GST Debate in Lok Sabha: लोकसभा में बुधवार को एक बार फिर विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच जोरदार ठन गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के भाषण पर सीधी चोट की। तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने भाषण में आम आदमी के जीवन पर जीएसटी का बोझ बताया था। उन्होंने दावा किया कि जन्म से लेकर मृत्यु तक हर चरण में जीएसटी वसूला जाता है।
क्या दूध पर लगता है GST?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पर सीधा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अभिषेक ने सदन को गुमराह करने की कोशिश की और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया। सीतारमण ने तंज कसते हुए कहा कि दूध, शिक्षा, किताबें, पेंसिल-शार्पनर जैसी ज़रूरी चीजों पर कभी जीएसटी नहीं लगाया गया। स्वास्थ्य सेवाओं और अंतिम संस्कार सेवाओं पर भी जीएसटी नहीं है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि शायद पश्चिम बंगाल में चल रहे सिंडिकेट ही मौत पर कट मनी वसूलते होंगे।
शिक्षा भी है GST से बाहर
उन्होंने साफ कहा कि 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से दूध पर बिल्कुल शून्य जीएसटी है। प्री-स्कूल से उच्च माध्यमिक तक की पढ़ाई पर जीएसटी मुक्त है। मान्यता प्राप्त योग्यताओं वाली शिक्षा पर भी शून्य जीएसटी। किताबें, पाठ्यपुस्तकें और नोटबुक पर भी 2017 से जीएसटी खत्म हो चुका है। उन्होंने व्यंग्य किया कि अभिषेक ने पेंसिल, शार्पनर जैसी छोटी चीजों का भी जिक्र किया। लेकिन पेंसिल, शार्पनर, इरेजर, एक्सरसाइज बुक, नोटबुक और नक्शे पर भी जीएसटी जीरो है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर सीतारमण ने जीएसटी काउंसिल के सदस्यों को धन्यवाद दिया। इलाज, डायग्नोसिस और देखभाल जैसी सेवाओं पर 1 जुलाई 2017 से ही शून्य जीएसटी है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा योजनाओं पर भी अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों (सितंबर 2025) में जीएसटी को जीरो कर दिया गया।
बीजेपी सांसदों ने बजाई तालियां
सदन में यह बहस बजट सत्र के दौरान हुई, जब विपक्ष जीएसटी को लेकर सरकार पर हमलावर था। अभिषेक बनर्जी ने अपने भाषण में आम आदमी के जीवन पर जीएसटी का बोझ बताया था, लेकिन सीतारमण ने उनके हर सवाल का जवाब दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस पटलवार पर बीजेपी सदस्यों ने जोरदार तालियां बजाईं, जबकि विपक्ष ने वॉकआउट की धमकी दी।