
NPS Tier 2 vs Mutual Funds: जब भी हम नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस की बात करते हैं, तो हम अक्सर रिटायरमेंट सेविंग और टैक्स बेनिफिट्स के बारे में सोचते हैं। लेकिन ये फायदे ज्यादातर टियर 1 अकाउंट तक सीमित हैं। NPS दूसरा अकाउंट भी ऑफर करता है, जिसे टियर 2 कहते हैं। यह टियर 1 से बहुत अलग है। यह रिटायरमेंट अकाउंट नहीं, बल्कि एक इन्वेस्टमेंट अकाउंट है। आइए समझते हैं कि एनपीएस टियर 2 क्या है और यह आपके लिए सही है या नहीं।
टियर 1 अकाउंट बहुत पॉपुलर है। 2023 तक, टियर 1 में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के एसेट्स थे। वहीं, टियर 2 में सिर्फ 4,000 करोड़ रुपये के आसपास एसेट्स थे, जो टियर 1 का सिर्फ 3.7% है। इसकी मुख्य वजह यह है कि टियर 2 एक ऑप्शनल इन्वेस्टमेंट अकाउंट है। इसे खोलने के लिए आपके पास एक एक्टिव टियर 1 अकाउंट होना जरूरी है। इसका बड़ा फायदा यह है कि यह टियर 1 की तरह लॉक्ड-इन नहीं है; आप इसमें कभी भी पैसा डाल सकते हैं और कभी भी निकाल सकते हैं।
टियर 1 की तरह, टियर 2 में भी तीन एसेट क्लास इक्विटी (E), गवर्नमेंट बॉन्ड्स (G) और कॉर्पोरेट बॉन्ड्स (C) में निवेश के ऑप्शन हैं। हालांकि, इसमें अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड यानी एसेट क्लास A का ऑप्शन नहीं मिलता, जो सिर्फ टियर 1 में है। इसमें भी 'एक्टिव चॉइस' यानी खुद एसेट चुनना और 'ऑटो चॉइस' यानी उम्र के हिसाब से फिक्स्ड एलोकेशन के विकल्प मौजूद हैं। सबसे बड़ा फर्क यह है कि टियर 2 की 'एक्टिव चॉइस' में आप अपना 100% पैसा इक्विटी में लगा सकते हैं, जबकि टियर 1 में यह लिमिट सिर्फ 75% है।
जब टैक्स बेनिफिट्स की बात आती है, तो टियर 2 कोई फायदा नहीं देता। इसमें निवेश पर कोई छूट नहीं मिलती। जब आप पैसा निकालते हैं, तो मुनाफे पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। हालांकि, एक 'टियर 2 टैक्स सेविंग स्कीम' (TTS) है, जिसमें सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है, लेकिन यह सुविधा फिलहाल सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है।
टियर 2 में 10 पेंशन फंड मैनेजर (PFMs) हैं। अगर 7 पुराने मैनेजर्स के 5 वर्ष का एवरेज रोलिंग रिटर्न्स को देखें तो:
स्कीम E (इक्विटी): रिटर्न 11.7% से 13.54% के बीच रहे हैं।
स्कीम G (गवर्नमेंट बॉन्ड्स): LIC पेंशन फंड इस सेगमेंट में बिना किसी शक के लीडर है और इसका परफॉर्मेंस बाकी सबसे बहुत अच्छा है।
स्कीम C (कॉर्पोरेट बॉन्ड्स): सभी फंड मैनेजर्स के रिटर्न लगभग एक जैसे रहे हैं।
ओवरऑल, HDFC और ICICI प्रूडेंशियल सभी स्कीम्स में टॉप 3 में हैं। वहीं, बिड़ला सनलाइफ की स्कीम्स को फिलहाल चुनने से बचना ही सही है।
जब एनपीएस टियर 2 की स्कीम E (इक्विटी) की तुलना एक्टिव लार्ज कैप फंड्स और इंडेक्स (निफ्टी 50/100) से की जाती है, तो यह रिटर्न के मामले में अपने सभी कॉम्पिटिटर्स से पीछे है। इतना ही नहीं, यह एक्टिव लार्ज कैप फंड्स और निफ्टी 50/100 से ज्यादा अस्थिर भी है। लेकिन सबसे खराब पहलू इसका टैक्सेशन है। टियर 2 के मुनाफे पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है। वहीं, इक्विटी म्यूचुअल फंड पर 1 लाख रुपये से ज्यादा का मुनाफा हो तब 1 साल बाद 10% LTCG टैक्स लगता है। अगर आप 20% या 30% टैक्स ब्रैकेट में हैं, तो इक्विटी म्यूचुअल फंड्स टियर 2 से कहीं ज्यादा अट्रैक्टिव हैं।
इक्विटी के उलट, डेट स्कीम्स में टियर 2 ने म्यूचुअल फंड्स को पछाड़ दिया है।
स्कीम G (गवर्नमेंट बॉन्ड्स) ने 8.71% का रिटर्न दिया, जबकि गिल्ट फंड्स ने 8.04% का।
स्कीम C (कॉर्पोरेट बॉन्ड्स) ने 8.43% का रिटर्न दिया, जबकि कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड्स ने सिर्फ 7.36% का।
इस बेहतर परफॉर्मेंस की वजह एनपीएस का लो-कॉस्ट स्ट्रक्चर है। एनपीएस की मैनेजमेंट फीस सिर्फ 0.09% है, जबकि डेट फंड्स (डायरेक्ट) का एक्सपेंस रेशियो 0.25% से 0.27% तक है। यूनियन बजट 2023 के बाद अब दोनों का टैक्सेशन भी बराबर हो गया है। डेट फंड्स से इंडेक्सेशन बेनिफिट खत्म हो गया है, इसलिए अब टियर 2 और डेट फंड्स, दोनों के मुनाफे पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है।
एनपीएस में आप साल में 4 बार एसेट एलोकेशन बदल सकते हैं और वह भी बिना कोई टैक्स दिए। म्यूचुअल फंड्स में ऐसा करने पर टैक्स लगता है। एनपीएस में 'ऑटो चॉइस' है जो उम्र के हिसाब से एलोकेशन खुद एडजस्ट करता है, म्यूचुअल फंड्स में यह सुविधा नहीं है। हालांकि, म्यूचुअल फंड्स में 37 कैटिगरी के लिहाज से वैरायटी बहुत ज्यादा है, जबकि एनपीएस में सिर्फ 3 ऑप्शन (E, G, C) हैं।
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके पास एक्टिव टियर 1 अकाउंट है या नहीं। यही इसकी सबसे बड़ी लिमिटेशन है।
अगर आपके पास टियर 1 है तो टियर 2 आपके पोर्टफोलियो के डेट हिस्से यानी स्कीम G और C के लिए एक सस्ता और ज्यादा रिवॉर्डिंग ऑप्शन हो सकता है। स्कीम E भले ही इंप्रेस नहीं करती, लेकिन टैक्स-फ्री रीबैलेंसिंग जैसे फीचर्स के लिए इसे कंजरवेटिव निवेशक जिन्हें लार्ज-कैप में पैसा लगाना है, विचार कर सकते हैं।
अगर टियर 1 नहीं है तो आपको टियर 2 के बारे में नहीं सोचना चाहिए। आपके लिए म्यूचुअल फंड्स ही सही ऑप्शन हैं।
अंत में अगर आपका म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो अच्छा चल रहा है, तो टियर 2 लेकर चीजों को कॉम्प्लिकेट करने की जरूरत नहीं है।
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