PPF Rules Explained: पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) को हमेशा से ही एक सेफ और टैक्स-फ्री निवेश विकल्प माना जाता रहा है। यह भारत सरकार की स्माल सेविंग स्कीम है। इसमें सरकारी गारंटी के साथ रिटर्न मिलता है। PPF को आमतौर पर 15 साल का लॉक-इन स्कीम माना जाता है, लेकिन असल में कई निवेशकों के लिए यह अवधि इससे ज्यादा भी हो सकती है। ऐसे में बहुत से लोग उलझन में रहते हैं कि आखिर उनका पैसा कब तक फंसा रहेगा। दरअसल, PPF का 15 साल का लॉक-इन आपके निवेश की तारीख से नहीं, बल्कि उस वित्त वर्ष (Financial Year) के अंत से शुरू होता है, जिसमें आपने पहला निवेश किया था।
PPF शुरू करने के बाद आपका निवेश 15 सालों के लिए लॉक हो जाता है। इसके बाद यह मैच्योर हो जाता है। हालांकि, बचत के इस सफर में निवेशक को सबसे बड़ा निर्णय भी मैच्योरिटी पर ही लेना होता है। इसकी वजह ये है कि यह आपके रिटायरमेंट प्लान, टैक्स बचत और फंड की उपलब्धता को सीधे प्रभावित करता है।
जानिए लॉक-इन अवधि कैसे तय होती है?
पीपीएफ में जिस दिन आपने पहला निवेश किया है, उस तारीख से इसकी अवधि का कैलकुलेशन नहीं होता है। बल्कि उस वित्त वर्ष के आखिर से होती है, जिस वर्ष में शुरुआती योगदान किया जाता है। इसका मतलब है कि अगर आप वित्त वर्ष के दौरान कभी भी निवेश करते हैं। चाहे अप्रैल में या मार्च में—तो समय की गिनती उस वर्ष की 31 मार्च से ही शुरू होती है।
यही नियम पूरी कहानी बदल देता है।
उदाहरण के तौर पर किसी व्यक्ति ने 16 अप्रैल 2026 को PPF अकाउंट खोला और पहली जमा की। यह निवेश FY 2026-27 में आता है, जिसका अंत 31 मार्च 2027 को होगा। अब PPF का 15 साल का लॉक-इन इसी तारीख से गिना जाएगा। इसे अप्रैल 2026 से नहीं गिना जाएगा।
16 साल का हो सकता है लॉक - इन पीरियड
अगर अकाउंट वित्त वर्ष की शुरुआत में खोला गया है तो इसका सीधा मतलब है कि निवेशक का पैसा करीब 15 साल नहीं, बल्कि लगभग 16 साल तक लॉक रह सकता है। यानी तकनीकी रूप से स्कीम 15 साल की है, लेकिन व्यवहार में इसकी अवधि बढ़ जाती है।
PPF में पैसा जमा करने का सही समय
आप PPF अकाउंट को 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ा सकते हैं और निवेश जारी रख सकते हैं। कहने का मतलब यह हुआ कि PPF में 25 साल तक निवेश किया जा सकता है। इसके लिए मैच्योरिटी के एक साल के भीतर फॉर्म-4 (या फॉर्म-H) जमा करना जरूरी है। अगर समय पर फॉर्म जमा नहीं हुआ, तो अकाउंट अपने आप बिना योगदान के बढ़ जाएगा। साल 2020 के बाद से पीपीएफ की ब्याज दरें 7.1 फीसदी पर स्थिर हैं।
PPF में टैक्स का फायदा
PPF वैसे ट्रिपल-ई (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी में आता है। इसका मतलब है कि इसमें तीन स्तरों पर टैक्स छूट मिलती है। पहला - हर साल ₹1.5 लाख तक के निवेश पर आपको धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलेगी। दूसरा - निवेश पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होगा और तीसरा - 15 साल की मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम पर भी कोई टैक्स नहीं देना होता है। यही वजह है कि PPF, FD जैसे ऑप्शन की तुलना में ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।