जन्म लेते ही पेंशन का होगा जुगाड़, NPS वात्सल्य खाते से बुढ़ापे में मिलेगा ₹2 लाख महीना

National Pension System for children: भारत में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी को देखते हुए जन्म से ही पेंशन योजना शुरू करने का प्रस्ताव है। NPS-वात्सल्य के जरिए बच्चे के बड़े होने तक करोड़ों का फंड और भारी पेंशन सुनिश्चित हो सकती है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड5 Jan 2026, 07:18 AM IST
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया एनपीएस वात्सल्य योजना का शुभारंभ (फाइल फोटो)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया एनपीएस वात्सल्य योजना का शुभारंभ (फाइल फोटो)(PTI)

NPS Vatsalya Scheme details: भारत में जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है और जन्म दर में कमी आ रही है। इसका मतलब है कि भविष्य में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। 'इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023' के मुताबिक, साल 2050 तक देश में बुजुर्गों की आबादी दोगुनी होकर 34.7 करोड़ हो जाएगी।

यह कुल जनसंख्या का करीब 25% हिस्सा होगा। ऐसे में युवाओं और सरकार पर आर्थिक बोझ न बढ़े, इसके लिए अभी से तैयारी करना जरूरी है। पेंशन सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि बुढ़ापे में सम्मान और आजादी के साथ जीने का जरिया है।

जन्म के साथ ही शुरू हो 'पेंशन का सफर'

पेंशन की योजना रिटायरमेंट के करीब आने पर नहीं, बल्कि बच्चे के जन्म के समय ही शुरू होनी चाहिए। हाल ही में शुरू हुई 'NPS-वात्सल्य' इस दिशा में एक बड़ा कदम है। प्रस्ताव है कि हर बच्चे के जन्म पर उसे एक 'परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर' (PRAN) और एक 'PRAN-DAN' कार्ड दिया जाए।

इसमें केंद्र सरकार की तरफ से शुरुआत में 1,000 रुपये का योगदान दिया जा सकता है। भारत में हर साल करीब 2.5 करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं, जिस पर सरकार का सालाना खर्च करीब 2,300 करोड़ रुपये आएगा। यह राशि वर्तमान वृद्धावस्था पेंशन योजनाओं के मुकाबले काफी कम और प्रभावी है।

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अभिभावकों की भागीदारी और मोबाइल लिंकेज

योजना को सरल बनाने के लिए बच्चे के PRAN खाते को माता-पिता के मोबाइल या यूपीआई नंबर से जोड़ा जा सकता है। उन्हें हर महीने कम से कम 100 रुपये जमा करने के लिए मैसेज के जरिए प्रोत्साहित किया जाए। इस शुरुआती योगदान के लिए फंड जुटाने के कई तरीके हो सकते हैं, जैसे कि अदालतों का जुर्माना, ट्रैफिक चालान या बैंकों में पड़ा लावारिस पैसा। साथ ही, कंपनियों और आम लोगों से दान लेकर भी इसे बढ़ावा दिया जा सकता है।

टैक्स में छूट और सरकारी मदद

इस स्कीम को लोकप्रिय बनाने के लिए इसमें किए गए निवेश को पूरी तरह टैक्स फ्री रखने का सुझाव है। जो माता-पिता गरीब हैं और टैक्स के दायरे में नहीं आते, उनके योगदान में सरकार अपनी तरफ से कुछ हिस्सा जोड़कर मदद कर सकती है। राज्य सरकारों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे भविष्य में उनके ऊपर से सामाजिक सुरक्षा का बोझ कम होगा।

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1000 रुपये से 4 करोड़ रुपये तक का सफर

अगर किसी बच्चे के खाते में बचपन से निवेश शुरू होता है, तो 25 साल की उम्र तक वह एक जिम्मेदार निवेशक बन जाएगा। एक अनुमान के मुताबिक, अगर अलग-अलग उम्र में निवेश की राशि को धीरे-धीरे बढ़ाया जाए और उस पर 9% का रिटर्न मिले, तो 60 साल की उम्र तक 4.2 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड जमा हो सकता है। इससे बुजुर्ग होने पर हर महीने 2.1 लाख रुपये से ज्यादा की पेंशन मिल सकती है और मूल जमा राशि भी सुरक्षित रहेगी।

अर्थव्यवस्था और गरीबी पर असर

साल 2047 तक जब भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब तक यह पीढ़ी कामकाजी उम्र में होगी और उनके पास एक बड़ा फंड होगा। पेंशन फंड का यह पैसा देश के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास में काम आएगा। दुनिया भर के उदाहरण बताते हैं कि जहां पेंशन की पहुंच अच्छी है, वहां बुजुर्गों में गरीबी दर बहुत कम होती है। यह योजना भारत को एक आर्थिक रूप से सुरक्षित और विकसित राष्ट्र बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।

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