
Petrol and Diesel Tax Breakup: देश में पेट्रोल डीजल के दाम चीते की रफ्तार से भाग रहे हैं। पेट्रोल के दाम 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच गए हैं। वहीं अगर पड़ोसी देशों की चर्चा की जाए तो वहां भारत के मुकाबले काफी सस्ता पेट्रोल बिक रहा है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और भूटान में भारत से सस्ता पेट्रोल बिक रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि भूटान भारत से पेट्रोल खरीदता है, फिर उसे अपने देश में भारत के मुकाबले आधे दाम पर बेच रहा है। आखिर ऐसे कैसे संभव है, भारत में तेल क्यों नहीं सस्ता है, आइये जानते हैं पूरी रिपोर्ट।
दरअसल, पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों के महंगे होने का सबसे बड़ा कारण केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से लगाए जाने वाला टैक्स है। क्लीयर टैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पेट्रोल पर लगने वाला टैक्स पेट्रोल की रिटेल (खुदरा) कीमत का 55 फीसदी है, जबकि डीजल पर लगने वाला टैक्स इसके रिटेल प्राइस का 50 फीसदी है। इसके अलावा, राज्य सरकारें अलग-अलग हिसाब से वैट लगाती हैं।
भारत में फ्यूल प्राइसिंग स्ट्रक्चर में मुख्य रूप से 4 घटक हैं। इनमें केंद् और राज्य सरकारों की ओर से लगाए जाने वाले टैक्स शामिल हैं। कच्चे तेल का बेस प्राइस, एक्साइड ड्यूटी, डीलर कमीशन और चार्ज, मूल्य वर्धित कर (VAT) जैसे टैक्स लगते हैं। पूरे देश में कच्चे तेल की कीमतें, डीलर के शुल्क और एक्साइज ड्यूटी एक समान हैं, लेकिन, वैट की दरें राज्यों में अलग-अलग होती है। जिसके कारण हर स्टेट में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग हो जाती हैं।
यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरने के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को उसका सीधा फायदा नहीं मिल पाता है। सरकार की टैक्स नीति इतनी भारी है कि पेट्रोल की बेस प्राइस के ऊपर ही कई गुना कीमत हो जाती है।
न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत 40 रुपये प्रति लीटर है। इस पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां प्रोसेसिंग कॉस्ट लगाती है। यह 5.66 रुपये प्रति लीटर है। इसके बाद बफर फॉर इंफ्लेशन 10 रुपये प्रति लीटर लगता है। इसके बाद पेट्रोल की कीमत 55.66 रुपये प्रति लीटर हो जाती है। कुल मिलाकर यहां दो तरह के टैक्स लगाए गए। इस तरह से केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की ओर टैक्स नहीं लगाने पर भारत में पेट्रोल की कीमत सिर्फ 55 रुपये के आसपास है।
अब सवाल ये है कि आखिरी 55 रुपये का तेल 100 रुपये से ज्यादा कैसे पहुंच गया। इसमें डीलरों का कमीशन 3.77 रुपये प्रति लीटर है। केंद्र सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी टैक्स 19.90 रुपये प्रति लीटर है। वैट यानी राज्य सरकार का टैक्स 15.39 रुपये प्रति लीटर है। इस तरह से तमाम तरह के टैक्स जोड़कर इसकी कीमत 95 रुपये के आसपास पहुंच जाती है। यह कैलकुलेशन मई 2024 की कीमतों पर आधारित है। इसमें हर साल अंतर बढ़ जाता है।
भारत का पड़ोसी देश भूटान भारत से तेल खरीदता है। भूटान अपने नागरिकों को कम टैक्स पर सस्ते में पेट्रोल मुहैया कराता है। कहने का मतलब ये हुआ कि सरकार टैक्स का बोझ नागरिकों पर नहीं डालती है। ऐसे में भूटान में पेट्रोल के दाम 58 रुपये से 68 रुपये के आसापस हैं। वहीं भारत में यह पेट्रोल 100 रुपये के आसपास है। भूटान भारत की तरह पेट्रोल पर कोई भारी भरकम एक्साइज ड्यूटी नहीं लगाता है।
भारत में डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग सिस्टम लागू है, यानी पेट्रोल-डीजल के दाम रोजाना बदलते हैं। जब कच्चे तेल के दाम गिरते हैं, तब भी आम जनता को बहुत कम राहत मिलती है। इसकी वजह ये है कि सरकार टैक्स दरें नहीं घटाती है। ऐसे में इसका फायदा आम आदमी को बहुत कम फायदा मिलता है। इसके साथ ही रुपया कमजोर होने पर आयात महंगा पड़ता है, जिससे पेट्रोल और डीजल की लागत और बढ़ जाती है। डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट भी लगातार पेट्रोल की महंगाई को हवा भरने का काम करती है।