
NPS Rule Changes: पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। PFRDA ने एनपीएस को प्राइवेट सेक्टर और आम नागरिकों के लिए बेहद आसान कर दिया है। नॉन-गवर्नमेंट (प्राइवेट) सब्सक्राइबर्स के लिए 5 साल की लॉक-इन को खत्म कर दिया गया है। एकमुश्त निकासी की राशि को बढा दिया गया है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने PFRDA (एक्जिट्स एंड विदड्रॉल्स अंडर द नेशनल पेंशन सिस्टम) अमेंडमेंट रेगुलेशंस 2025 को नोटिफाई कर दिया है।
एनपीएस में निवेश बनाए रखने की सीमा में भी बढ़ोतरी की गई है। इसका मकसद नॉन-गवर्नमेंट सेक्टर के सब्सक्राइबर्स को ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देना है। इसके तहत अब गैर-सरकारी NPS सब्सक्राइबर्स रिटायरमेंट के समय अपनी जमा पूंजी का 80% तक हिस्सा एकमुश्त (Lump Sum) निकाल सकेंगे। नए नियमों में सिस्टैमैटिक निकासी प्लान की भी सुविधा दी गई है। साथ ही सरकारी और गै-सरकारी कर्मचारी अब 75 के बजाय 85 साल की उम्र तक एनपीएस उपभोक्ता बने रह सकेंगे। देश में एनपीएस योजना में करीब 1.75 करोड़ गैर-सरकारी शामिल हैं।
गैर-सरकारी सेक्टर के निवेशकों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि अब 5 साल का अनिवार्य लॉक-इन हटा दिया गया है। इससे उन लोगों को फायदा होगा जो किसी वजह से बीच में एनपीएस से बाहर निकलना चाहते हैं। हालांकि सरकारी कर्मचारियों के लिए यह लॉक-इन अभी भी लागू रहेगा।
NPS से बाहर निकलते समय (Exit Rules) सबसे बड़ा बदलाव पैसे की निकासी के अनुपात में किया गया है। इसे तकनीकी भाषा में एग्जिट रेश्यो कहते हैं। पहले जब कोई सब्सक्राइबर रिटायर होता था या स्कीम से बाहर निकलता था, तो उसे अपने कुल जमा फंड (Corpus) का कम से कम 40% हिस्सा एन्युटी (Annuity) खरीदने में लगाना होता था। एन्युटी वह रकम है जिससे हर महीने पेंशन मिलती है। सब्सक्राइबर केवल 60% पैसा ही एकमुश्त (Lump sum) निकाल सकता था।
नए नियमों में कुछ खास स्थितियों के लिए भी राहत दी गई है। अगर कोई निवेशक भारतीय नागरिकता छोड़ता है, तो वह पूरा एनपीएस कॉर्पस एकमुश्त निकाल सकता है। निवेशक की मृत्यु होने पर जमा रकम नॉमिनी या कानूनी वारिस को दी जाएगी। अगर निवेशक लापता हो जाता है और मृत मान लिया जाता है, तो पहले 20 प्रतिशत रकम अंतरिम राहत के तौर पर दी जाएगी।
जिन लोगों का NPS फंड 8 लाख से ज्यादा और 12 लाख तक है उनके लिए भी नियम आसान किए गए हैं। ऐसे यूजर्स 6 लाख रुपये तक सीधे निकाल सकते हैं। बचा हुआ पैसा कम से कम 6 साल की पेंशन योजना में लगाना जरूरी होगा ताकि हर महीने कुछ इनकम मिलती रहे।
बता दें कि सरकारी कर्मचारियों के लिए नियमों में बदलाव नहीं किया गया है। ये सभी नियम मुख्य रूप से गैर-सरकारी क्षेत्र (प्राइवेट और आम नागरिक) के लिए हैं। यानी इन बदलावों का असर एनपीएस में पैसा लगाने वाले सरकारी कर्मचारियों को नहीं होगा। उनके लिए 5 साल का लॉक-इन अनिवार्य रहेगा। 60 वर्ष की आयु के बाद एग्जिट पर, यदि फंड 5 लाख से अधिक है तो 40% राशि एन्युटी में जाएगी और 60% नकद मिलेगी। सरकारी कर्मचारी तभी 100% पैसा निकाल सकते हैं जब उनका कुल फंड 5 लाख रुपये से कम हो।
यह बदलाव उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जो रिटायरमेंट के बाद अपने पैसों से घर बनाना चाहते हैं या किसी जरूरी काम में पैसा लगाना चाहते हैं। ज्यादा लंपसम मिलने से फाइनेंशियल प्लानिंग आसान होगी और लोग अपने भविष्य के फैसले खुद ले पाएंगे। NPS अब पहले से ज्यादा फ्लेक्सिबल और यूजर फ्रेंडली बन गया है।
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