PGIM Report: भारतीयों के लिए रिटायरमेंट सबसे बड़ी प्राथमिकता, पर क्या आप सच में तैयार हैं? यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है

Financial Priorities for Indians: पीजीआईएम इंडिया की 'रिटायरमेंट रेडीनेस रिपोर्ट 2025' के मुताबिक भारतीयों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। लोग अब परिवार से पहले खुद के रिटायरमेंट और लाइफस्टाइल को तवज्जो दे रहे हैं।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड30 Dec 2025, 04:52 PM IST
पीजीआईएम इंडिया रिपोर्ट 2025
पीजीआईएम इंडिया रिपोर्ट 2025(iStock)

Retirement Planning: पीजीआईएम इंडिया म्यूचुअल फंड ने अपनी 'रिटायरमेंट रेडीनेस रिसर्च रिपोर्ट 2025' का तीसरा संस्करण पेश किया है। इस रिपोर्ट ने भारतीय परिवारों की आर्थिक सोच में आए एक बड़े बदलाव को उजागर किया है। अब भारतीय अपनी आय बढ़ने के साथ-साथ भविष्य की सुरक्षा को लेकर ज्यादा जागरूक हो गए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में एक चिंताजनक बात भी सामने आई है कि प्लानिंग को लेकर इच्छा तो बढ़ी है, लेकिन जमीन पर तैयारी कम हुई है।

रिटायरमेंट पर फोकस बढ़ा, तैयारी घटी

भारत में लोगों की वित्तीय प्राथमिकताओं में बड़ा फेरबदल हुआ है। साल 2025 में रिटायरमेंट की प्लानिंग आठवें नंबर से उछलकर पहले स्थान पर आ गई है। हैरानी की बात यह है कि रिटायरमेंट को सबसे जरूरी मानने के बावजूद, ठोस प्लानिंग करने वालों की संख्या घट गई है। साल 2023 में जहां 67% लोगों के पास रिटायरमेंट प्लान था, वहीं 2025 में यह आंकड़ा सिमटकर सिर्फ 37% रह गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब लोग इंश्योरेंस और निवेश को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं।

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सुरक्षा पर सपने हावी

भारतीयों की सोच अब केवल 'डर' या 'सुरक्षा' तक सीमित नहीं है। अब लोग रिटायरमेंट के बाद एक बेहतर लाइफस्टाइल और आर्थिक आजादी चाहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लोग अब परिवार की जिम्मेदारियों के मुकाबले अपनी खुशियों और खुद का बिजनेस शुरू करने को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। पहले जहां हेल्थ और फैमिली की चिंता टॉप पर रहती थी, अब वहां व्यक्तिगत संतुष्टि और बिजनेस (एंटरप्रेन्योरशिप) ने जगह ले ली है।

म्यूचुअल फंड्स पर बढ़ा भरोसा

निवेश के विकल्पों में म्यूचुअल फंड की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। रिटायरमेंट के लिए म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स की मदद लेने वाले लोगों का प्रतिशत 44% से बढ़कर 62% हो गया है। लोग अब पारंपरिक विकल्पों के अलावा NPS, PPF और रिटायरमेंट स्पेसिफिक फंड्स में रुचि ले रहे हैं। इसके साथ ही REITs जैसे नए और आधुनिक निवेश के तरीकों की ओर भी निवेशकों का रुझान बढ़ा है।

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कभी रिटायर न होने की इच्छा

भले ही लोग रिटायरमेंट की बात कर रहे हैं, लेकिन 44% लोग रिटायरमेंट के बाद भी कमाई का दूसरा जरिया चाहते हैं। हालांकि, अभी सिर्फ 25% लोगों ने ही इस पर काम शुरू किया है। कभी रिटायर न होने की नई सोच लोगों को अपनी लाइफस्टाइल बरकरार रखने के लिए नए तरीकों से पैसे कमाने के लिए प्रेरित कर रही है।

डर छोड़ें और प्लानिंग करें

पीजीआईएम इंडिया एसेट मैनेजमेंट के सीईओ अभिषेक तिवारी ने कहा कि रिटायरमेंट को प्राथमिकता देना एक पॉजिटिव बदलाव है। भारतीय अब आत्मनिर्भर सुरक्षा और सम्मान के साथ जीने की अहमियत समझ रहे हैं।

वहीं, सीनियर एडवाइजर अजीत मेनन का कहना है कि अब लोग परिवार के साथ-साथ खुद के लिए भी सोचना शुरू कर चुके हैं। उन्होंने सलाह दी कि निवेश चाहे खुद करें, लेकिन एक्सपर्ट से दूसरी राय जरूर लें। डॉ. सगनीत कौर का कहना है कि जिन लोगों ने प्लानिंग नहीं की है, वे मानसिक रूप से ज्यादा तनाव में रहते हैं।

Disclaimer: यह रिपोर्ट पीजीआईएम इंडिया म्यूचुअल फंड ने जारी की है। संस्था की तरफ से जारी रिटायरमेंट रेडीनेस रिपोर्ट 2025 का यह तीसरा संस्करण है। मिंट हिंदी इस रिपोर्ट से सहमत या असहमत नहीं है।

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