
PPF Investment: पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) को भारत में निवेश के लिए सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद जरिया माना जाता है। बढिया रिटर्न और पैसा डूबने का खतरा न के बराबर होने की वजह से यह लोगों की फेवरेट स्कीम है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पीपीएफ में सिर्फ पैसा लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि कब लगाना है, यह भी बहुत महत्वपूर्ण है? इन्वेस्टमेंट की टाइमिंग आपके रिटर्न पर खूब असर डाल सकती है। यही वजह है कि समझदार निवेशक ‘5 तारीख वाले गोल्डन रूल’ को फॉलो करते हैं और ओरों से ज्यादा मुनाफा कमाते हैं।
PPF में 15 साल का लॉक-इन पीरियड है। इसे 5 - 5 साल के लिए आगे बढ़ा सकते हैं। PPF का इस्तेमाल अक्सर रिटायरमेंट के लिए एक स्थिर फंड बनाने के लिए किया जाता है। निवेशक अपनी निवेश अवधि को कई बार बढ़ा सकते हैं। PPF में निवेश को लंबे समय तक बनाए रखने पर सबसे अच्छा रिटर्न मिलता है। मौजूदा समय में पीपीएफ पर ब्याज दर 7.10 फीसदी प्रति वर्ष है। इसकी समीक्षा सरकार हर तीन महीने (तिमाही) में करती है। 1 अप्रैल 2020 से ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
कोई भी व्यक्ति अपने PPF खाते में हर साल कम से कम ₹500 और ज़्यादा से ज़्यादा ₹1.5 लाख निवेश कर सकता है। इस योजना में सालाना कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। इसका मतलब है कि निवेशकों को न सिर्फ़ अपने मूल निवेश पर, बल्कि समय के साथ जमा हुए ब्याज पर भी रिटर्न मिलता है। अगर आप हर महीने ₹5,000, ₹10,000 या ₹12,000 का योगदान करते हैं, उनके लिए 15 साल बाद और अगर अवधि और बढ़ा दी जाए तो जमा होने वाली कुल राशि काफी बढ़ जाती है।
पीपीएफ में ब्याज की गणना का तरीका थोड़ा अलग और दिलचस्प है। नियम के मुताबिक, आपके खाते पर मिलने वाले मासिक ब्याज की गणना महीने की 5 तारीख और महीने के अंतिम दिन के बीच मौजूद न्यूनतम बैलेंस (Minimum Balance) पर की जाती है। यदि आप महीने की 5 तारीख तक पैसा जमा कर देते हैं तो आपको पूरे महीने का ब्याज मिलता है। वहीं अगर आप 6 तारीख को पैसा जमा करते हैं तो उस महीने का ब्याज आपके हाथ से निकल जाता है।
अगर आप हर महीने 5000 रुपये निवेश करते हैं तो साल भर में निवेश की गई रकम 60,000 रुपये होगी। 15 साल तक निवेश करते हैं और ब्याज दर 7.1 फीसदी है तो मैच्योरिटी पर लगभग ₹16.2 लाख होंगे। इसमें आपका कुल निवेश ₹9 लाख होगा, जबकि ब्याज से हुई कमाई लगभग ₹7.2 लाख होगी। अगर आप निवेश को और 5 साल के लिए बढ़ा देते हैं, तो 20 सालों में यह राशि बढ़कर लगभग ₹26.6 लाख हो सकती है। इसे 25 सालों तक जारी रखने पर, यह राशि बढ़कर लगभग ₹41.2 लाख तक पहुंच सकती है। इस स्थिति में, कुल निवेश ₹15 लाख होगा, जबकि अर्जित ब्याज लगभग ₹26.2 लाख हो सकता है।
अगर आप पीपीएफ में पूरे साल का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं, तो वित्तीय वर्ष की शुरुआत में एकमुश्त राशि जमा करना समझदारी है। इससे आपकी पूरी रकम पर पूरे साल का ब्याज मिलता है और रिटर्न अधिक हो जाता है। इसके अलावा, नियमित मासिक निवेश जारी रखना भी फायदेमंद रहता है।
समय पर निवेश सुनिश्चित करने के लिए इंटरनेट बैंकिंग एक बेहतर विकल्प है। इसके जरिए आप हर महीने आसानी से और समय पर अपने PPF खाते में पैसा जमा कर सकते हैं। इससे लेट होने की संभावना कम होती है और आप ब्याज का नुकसान होने से बच जाते हैं।
PPF वैसे ट्रिपल-ई (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी में आता है। इसका मतलब है कि इसमें तीन स्तरों पर टैक्स छूट मिलती है। पहला - हर साल ₹1.5 लाख तक के निवेश पर आपको धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलेगी। दूसरा - निवेश पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होगा और तीसरा - 15 साल की मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम पर भी कोई टैक्स नहीं देना होता है। यही वजह है कि PPF, FD जैसे ऑप्शन की तुलना में ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
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