UPI Payment Charges: अगर आप रोजाना गूगल पे(Google Pay), फोनपे (PhonePe), पेटीएम (Paytm) या किसी दूसरे UPI ऐप से पेमेंट करते हैं और हाल में UPI चार्ज लगने की खबरों से परेशान हैं, तो आपके लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। PhonePe के CEO समीर निगम ने साफ कहा है कि भारतीय ग्राहकों से UPI पेमेंट करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
दरअसल, चुनिंदा बिजनेस UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू किए जाने की संभावना को लेकर यह सवाल उठ रहा था कि कहीं इसका बोझ आम ग्राहकों पर तो नहीं आएगा। PhonePe CEO और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (Payments Council of India - PCI) के मुताबिक, कंज्यूमर UPI पेमेंट फ्री रहेगा।
आम UPI यूजर को अभी क्या समझना चाहिए?
अगर आप किसी व्यक्ति को UPI से ₹500, ₹2,000 या ₹10,000 भेजते हैं, तो इस प्रस्तावित व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि आपको सीधे UPI चार्ज देना होगा। मौजूदा स्पष्टीकरण के मुताबिक P2P यानी Person-to-Person पेमेंट प्रस्तावित MDR के दायरे में नहीं है। मुद्दा मुख्य रूप से कुछ बिजनेस-डायरेक्टेड ट्रांजैक्शन को लेकर है।
फिर ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट की बात क्यों हो रही है?
मामला यहां थोड़ा अलग है। प्रस्तावित व्यवस्था में कुछ ₹2,000 से अधिक के बिजनेस UPI ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.40% MDR लगाए जाने की बात सामने आई है। MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारी से पेमेंट प्रोसेसिंग से जुड़े पक्षों को मिल सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर ग्राहक के खाते से सीधे शुल्क काट लिया जाएगा।
MDR किससे लिया जा सकता है?
प्रस्तावित ढांचे में फोकस मर्चेंट या बिजनेस साइड पर है। पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (Payments Council of India - PCI) ने भी कहा है कि जहां MDR लागू होगा, वह मर्चेंट और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच व्यावसायिक व्यवस्था होगी, इसे कंज्यूमर से UPI इस्तेमाल करने की फीस नहीं समझना चाहिए। यानी आम ग्राहक के लिए सबसे अहम बात यही है कि UPI इस्तेमाल करने के लिए अलग से पेमेंट फीस नहीं लगाई जा रही है।
छोटी दुकानों और किराना स्टोर का क्या होगा?
यह भी इस पूरे मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। PCI ने कहा है कि छोटे मर्चेंट और किराना स्टोर UPI स्वीकार करने के लिए MDR नहीं देंगे। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों के लिए डिजिटल पेमेंट को सस्ता और आसान बनाए रखना है। इससे छोटे दुकानदारों के साथ-साथ उन ग्राहकों को भी राहत मिलती है जो रोजमर्रा की खरीदारी के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं।
UPI चार्ज को लेकर भ्रम क्यों पैदा हुआ?
इसकी वजह Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 से जुड़ा बदलाव है। रिपोर्ट के मुताबिक इस कानून में सरकार को चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड पर MDR लगाने की शक्ति दी गई है। इसी के बाद यह सवाल उठा कि अगर MDR लगाया गया तो अंततः इसका खर्च कौन उठाएगा। इसी बहस के बीच PhonePe CEO समीर निगम ने 8 अगस्त को स्पष्ट किया कि UPI भारतीय ग्राहकों के लिए फ्री रहेगा।
UPI सिस्टम का खर्च कौन उठाता है?
UPI को चलाने में टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड प्रिवेंशन, कस्टमर सपोर्ट और रेगुलेटरी कंप्लायंस जैसी लागत आती है। Payments Council of India के मुताबिक पिछले करीब एक दशक में बैंक, पेमेंट कंपनियां, फिनटेक कंपनियां, NPCI और RBI समेत पूरे पेमेंट इकोसिस्टम ने इन खर्चों को वहन किया है। अब UPI ट्रांजैक्शन का पैमाना लगातार बढ़ने के साथ इस पूरे सिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के तरीके पर चर्चा हो रही है।