
Mutual Fund Investment: भारतीय इक्विटी मार्केट नई ऊंचाइयों को छू रहा है, लेकिन म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री अभी भी बड़े दांव लगाने से बच रही है। 14 महीने बाद निफ्टी ने गुरुवार को नया ऑल-टाइम हाई बनाया है। इसके बावजूद, फंड मैनेजर्स जल्दबाजी में आक्रामक तरीके से पैसा लगाना नहीं चाहते हैं। अक्टूबर महीने के डेटा के अनुसार, म्यूचुअल फंड्स के पोर्टफोलियो में 2.09 लाख करोड़ रुपये की बड़ी नकदी जमा है, जो उनकी सतर्क रणनीति को दर्शाती है।
फंड हाउसों ने अपनी नकदी हिस्सेदारी में बढ़ोतरी की है। सितंबर में यह 1.99 लाख करोड़ रुपये थी, जो अक्टूबर में 10,000 करोड़ रुपये बढ़कर 2.09 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इसका मतलब है कि बाजार में जोरदार तेजी के बावजूद फंड मैनेजर्स नए निवेश करने के लिए सही मौकों का इंतजार कर रहे हैं। ACE MF के मासिक आंकड़ों के मुताबिक, इंडस्ट्री में मौजूद करीब 48 फंड हाउसों में से पांच ऐसे हैं जिनके पोर्टफोलियो में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी है।
नकदी का इतना बड़ा भंडार जमा होने का एक मुख्य कारण स्टॉक का ऊंचा मूल्यांकन है। फ्रैंकलीन टेंपल्टन इंडिया एसेट मैनेजमेंट की एक नोट के अनुसार, लार्जकैप स्टॉक्स अपने ऐतिहासिक औसत से ऊपर कारोबार कर रहे हैं। वहीं, मिडकैप स्टॉक्स 27 से 28 गुना अर्निंग्स के आसपास हैं और प्रीमियम पर बने हुए हैं। मिडकैप की यह तेजी लार्जकैप की तुलना में उनके मजबूत दोहरे अंकों की अर्निंग्स ग्रोथ के कारण है, जबकि लार्जकैप की ग्रोथ हाई सिंगल डिजिट में है।
एसेट मैनेज्ड (AUM) के आधार पर देश के सबसे बड़े फंड हाउस, एसबीआई म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में अक्टूबर में 31,912 करोड़ रुपये की नकदी थी। हालांकि, नकदी के मामले में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड सबसे आगे रहा, जिसके पास अक्टूबर में 32,823 करोड़ रुपये की सबसे ज्यादा नकदी थी। म्यूचुअल फंड बाजार में नए एंट्री लेने वाले जियो ब्लैकरॉक म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में 53.92 करोड़ रुपये की नकदी थी, जो उनके कुल एयूएम का 2.28% था।
एक्सिस म्यूचुअल फंड के जयेश सुंदर को लगता है कि पिछले एक साल की कंसोलिडेशन के बाद निफ्टी का मूल्यांकन अब उचित हो गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले तिमाहियों में निफ्टी की अर्निंग्स में सुधार जारी रहेगा और अर्निंग्स डाउनग्रेड काफी हद तक कम हो जाएंगे।
वहीं, टाटा एसेट मैनेजमेंट में इक्विटीज के सीआईओ राहुल सिंह का मानना है कि भारत के कॉरपोरेट सेक्टर में प्रॉफिट एस्टिमेट्स की रिकवरी और ग्लोबल वैल्यूएशन प्रीमियम के ज्यादा उचित होने का कॉम्बिनेशन, अगले 12 से 15 महीनों में भारतीय बाजारों के लिए थोड़ा ज्यादा आशावादी माहौल बनाता है। उन्होंने निवेशकों को फ्लेक्सी कैप, मल्टी एसेट और बैंकिंग एवं कंज्यूमर सेक्टर्स के थीमेटिक फंड्स में बने रहने की सलाह दी।
फ्रैंकलिन टेंपल्टन इंडिया एसेट मैनेजमेंट ने वित्त वर्ष 2026 के आउटलुक पर कहा कि पिछले साल के 8 से 10 प्रतिशत अर्निंग्स डाउनग्रेड के बाद वित्त वर्ष 2026 में सामान्य सिंगल-डिजिट ग्रोथ मिलने की संभावना है। वहीं, वित्त वर्ष 2027 में फाइनेंशियल्स के नेतृत्व में 16 से 17 प्रतिशत की मजबूत ग्रोथ दिख सकती है। उनका निष्कर्ष है कि फंडामेंटल्स मजबूत हैं और विभिन्न सेक्टर्स में वैल्यूएशन ज्यादा हुए नहीं, बल्कि उचित लग रहे हैं।
फ्रैंकलिन टेंपलटन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए फ्लेक्सी कैप, मल्टी कैप और लार्ज एंड मिडकैप फंड्स जैसे डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स में एसआईपी की सलाह देता है। जोखिम को कम करने के लिए मल्टी एसेट और बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स जैसी डायनेमिक एलोकेशन स्ट्रैटेजीज भी मददगार हो सकती हैं।
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