
NRI Property Sale: भारत में प्रॉपर्टी बेचने वाले एनआरआई (Non-Resident Indians - NRI) के लिए टैक्स नियम पहले से अधिक जटिल और कई मामलों में महंगे हो गए हैं। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) में बदलाव की वजह से एनआरआई को प्रॉपर्टी बिक्री पर पहले के मुकाबले ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है। NRI द्वारा भारत में संपत्ति बेचने पर होने वाला लाभ “कैपिटल गेन” के तहत टैक्सेबल होता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि संपत्ति कितने समय तक रखी गई थी।
अगर प्रॉपर्टी 24 महीने से ज्यादा समय तक रखी गई है, तो इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। वहीं एक साल से कम पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन की श्रेणी में आता है। NRIs को ज्यादा टैक्स का सामना करने का सबसे बड़ा कारण इनकम टैक्स एक्ट की धारा 195 के तहत 'स्रोत पर कर कटौती' (TDS) का नियम है। अगर प्रॉपर्टी की कीमत ₹50 लाख से ज़्यादा हो तो TDS आमतौर पर 1% होता है। NRI से प्रॉपर्टी खरीदने वाले खरीदारों को, कैपिटल गेन के प्रकार के आधार पर, काफी ज़्यादा दरों पर TDS कटता है।
अगर कोई प्रॉपर्टी 24 महीने से ज़्यादा समय तक अपने पास रखने के बाद बेची जाती है, तो इसे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाता है। 23 जुलाई, 2024 को या उसके बाद खरीदी गई प्रॉपर्टी के लिए, LTCG पर 12.5 फीसदी की दर से टैक्स लगता है। इसमें इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता। उस तारीख से पहले खरीदी गई पुरानी प्रॉपर्टी के लिए, लागू नियमों के आधार पर, 20% की दर से टैक्स लग सकता है, जिसमें इंडेक्सेशन का फायदा भी मिलेगा। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के मामले में टैक्स दर और ज्यादा होती है। इसमें व्यक्ति की इनकम टैक्स स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता है। यह अधिकतम 30% तक हो सकता है।
टैक्स के अलावा सबसे बड़ी चुनौती TDS (Tax Deducted at Source) को लेकर होती है। भारत में जब कोई एनआरआई अपनी प्रॉपर्टी बेचता है, तो खरीदार को भुगतान करने से पहले TDS काटना अनिवार्य होता है। यह दर आमतौर पर 20% से 30% तक हो सकती है, जो प्रॉपर्टी के होल्डिंग पीरियड और कैपिटल गेन के प्रकार पर निर्भर करती है। कई मामलों में यह TDS वास्तविक टैक्स देनदारी से ज्यादा होता है। इससे एनआरआई के फंड का बड़ा हिस्सा अस्थायी रूप से अटक जाता है। यहां तक कि ₹1 करोड़ की प्रॉपर्टी बिक्री पर लगभग ₹20 लाख से ज्यादा TDS कट सकता है। इसमें सरचार्ज और सेस जोड़ने पर राशि और ज्यादा बढ़ सकती है।
इसके अलावा, NRI को प्रॉपर्टी बेचने के बाद इनकम टैक्स रिटर्व फाइल करना जरूरी है। इसमें उन्हें वास्तविक कैपिटल गेन दिखाना होता है। यदि TDS ज्यादा कटा है, तो वे रिफंड क्लेम कर सकते हैं। टैक्स नियमों में राहत के कुछ विकल्प भी मौजूद हैं। आयकर अधिनियम की धारा 54, 54F और 54EC के तहत एनआरआई कैपिटल गेन पर छूट ले सकते हैं। हाल के बजट और टैक्स बदलावों के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि एनआरआई के लिए प्रॉपर्टी बिक्री का टैक्स स्ट्रक्चर अधिक जटिल हो गया है।
इंडेक्सेशन बेनिफिट हटने से टैक्स का प्रभावी बोझ कई मामलों में बढ़ सकता है, जबकि TDS नियम पहले की तरह ही सख्त बने हुए हैं। कुल मिलाकर, भारत में प्रॉपर्टी बेचने वाले एनआरआई को अब टैक्स प्लानिंग पहले से ज्यादा सावधानी से करनी होगी। सही समय पर निवेश, उचित दस्तावेज और टैक्स नियमों की समझ के बिना उन्हें अपेक्षा से अधिक टैक्स देना पड़ सकता है।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.
MoreOops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.