New Labour Code: पिछले महीने सरकार ने 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को मिलाकर चार नए लेबर कोड्स जारी किए हैं। लेकिन जैसे ही ये नए लेबर कोड्स सामने आए, लोगों में सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि क्या अब उनकी टेक-होम सैलरी यानी हाथ में आने वाली रकम कम हो जाएगी। अब सरकार ने खुद इस पूरे मुद्दे पर स्थिति साफ कर दी है और बताया है कि नए लेबर कोड से आपकी टेक होम सैलरी पर असल में क्या असर पड़ेगा।
नया लेबर कोड्स पर सरकार का बयान
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साफ किया है कि नए लेबर कोड से कर्मचारियों की टेक होम सैलरी अपने आप कम नहीं होगी। मंत्रालय के मुताबिक PF कटौती अब भी ₹15000 की वैधानिक वेज सीलिंग (Wage Ceiling) पर ही आधारित रहेगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ₹15000 से ज्यादा वेतन पर PF में अतिरिक्त योगदान स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं। यानी अगर कर्मचारी या नियोक्ता चाहें तो ज्यादा योगदान कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करना जरूरी नहीं है।
PF कटौती को लेकर चिंता
दरअसल, नए लेबर कोड में वेज (Wage) की नई परिभाषा के मुताबिक अब बेसिक पे और उससे जुड़े कॉम्पोनेंट्स कुल वेतन का कम से कम 50% होना चाहिए। इसी वजह से यह आशंका बनी कि बेसिक बढ़ने से PF योगदान बढ़ेगा और टेक होम सैलरी घट जाएगी। कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि PF के साथ साथ ESIC, वर्कमैन कम्पनसेशन और मैटरनिटी बेनिफिट्स की गणना पर असर पड़ सकता है।
PF का ₹15000 वेज सीलिंग नियम समझिए
सरकार ने साफ किया है कि EPF की अनिवार्य कटौती सिर्फ ₹15000 तक की सैलरी पर ही लागू होती है। इससे ऊपर की रकम पर PF कटौती करना कर्मचारी और नियोक्ता की मर्जी पर निर्भर करता है। इसका मतलब यह हुआ कि नया लेबर कोड आने के बाद भी अगर PF की गणना ₹15000 की सीमा पर ही हो रही है, तो आपकी टेक होम सैलरी में कोई बदलाव नहीं होगा।
उदाहरण से समझें
मान लीजिए किसी कर्मचारी की मासिक आय ₹60,000 है, जिसमें बेसिक और DA ₹20,000 और बाकी भत्ते ₹40,000 हैं। EPF योगदान 12% के हिसाब से ₹1,800 ही रहेगा क्योंकि यह ₹15,000 की सीमा पर आधारित है।
लेबर कोड्स से पहले टेक-होम सैलरी = ₹56,400
लेबर कोड्स के बाद टेक-होम सैलरी = ₹56,400 यानी कोई बदलाव नहीं हुआ।
अलाउंस 50 प्रतिशत से ज्यादा हुआ तो क्या होगा
नए लेबर कोड के तहत अगर अलाउंस कुल वेतन के 50 प्रतिशत से ज्यादा हो जाते हैं, तो अतिरिक्त हिस्सा वेज में जोड़ दिया जाएगा। लेकिन PF फिर भी ₹15000 की सीमा से ही जुड़ा रहेगा, जब तक कर्मचारी स्वेच्छा से ज्यादा योगदान न करे।
नए लेबर कोड्स का उद्देश्य
21 नवंबर को जारी इन कोड्स में वेज कोड, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और ऑक्युपेशनल सेफ्टी कोड शामिल हैं। इनका असर करीब 40 करोड़ से ज्यादा कामगारों पर पड़ेगा, चाहे वे औपचारिक क्षेत्र में हों या अनौपचारिक में।