PPF Account Rule: पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) भारत में लंबे समय से एक भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में जाना जाता है। सुरक्षित रिटर्न, टैक्स छूट और गारंटीड ब्याज के कारण यह स्कीम खासतौर पर मध्यम वर्ग के निवेशकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। हालांकि, इसकी 15 साल की लॉक-इन अवधि कई बार निवेशकों को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या वे जरूरत पड़ने पर समय से पहले पैसा निकाल सकते हैं। ऐसे में PPF के प्रीमैच्योर विदड्रॉल (Premature Withdrawal) से जुड़े नियमों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है।
PPF अकाउंट की मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है। इसे आगे 5-5 साल के ब्लॉक्स में बढ़ाया जा सकता है। इस दौरान निवेशक नियमित रूप से योगदान करता है और सरकार द्वारा तय ब्याज दर पर रिटर्न मिलता रहता है। वहीं अगर किसी कारणवश निवेशक को बीच में पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो इसके लिए कुछ सीमित विकल्प उपलब्ध हैं।
5 साल का ‘वेटिंग पीरियड’ है अनिवार्य
आप खाता खुलने के तुरंत बाद उसे बंद नहीं कर सकते हैं। नियमों के मुताबिक, खाता जिस साल खुला है, उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद कम से कम 5 साल पूरे होना जरूरी है। उदाहरण के लिए, अगर आपने 2021 में खाता खोला है, तो आप 2026-27 से पहले इसे बंद करने का विकल्प नहीं चुन सकते हैं। इसके अलावा, यदि आप समय से पहले खाता बंद करते हैं, तो आपको ब्याज पर 1% की कटौती झेलनी पड़ती है। यानी आपको उस अवधि के लिए लागू ब्याज दर से 1% कम रिटर्न मिलेगा।
PPF अकाउंट को बंद करने के नियम
सरकार ने PPF अकाउंट को समय से पहले बंद करने की अनुमति कुछ विशेष परिस्थितियों में दी है। सबसे पहला मामला गंभीर बीमारी का है। यदि खाताधारक, उसके जीवनसाथी, बच्चों या माता-पिता को किसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए बड़ी रकम की आवश्यकता होती है, तो वह PPF अकाउंट को समय से पहले बंद कर सकता है। इसके लिए अस्पताल या डॉक्टर से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करना जरूरी होता है।
दूसरा प्रमुख कारण उच्च शिक्षा है। यदि खाताधारक या उसके बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता है, तो भी PPF अकाउंट को प्रीमैच्योर क्लोज किया जा सकता है। इसके लिए एडमिशन लेटर और फीस से जुड़े दस्तावेज जमा करने होते हैं।
तीसरी स्थिति तब आती है जब खाताधारक भारतीय निवासी से एनआरआई (NRI) बन जाता है। ऐसे मामलों में भी PPF अकाउंट को समय से पहले बंद करने की अनुमति दी जाती है।
PPF अकाउंट पर है लोन की सुविधा
इसके अलावा, PPF अकाउंट पर लोन की सुविधा भी उपलब्ध है। निवेशक 3 से 6 वर्ष के बीच अपने PPF बैलेंस के खिलाफ लोन ले सकता है। इस लोन की ब्याज दर आमतौर पर PPF की ब्याज दर से थोड़ी अधिक होती है, लेकिन यह अन्य पर्सनल लोन की तुलना में सस्ती होती है।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि PPF को एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में ही देखना चाहिए। यह स्कीम खासतौर पर रिटायरमेंट या भविष्य की बड़ी जरूरतों के लिए बनाई गई है। ऐसे में इसे बीच में बंद करना अंतिम विकल्प होना चाहिए। यदि संभव हो, तो पहले आंशिक निकासी या लोन जैसे विकल्पों पर विचार करना बेहतर होता है।