बदल गए रेंट एग्रीमेंट के नियम, मकान मालिक की मनमानी पर रोक, ऐसा नहीं करने पर 5000 का जुर्माना

New Rent Agreement 2025: केंद्र सरकार ने 'न्यू रेंट एग्रीमेंट 2025' लागू कर दिया है। अब हर रेंट एग्रीमेंट को दो महीने के भीतर रजिस्टर कराना जरूरी होगा। अगर नियमों को नहीं मानते हैं तो 5000 रुपये का जुर्माना लग सकता है।

Jitendra Singh
अपडेटेड19 Nov 2025, 08:54 PM IST
New Rent Agreement 2025: किराएदार अचानक घर नहीं खाली करा सकते हैं।
New Rent Agreement 2025: किराएदार अचानक घर नहीं खाली करा सकते हैं।

New Rent Agreement 2025: केंद्र सरकार ने मकान मालिक और किराएदारों को बड़ी राहत दी है। इस मामले में सरकार ने 'न्यू रेंट एग्रीमेंट 2025' लागू कर दिया है। इससे मकान मालिक अब किरायेदार से 6 महीने का एडवांस किराया नहीं मांग सकते हैं। यही नहीं अब कोई भी लैंडलॉर्ड अपने किरायेदार को रातों-रात घर से नहीं निकाल सकेगा। केंद्र सरकार ने भारत के बढ़ते रेंटल मार्केट में ट्रांसपेरेंसी और अनुशासन लाने के लिए न्यू रेंट एग्रीमेंट 2025 पेश किया है। ये नए नियम मॉडल टेनेंसी एक्ट और हालिया घोषणाओं पर आधारित हैं। इसका मकसद किरायेदारों और मकान मालिकों दोनों के हितों की रक्षा करना और विवादों को कम करना है।

अब तक कई लोग रेंट एग्रीमेंट तो बनवा लेते थे, लेकिन उसे रजिस्टर कराने में लापरवाही बरतते थे। नए नियमों ने इस ढिलाई को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब एग्रीमेंट साइन होने के दो महीने के भीतर उसका रजिस्ट्रेशन जरूरी कर दिया गया है। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर किराएदार का एक कानूनी रिकॉर्ड मौजूद हो। आप यह रजिस्ट्रेशन राज्य की ऑनलाइन प्रॉपर्टी वेबसाइट पर या नजदीकी रजिस्ट्रार ऑफिस में जाकर आसानी से करवा सकते हैं।

लगेगा 5000 रुपये जुर्माना

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर तय समय सीमा के भीतर एग्रीमेंट रजिस्टर नहीं हुआ, तो 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। रजिस्ट्रेशन कराने से किराएदार को लीगल सुरक्षा मिलेगी और कोई भी मकान मालिक मनमानी शर्तें नहीं थोप सकेगा। यह रजिस्ट्रेशन दो तरीकों से किया जा सकता है। ये राज्य की ऑनलाइन प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन वेबसाइट पर या नजदीकी रजिस्ट्रार ऑफिस में जाकर किया जा सकता है। यह नियम मकान मालिक और किराएदार दोनों को जवाबदेह बनाता है, ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी पचड़े से बचा जा सके।

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सिर्फ दो महीने का किराया होगा डिपॉजिट

सरकार के इस एक्ट से किराएदारों को बड़ी राहत मिली है। रिहायशी घरों में मकान मालिक अब सिर्फ 2 महीने का किराया सिक्योरिटी के तौर पर जमा करा सकते हैं। बेंगलुरू जैसे शहरों में मकान मालिक अभी सालभर का किराया एडवांस के रूप में ले लेते हैं। इससे किराएदारों पर वित्तीय दबाव बढ़ जाता था। कमर्शियल प्रॉपर्टी का छह महीने का किराया एडवांस लिया जा सकेगा। किराया बढ़ाने से पहले मकान मालिक को पहले से नोटिस देना अनिवार्य किया गया है। इससे मनमानी तरीके से रेंट बढ़ाने की प्रैक्टिस पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

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घर खाली करने के लिए नोटिस

नियम के तहत मकान मालिक अब किरायेदार से अचानकर घर खाली नहीं करा सकते हैं। इसके लिए तय प्रक्रिया और नोटिस पीरियड का पालन करना होगा।

मकान मालिकों को टैक्स पर बड़ी राहत

मकान मालिकों के लिए सबसे अच्छी खबर टैक्स के मोर्चे पर है। TDS कटौती की सीमा जो पहले 2.4 लाख रुपये सालाना थी, उसे बढ़ाकर अब 6 लाख रुपये सालाना कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि अब ज्यादा कमाई पर भी TDS नहीं कटेगा। इस नियम से मकान मालिकों के हाथ में ज्यादा पैसा आएगा।

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