PPF Account: पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) को हमेशा से ही एक सेफ और टैक्स-फ्री निवेश विकल्प माना जाता रहा है। यह भारत सरकार की स्माल सेविंग स्कीम है। इसमें सरकारी गारंटी के साथ रिटर्न मिलता है। इसमें अगर आप कुछ खास प्लानिंग और नियमों का पालन करते हैं तो PPF में अपनी कमाई को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। सही रणनीति के साथ इसे एक पेंशन स्कीम में भी बदला जा सकता है। इसकी सबसे खास बात यही है कि इसमें कोई मार्केट रिस्क नहीं है।
PPF शुरू करने के बाद आपका निवेश 15 सालों के लिए लॉक हो जाता है। इसके बाद यह मैच्योर हो जाता है। हालांकि, बचत के इस सफर में निवेशक को सबसे बड़ा निर्णय भी मैच्योरिटी पर ही लेना होता है। इसकी वजह ये है कि यह आपके रिटायरमेंट प्लान, टैक्स बचत और फंड की उपलब्धता को सीधे प्रभावित करता है। वहीं PPF अकाउंट जब 15 साल की अवधि पूरी कर लेता है, तब अकाउंटहोल्डप के सामने 3 ऑप्शन होते हैं।
1. खाता बंद करना
अगर आप अकाउंट जारी नहीं रखना चाहते हैं, तो इसे बंद करके पूरा पैसा निकाल सकते हैं। इसके लिए क्लोजर फॉर्म और पासबुक जमा करना होता है। इसके बाद PPF अकाउंट बंद हो जाता है।
2. बिना योगदान किए अकाउंट जारी रखना
इस ऑप्शन के तहत आप अकाउंट बंद नहीं करते हैं और न ही आपको कोई नया योगदान करना पड़ता है। इस बीच मौजूदा बैलेंस पर सरकार की तरफ से तय दर से टैक्स-फ्री ब्याज मिलता रहता है। इसके अलावा साल में एक बार आंशिक निकासी की सुविधा भी मिलती है।
3. योगदान के साथ 5-5 साल बढ़ाना
आप PPF अकाउंट को 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ा सकते हैं और निवेश जारी रख सकते हैं। इसके लिए मैच्योरिटी के एक साल के भीतर फॉर्म-4 (या फॉर्म-H) जमा करना जरूरी है। अगर समय पर फॉर्म जमा नहीं हुआ, तो अकाउंट अपने आप बिना योगदान के बढ़ जाएगा।
PPF में 25 साल तक कर सकते हैं निवेश
बता दें कि PPF स्कीम का मैच्योरिटी पीरियड 15 साल का होता है लेकिन निवेशक PPF स्कीम को 2 बार 5-5 साल के लिए आगे एक्सटेंड करा सकते हैं। कहने का मतलब यह हुआ कि PPF में 25 साल तक निवेश किया जा सकता है।
PPF का टैक्स स्ट्रक्चर क्या है?
PPF भारत की उन गिनी-चुनी स्कीमों में से एक है, जो EEE (Exempt-Exempt-Exempt) टैक्स सिस्टम का पालन करती है।