Bank Account After Death: अगर बैंक में खाताधारक और उसके नॉमिनी दोनों की अचानक मौत हो जाए, तो पैसा आखिर किसे मिलेगा? ये सवाल कई बार दिमाग में आता है, लेकिन बेहद कम लोग ही इसका जवाब जानते हैं। आइए इस मामले में बैंक के नियम को आसान शब्दों में समझते हैं।
जब कोई बैंक खाता खुलवाता है, तो अक्सर खाताधारक एक नॉमिनी चुनता है, यानी वो शख्स जिसे उसकी मौत के बाद पैसा मिले। लेकिन अगर खाताधारक और नॉमिनी दोनों की एक साथ या अलग-अलग समय पर मौत हो जाए, तो मामला थोड़ा पेचीदा हो जाता है। ऐसी स्थिति फिर पैसा कहां जाएगा? इसका जवाब कानूनी वारिस (legal heirs) है।
कौन होते हैं कानूनी वारिस?
कानूनी वारिस वो लोग होते हैं जो खाताधारक के परिवार से सीधे तौर पर जुड़े होते हैं, जैसे पति/पत्नी, बच्चे, माता-पिता या भाई-बहन। लेकिन पैसा तभी मिलेगा जब वे बैंक को सही दस्तावेज दिखाएंगे। सबसे पहले बैंक को खाताधारक और नॉमिनी की मौत की सूचना देनी होगी। इसके बाद मौत का प्रमाण पत्र (death certificate) और अपनी पहचान साबित करने वाले कागजात (जैसे Aadhaar या PAN कार्ड) जमा करने पड़ते हैं।
अगर सब सही चल रहा हो, तो बैंक वारिसों से लेटर ऑफ डिस्क्लेमर या लिगल हायर सर्टिफिकेट मांग सकता है। लेकिन अगर पैसे की राशि ज्यादा है या कई लोग दावा कर रहे हैं, तो कोर्ट से सक्सेशन सर्टिफिकेट लेना पड़ सकता है। बैंक इन कागजातों को चेक करेगा और फिर पैसा वारिसों में बांट देगा। बंटवारा भारतीय उत्तराधिकार कानून (जैसे हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956) के हिसाब से होगा।
अगर खाताधारक ने वसीयत (will) बनाई हो, तो पैसा उसी हिसाब से बंटेगा जो वसीयत में लिखा होगा। अगर वसीयत नहीं है, तो कानून के मुताबिक परिवार के सदस्यों में पैसा बांटा जाएगा। उदाहरण के लिए, पति/पत्नी और बच्चे को बराबर हिस्सा मिल सकता है। अगर कोई भी वारिस सामने न आए, तो लंबे समय बाद पैसा सरकार के पास चला जाता है, लेकिन ऐसा बहुत कम होता है।