1 अप्रैल से शेयर बेचने पर 12% फ्लैट सरचार्ज, निवेशकों पर पड़ेगा सीधा असर, यहां जानें नए नियम

New 12% buyback surcharge: अगर आप बायबैक में शेयर बेचकर पैसे कमाते हैं, तो अब आपको पहले से ज़्यादा टैक्स देना पड़ सकता है। लोकसभा ने फाइनेंस बिल 2026 में 32 संशोधनों को मंजूरी दे दी है। अब शेयर बायबैक से होने वाली कमाई पर 12% का फ्लैट सरचार्ज लगेगा।

Jitendra Singh
अपडेटेड27 Mar 2026, 07:32 PM IST
New 12% buyback surcharge: 1 अप्रैल से नया फाइनेंशियल ईयर शुरू हो जाएगा।
New 12% buyback surcharge: 1 अप्रैल से नया फाइनेंशियल ईयर शुरू हो जाएगा।

New 12% Buyback Surcharge: लोकसभा ने फाइनेंस बिल 2026 (Finance Bill 2026) में कई अहम संशोधनों को मंज़ूरी दे दी है। इन संशोधनों से 1 अप्रैल से आपके निवेश के प्रबंधन और टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाओं पर सीधा असर पड़ेगा। सरकार ने फाइनेंस बिल 2026 (Finance Bill 2026) में 32 संशोधन पेश किए, जिन्हें बाद में सदन ने मंजूरी दे दी। संशोधित Finance Bill पर आज (शुक्रवार) राज्यसभा में विचार किया जाएगा।

नए बिल के अनुसार अब बायबैक से होने वाले कैपिटल गेन्स पर व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट दोनों तरह के शेयरधारकों को 12 प्रतिशत का फ्लैट सरचार्ज देना होगा। ये कदम निवेशकों के मुनाफे के गणित को पूरी तरह बदल देगा।

छोटे मझोले निवेशकों के सामने चुनौती

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक, अब तक 50 लाख तक की टैक्सेबल इनकम वाले व्यक्तिगत निवेशकों पर कोई सरचार्ज नहीं लगता था। 1 करोड़ रुपये तक पर 10% सरचार्ज था। लेकिन आपको बता दें कि इस नए नियम के बाद, मुनाफे की राशि चाहे जो भी हो, सीधा 12% सरचार्ज देना होगा। इससे डिविडेंड जैसे दूसरे विकल्पों के मुकाबले बायबैक का रास्ता ज्यादा महंगा हो गया है। जानकारों का कहना है कि इससे छोटे कॉरपोरेट शेयरधारकों और मध्यम आय वर्ग के निवेशकों का टैक्स बोझ बढ़ जाएगा। इससे उनके लिए बायबैक अब पहले जितना आकर्षक नहीं रहेगा।

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प्रमोटर्स और बड़े निवेशकों को राहत

हैरानी की बात ये है कि जहां छोटे निवेशकों पर बोझ बढ़ा है, वहीं सुपर रिच या बड़े निवेशकों को इसमें फायदा दिख रहा है। पहले 1 करोड़ से ज्यादा के मुनाफे पर 15% सरचार्ज लगता था, जिसे अब घटाकर 12% कर दिया गया है। साथ ही, प्रमोटर्स के लिए प्रभावी टैक्स दर को कॉर्पोरेट प्रमोटर्स के लिए 22% और अन्य के लिए 30% पर कैप किया गया है, ताकि टैक्स चोरी को रोका जा सके।

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यह बदलाव भी किया गया शामिल

फाइनेंस बिल में संशोधनों में उन स्थितियों में एक बदलाव भी शामिल किया गया है, जिनमें इनकम टैक्स अथॉरिटी की ओर से दी गई मंजूरियों को अवैध नहीं माना जाएगा। इसके मुताबिक, इस एक्ट के तहत किसी भी असेसमेंट, रीअसेसमेंट इनकम टैक्स या रीकम्प्यूटेशन प्रोसीडिंग्स के मामले में इनकम टैक्स अथॉरिटी की ओर से दी गई मंजूरी को इस आधार पर इनवैलिड नहीं माना जाएगा कि ऐसी मंजूरी में डिजिटल सिग्नेचर था या नहीं या ऐसा अप्रूवल इलेक्ट्रॉनिकली दिया गया था या नहीं।

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