लग जाते हैं। ICICI, Axis और टाटा ग्रुप इस पर काम कर रही हैं। ये कंपनियां टॉप अप प्लान लॉन्च कर सकती है। PFRDA ने उम्मीद जताई जताई है कि ICICI जल्द ही फाइनल प्रोडक्ट लॉन्च करने की तैयारी में है।

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स्कीम कैसे करेगी काम

ये स्‍कीम एक तरह से मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के तहत काम करेगी। यहां कस्‍टरमर्स को खुद योगदान करना होगा। PFRDA के सर्कुलर के अनुसार, यह एक कॉन्ट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम होगी। फिलहाल इस स्कीम को एक पायलट प्रोजेक्ट (ट्रायल) के तौर पर परखा जा रहा है। पेंशन फंड (PF) योजना को सीमित समय के लिए पेश करेंगे। यह अभी किसी एक या दो राज्यों में सीमित नहीं है, बल्कि पायलट आधार पर, पीएफआरडीए (PFRDA) ने इसे सभी के लिए स्वैच्छिक आधार पर शुरू किया है। चूंकि यह 2026 की शुरुआत में ही लाई गई है, यह धीरे-धीरे अधिक राज्यों में पूरी तरह लागू होगी।

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मिलेंगी ये सुविधाएं

1. आउटपेशेंट या इनपेशेंट मेडिकल खर्चों को पूरा करने के लिए कभी भी पार्शियल विड्रॉल की सुविधा।

2. कोई कितनी बार ये पार्शियल विड्रॉल कर सकता है, इसकी कोई लिमिट सेट नहीं है।

3. हालांकि सब्सक्राइबर किसी भी समय अपने कंट्रीब्यूशन का 25% तक विड्रॉल कर सकता है।

4. पहले पार्शियल विड्रॉल के लिए एलिजिबल होने के लिए पहले Rs.50,000 का फंड जमा करना होगा।

5. क्रिटिकल इनपेशेंट मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए, जहां हॉस्पिटल का बिल टोटल अकाउंट फंड के 70% से अधिक है। कोई भी उस ट्रीटमेंट को कवर करने के लिए पूरी रकम निकाल सकता है।

6. यहां इस बात का ध्‍यान देना होगा,कि यह पैसा वैलिड क्लेम और बिल के बदले सीधे हेल्थ बेनिफिट एडमिनिस्ट्रेटर (HBA) / थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) को भेजा जाएगा।

7. मेडिकल खर्चों के सेटलमेंट के बाद जो भी सरप्लस बचेगा, उसे सब्सक्राइबर के मेन NPS अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

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क्लेम सेटलमेंट

निकाली गई रकम सीधे अस्पताल या इलाज से जुड़े संस्थानों (HBA या TPA) को भेजी जाएगी, जो बिल और इलाज से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर भुगतान करेंगे। इलाज का खर्च निकलने के बाद अगर कोई रकम बचती है, तो उसे दोबारा सब्सक्राइबर के कॉमन स्कीम अकाउंट में भेज दिया जाएगा।

महंगे प्रीमियम से मिलेगा छुटकारा

जानकारों का कहना है कि अगर यह काम कर गया, तो NPS लोगों की मेडिकल जरूरतों के लिए बड़ा फाइनेंशियल मददगार साबित हो सकता है। यह उन खर्चों के लिए बैक-स्टॉप का भी काम कर सकता है, जो मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत कवर नहीं होते। अक्‍सर क्लेम के लिए जो इंश्योरेंस कंपनियां रिजेक्ट कर देती हैं। वहीं उम्र बढ़ने के साथ साथ बीमारियां भी बढ़ने लगती हैं, जिससे लोगों को कई बीमारियों के लिए बड़े प्लान लेना पड़ता है। इसमें प्रीमियम भी काफी महंगा होता है। इससे लोगों को महंगे प्रीमियम से छुटकारा मिल सकता है। कुल मिलाकर NPS का यह प्लान बुढ़ापे की लाठी से कम नहीं है।

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