
PPF Account Interest Rules: पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) निवेशकों के लिए सबसे भरोसेमंद बचत योजनाओं में से एक है। इसकी मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है, लेकिन हर किसी के मन में ये सवाल होता है कि अगर निवेशक इस अवधि के बाद नई रकम जमा करना बंद भी कर दें, तो क्या उस अकाउंट का क्या होगा, और उसपर मिलेगा या नहीं? आइए जानते हैं।
PPF अकाउंट की खासियत यह है कि मैच्योरिटी पूरी होने के बाद भी निवेशक को विकल्प मिलता है। वे चाहें तो अकाउंट को बंद करके पैसा निकाल सकते हैं, या फिर इसे आगे बढ़ा सकते हैं। अगर कोई निवेशक अकाउंट को एक्सटेंड करने का फॉर्म नहीं भरता और नई रकम भी जमा नहीं करता, तो अकाउंट पैसिव एक्सटेंशन मोड में चला जाता है। इस स्थिति में बैलेंस पर ब्याज मिलता रहता है, भले ही कोई नई रकम न डाली जाए।
PPF में निवेशक हर साल न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक जमा कर सकते हैं। इस निवेश पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है। साथ ही, ब्याज भी टैक्स-फ्री होता है। यही वजह है कि यह स्कीम लंबे समय तक बचत करने वालों और टैक्स प्लानिंग करने वालों के बीच बेहद लोकप्रिय है।
मैच्योरिटी के बाद निवेशक चाहें तो अकाउंट को 5-5 साल की अवधि के लिए एक्सटेंड कर सकते हैं। इस दौरान वे नई रकम जमा कर सकते हैं या सिर्फ पुराने बैलेंस पर ब्याज लेते रह सकते हैं। अगर निवेशक सक्रिय रूप से एक्सटेंशन का विकल्प चुनते हैं, तो उन्हें हर साल न्यूनतम 500 रुपये जमा करना अनिवार्य होगा। लेकिन अगर वे पैसिव एक्सटेंशन मोड में जाते हैं, तो बिना नई रकम डाले भी ब्याज मिलता रहेगा।
वर्तमान में PPF पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। इसका मतलब है कि अगर किसी निवेशक के अकाउंट में 10 लाख रुपये बैलेंस है और वे नई रकम नहीं डालते, तो भी उन्हें हर साल लगभग 71,000 रुपये ब्याज मिलेगा। ये ब्याज उनके अकाउंट में जुड़ता रहेगा और कंपाउंडिंग के कारण बैलेंस समय के साथ और बढ़ता जाएगा।
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