
Pet Insurance: घर में पालतू जानवर रखना अब सिर्फ शौक तक सीमित नहीं रह गया है। कई परिवारों में कुत्ते और बिल्लियां परिवार का हिस्सा हैं। लेकिन इनके बीमार पड़ने या किसी दुर्घटना में घायल होने पर इलाज का खर्च तेजी से बढ़ सकता है। सर्जरी, जांच, अस्पताल में भर्ती और लंबे इलाज का बिल अचानक जेब पर बड़ा बोझ डाल सकता है। यही वजह है कि भारत में पेट इंश्योरेंस की मांग बढ़ रही है। ऐसे में पॉलिसी खरीदते समय सिर्फ कम प्रीमियम देखकर फैसला करना महंगा पड़ सकता है।
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट में इंडस्ट्री के अनुमानों का हवाला देते हुए बताया गया है कि भारत का पेट इंश्योरेंस मार्केट 2025 में ₹3,152 करोड़ तक पहुंच गया। इसके साल 2034 तक ₹9,478 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है, जो 2026 और 2034 के बीच 12.60 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) को दर्शाता है। इस बाजार के बढ़ने की एक बड़ी वजह पालतू जानवरों की बढ़ती संख्या और उनके इलाज पर बढ़ता खर्च है।
भारत में पालतू जानवरों की संख्या वित्त वर्ष 2019-20 में 2.85 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 3.92 करोड़ हो गई। इसके वित्त वर्ष 2029-30 तक 6.05 करोड़ पहुंचने का अनुमान है। पालतू जानवरों की संख्या बढ़ने के साथ उनके स्वास्थ्य और इलाज पर खर्च करने की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है। दोहरी आय वाले परिवार और छोटे परिवार अपने पालतू जानवरों की देखभाल पर पहले से ज्यादा खर्च कर रहे हैं।
पेट इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत कवरेज कंपनी और योजना के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। सामान्य तौर पर कुछ पॉलिसियों में दुर्घटना, बीमारी या फ्रैक्चर के कारण होने वाली सर्जरी से जुड़े खर्च शामिल हो सकते हैं। कुछ योजनाओं में सर्जरी से पहले और बाद के पात्र चिकित्सा खर्च तथा पशु अस्पताल में भर्ती होने का खर्च भी कवर किया जाता है।
पालतू जानवर की मृत्यु से जुड़े लाभ और अलग से ओपीडी कवरेज भी कुछ योजनाओं में उपलब्ध हो सकते हैं। इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले यह देखना जरूरी है कि वास्तव में कौन-कौन से इलाज और खर्च कवर किए जा रहे हैं।
बीमा कंपनियां पेट इंश्योरेंस में ₹10,000 से लेकर ₹15 लाख तक की बीमा राशि वाले विकल्प दे रही हैं। लेकिन ज्यादा बीमा राशि का मतलब हर पालतू जानवर के लिए बेहतर पॉलिसी नहीं है। कवर तय करते समय पालतू की उम्र, नस्ल, वजन, जीवनशैली और संभावित स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। साथ ही यह भी देखना चाहिए कि आपके इलाके में पशु चिकित्सा की लागत कितनी है और किसी बड़ी सर्जरी या अस्पताल में भर्ती की स्थिति में कितना खर्च आ सकता है।
पेट इंश्योरेंस का प्रीमियम केवल चुनी गई बीमा राशि पर निर्भर नहीं करता। पालतू जानवर की प्रजाति, वजन, रहने की जगह, मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति और पॉलिसी की अवधि भी प्रीमियम को प्रभावित कर सकती है। इसलिए दो अलग-अलग पालतू जानवरों के लिए समान बीमा राशि होने के बावजूद प्रीमियम अलग हो सकता है।
पॉलिसी खरीदते समय यह जांचना जरूरी है कि सर्जरी और अस्पताल में भर्ती होने का खर्च किस सीमा तक कवर है। अगर पॉलिसी में केवल कुछ खास प्रक्रियाएं शामिल हैं और बाकी इलाज बाहर रखा गया है, तो क्लेम के समय परेशानी हो सकती है। इसलिए पॉलिसी की शर्तों में सर्जरी, अस्पताल में भर्ती, जांच और इलाज से पहले और बाद के खर्च का कवरेज ध्यान से पढ़ना चाहिए।
हर पेट इंश्योरेंस पॉलिसी में नियमित डॉक्टर विजिट या ओपीडी का खर्च शामिल हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ योजनाओं में इसके लिए अलग से कवरेज उपलब्ध हो सकता है। इसलिए अगर आपका पालतू जानवर नियमित इलाज या बार-बार पशु चिकित्सक के पास जाता है, तो ओपीडी कवरेज आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
कुछ पॉलिसियों में मेडिकल खर्च के अलावा थर्ड-पार्टी लायबिलिटी से जुड़े जोखिम भी कवर किए जा सकते हैं। यानी पॉलिसी सिर्फ इलाज के खर्च तक सीमित नहीं हो सकती। पॉलिसी चुनते समय यह भी देखना चाहिए कि इसमें थर्ड-पार्टी से जुड़ी देनदारी का कवरेज है या नहीं और उसकी सीमा कितनी है।
इंश्योरेंस खरीदते समय सबसे ज्यादा ध्यान क्या कवर नहीं है, इस पर देना चाहिए। सिर्फ कवरेज की लंबी सूची देखकर पॉलिसी खरीदना सही तरीका नहीं है। पॉलिसी दस्तावेज में बीमारी, पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्या, कुछ खास इलाज या दूसरी परिस्थितियों से जुड़े कारण हो सकते हैं। इसलिए खरीदने से पहले कवरेज और एक्सक्लूजन दोनों पढ़ना जरूरी है।
पेट इंश्योरेंस की मांग बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण इलाज की बढ़ती लागत है। सर्जरी, जांच, अस्पताल में भर्ती और विशेषज्ञ इलाज महंगा होने के कारण पालतू जानवरों के मालिक अचानक आने वाले बड़े खर्च से वित्तीय सुरक्षा चाहते हैं। ऐसे में इंश्योरेंस पॉलिसी का इस्तेमाल अचानक आने वाले बड़े चिकित्सा खर्च को संभालने के लिए वित्तीय सुरक्षा के तौर पर किया जा सकता है।
1. बीमा राशि: आपके पालतू के संभावित इलाज के खर्च के लिए पर्याप्त है या नहीं।
2. कवरेज: बीमारी, दुर्घटना, सर्जरी और अस्पताल में भर्ती शामिल हैं या नहीं।
3. ओपीडी: नियमित इलाज और डॉक्टर की फीस का कवरेज है या नहीं।
4. एक्सक्लूजन: किन बीमारियों और इलाज का भुगतान नहीं होगा।
5. प्रीमियम: उम्र, नस्ल, वजन और स्थान के हिसाब से प्रीमियम कितना है।
6. थर्ड-पार्टी लायबिलिटी: पॉलिसी में यह सुविधा शामिल है या नहीं।
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