
NPS: आजकल के इस अर्थयुग में हर कोई मोटी कमाई करना चाहता है। वहीं बुढ़ापे के लिए सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा की भी दरकार रहती है। ऐसे में निवेश के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को भी बेहतर माना जाता है। केंद्र सरकार ने इसे जनवरी 2004 में सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू किया गया था। 5 साल बाद यानी 2009 में इसे सभी वर्गों के लिए खोल दिया गया। एनपीएस एक ऐसा निवेश विकल्प है, जो शानदार रिटर्न देता है और खूब टैक्स सेविंग कराता है। NPS में समय-समय पर कई बदलाव होते रहते हैं।
इससे यूजर्स को काफी फायदा होता है। हाल ही में पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को बेहतर बनाने के लिए कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें पहली बार PFRDA ने पूछा कि भारतीयों को रिटायरमेंट के लिए कितना बचाना चाहिए। इसके साथ ही यह भी पूछा कि उस बचत को एक स्टेबल मंथली पेंशन में कैसे बदला जा सकता है।
NPS ने तीन नए प्रस्ताव दिए हैं। इस पर सुझाव मांगे गए हैं। नियामक का कहना है कि इसका मकसद संचयन और विनिवेश, दोनों चरणों को शामिल करके भारत में पेंशन को लेकर इंटरेस्ट बढ़ाना है। पिछले दो दशकों से, NPS ने लॉन्ग-टर्म बचत करने वालों का एक मज़बूत बेस बनाया है। लेकिन इसने अभी तक रिटायरमेंट के बाद प्रेडिक्टेबिलिटी नहीं दी है। रिटायर होने वाले लोग अभी भी ऐसे सवाल पूछते हैं जैसे 'मुझे कितनी पेंशन मिलेगी', 'क्या यह मेरी पूरी ज़िंदगी चलेगी', या 'क्या यह महंगाई के हिसाब से बढ़ेगी'। नया कंसल्टेशन पेपर इन सवालों के जवाब देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पहला मॉडल फ्लेक्सिबिलिटी देने के लिए एक सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) को एन्युटी के साथ मिलाया गया है। लेकिन पेंशन राशि या लाभों पर कोई गारंटी नहीं है। निवेशक एक कैलकुलेशन के हिसाब इसमें पेंशन का अंदाजा लगा सकते हैं। इस पेंशन प्लान के तहत कम से कम 20 साल का योगदान आवश्यक है, जो 18 साल की आयु से शुरू होगा। इसमें अधिकतम कोई लिमिट नहीं है। इसके तहत 45 वर्ष की आयु तक 50% कंट्रीब्यूशन इक्विटी में निवेश किया जाता है।
इसके बाद धीरे-धीरे कम किया जाता है। रिटायरमेंट पर निवेशक को शुरू में SWP के जरिए एन्युटी फंड का 4.5% मंथली दिया जाता है, जिसमें 10 साल तक हर साल 0.25 फीसदी की ग्रोथ होगी। 70 साल की उम्र के में बाकी फंड का उपयोग 20 वर्षों के लिए और उसके बाद आजीवन एन्युटी खरीदने के लिए किया जा सकता है। 90 वर्ष की आयु से पहले अंशदाता की मृत्यु होने पर, जीवनसाथी या बच्चों को उनके काल्पनिक 90वें जन्मदिन तक लाभ मिलता रहेगा।
दूसरा मॉडल उन सदस्यों के लिए हैं, जो चाहते हैं कि उन्हें निश्चित मासिक पेंशन मिले और यह महंगाई के हिसाब से बढ़ती रहे। यह कस्टमर्स को रिटायरमेंट के बाद पहले साल में मिलने वाले पेंशन तय करता है। इसके बाद हर साल महंगाई के हिसाब से पेंशन तय होगी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पेंशन तय किया जाता है। इस योजना के लिए 20 साल तक योगदान जरूरी है।
सरकारी इक्विटीज और उच्च रेटिंग वाले बांडों में निवेश के माध्यम से निश्चित पेंशन तय होती है।
ज्यादा रिटर्न के लिए 25% तक इक्विटी में निवेश किया जाता है, ताकि महंगाई के हिसाब से पेंशन मिलती रहे।
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