New Rental Laws: सिक्यॉरिटी डिपॉजिट, मेंटेनेंस की जिम्मेदारी, बेदखली… रेंट एग्रीमेंट के नए नियम जान लीजिए

Model Tenancy Act 2021 Changes: न्यू रेंट रूल्स 2025 (New Rent Rules 2025) लागू होने के बाद अब किरायेदारी का पूरा प्रोसेस ज्यादा फॉर्मल, पारदर्शी और व्यवस्थित हो जाएगा। इस बदलाव से किरायेदारों को खास तौर पर राहत मिलेगी।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड4 Dec 2025, 10:38 AM IST
किराये पर मकान देने के नए नियम जान लीजिए (सांकेतिक तस्वीर)
किराये पर मकान देने के नए नियम जान लीजिए (सांकेतिक तस्वीर)

New Rental Laws 2025: देश में घरों को किराये पर देने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने न्यू रेंट रूल्स 2025 पेश किए हैं। ये नियम 'मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021' पर आधारित हैं। इन नियमों से किरायेदारों के साथ-साथ मकान मालिकों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

चूंकि जमीन और किरायेदारी का मामला राज्य सूची में आता है, इसलिए यह एक्ट सिर्फ एक टेम्पलेट है। इसे राज्यों को अपने अधिकार क्षेत्र में लागू करने के लिए या तो नए कानून बनाने होंगे या मौजूदा रेंट कंट्रोल एक्ट में बदलाव करने होंगे। तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों ने पहले ही इन नियमों के अनुसार अपने कानून बदल लिए हैं।

रेंट एग्रीमेंट का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

नए नियमों के अनुसार, हर रेंट एग्रीमेंट लिखित में होना जरूरी है। इस एग्रीमेंट को साइन करने के 60 दिनों के भीतर मकान मालिक और किरायेदार दोनों को मिलकर इसे डिजिटल रूप से स्टैंप कराकर ऑनलाइन रजिस्टर कराना होगा और इसकी सूचना 'डिस्ट्रिक्ट रेंट अथॉरिटी' को देनी होगी।

पहले कई राज्यों में हाथ से लिखे हुए या बिना रजिस्ट्रेशन वाले फिजिकल स्टैंप पेपर के एग्रीमेंट भी चलते थे। रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर राज्य के हिसाब से 5,000 रुपये या उससे अधिक का जुर्माना लग सकता है।

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सिक्यॉरिटी डिपॉजिट भी हो गई फिक्स

मॉडल एक्ट में सिक्योरिटी डिपॉजिट की रकम को सीमित किया गया है, जिससे किरायेदारों को बड़ी राहत मिलेगी। आवासीय प्रॉपर्टी के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट अधिकतम दो महीने के किराये से ज्यादा नहीं हो सकता। गैर-आवासीय प्रॉपर्टी या कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट अधिकतम छह महीने के किराये से ज्यादा नहीं हो सकता।

पहले कई भारतीय शहरों में मकान मालिक 6 से 12 महीने तक का किराया सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर मांगते थे। यह नियम खास तौर पर बड़े शहरों में काम करने वाले युवाओं या प्रवासी लोगों के लिए बड़ी राहत है। एग्रीमेंट समाप्त होने और खाली कब्जा (Vacant Possession) मिलने के बाद मकान मालिक किरायेदार की किसी भी बकाया देनदारी को काटकर डिपॉजिट की रकम वापस कर देगा।

24 घंटे पहले बताकर ही घर में एंट्री कर पाएगा मकान मालिक

नए नियमों से किरायेदार की निजता सुरक्षित होगी। मकान मालिक या प्रॉपर्टी मैनेजर को घर में एंट्री करने या इंस्पेक्शन करने से कम से कम 24 घंटे पहले किरायेदार को लिखित में या इलेक्ट्रॉनिक मोड के जरिए नोटिस देना अनिवार्य होगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी व्यक्ति सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद किराये पर दी गई प्रॉपर्टी में प्रवेश नहीं कर सकता है। हालांकि, युद्ध, बाढ़, आग, भूकंप या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा जैसी आपात स्थितियों में मकान मालिक बिना पूर्व सूचना के भी घर में एंट्री कर सकता है।

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किराया बढ़ाने से पहले देना होगा नोटिस

किराये में वृद्धि अब मनमानी नहीं होगी और 12 महीने से पहले किराया नहीं बढ़ाया जा सकेगा। नियम में स्पष्ट कर दिया गया है कि मकान मालिक को किराया बढ़ोतरी से कम से कम 90 दिन पहले किरायेदार को लिखित में नोटिस देना होगा। रेंटेनपी (RentenPe) की को-फाउंडर और सीईओ सारिका शेट्टी के अनुसार, 'विवाद समाधान 60 दिनों के भीतर हो जाना चाहिए।' नए नियमों से किरायेदारों को अचानक किराया बढ़ाए जाने या बिना वैध कारण के बेदखल किए जाने से सुरक्षा मिलती है।

मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारियों का बंटवारा

किरायेदारी समझौते में अगर कुछ अलग तय न हो, तो मरम्मत की जिम्मेदारी इस तरह से तय की गई है।

  • बाहरी/आंतरिक वायरिंग, प्लंबिंग पाइप, दरवाजे-खिड़कियों की पुताई और मुख्य संरचना की मरम्मत मकान मालिक करवाएगा, बशर्ते इसे किरायेदार की वजह से नुकसान नहीं पहुंचा हो।
  • हालांकि, नल, शॉवर, सिंक, टॉयलेट, गीजर, सर्किट ब्रेकर, स्विच, सॉकेट, किचन फिक्सचर, दरवाजों-खिड़कियों के लॉक, गार्डन और खुले स्थानों का रखरखाव की जिम्मेदारी किरायेदार की होगी।

अगर घर मरम्मत के बिना रहने लायक नहीं रहता है और मकान मालिक लिखित नोटिस देने के 30 दिन बाद भी मरम्मत नहीं करवाता है, तो किरायेदार मरम्मत करा सकता है और उसका खर्च किराये में से काट सकता है। अगर मकान मालिक मरम्मत करने से मना कर दे, तो किरायेदार 15 दिन का नोटिस देकर घर छोड़ सकता है।

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कब किरायेदार को बेदखल कर सकता है मकान मालिक, जान लीजिए

मकान मालिक को किरायेदार को बेदखल करने के लिए 'रेंट अथॉरिटी' में आवेदन करना होगा और इसके लिए उसके पास वैध कारण होने चाहिए। लगातार दो महीने किराया न देना, प्रॉपर्टी का गलत इस्तेमाल या मकान मालिक की लिखित सहमति के बिना किरायेदार मकान के ढांचे में बदलाव करे तो मकान मालिक किरायेदार से घर खाली करने को कह सकता है।

इसी तरह, टेनेंसी की अवधि खत्म होने के बावजूद अगर किरायेदार घर खाली नहीं करता है, तो उसे बढ़े हुए किराए का भुगतान करना होगा। मकान मालिक की स्पष्ट सहमति के बिना किरायेदार मकान को या मकान के किसी हिस्से को किराये पर नहीं लगा सकता है।

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