टैक्स बचत करना लगभग हर व्यक्ति की प्राथमिकता होती है और रिटायरमेंट के लिए तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। भारत में निवेशकों के बीच तीन लोकप्रिय निवेश विकल्प; पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF), इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) लोगों को भविष्य सुरक्षित करने के साथ-साथ आयकर की धारा 80C के तहत टैक्स में राहत भी देती हैं। हालांकि इन तीनों योजनाओं में जोखिम, रिटर्न और टैक्स लाभ अलग-अलग हैं, इसलिए सही चुनाव करने के लिए इनके बारे में समझना बेहद महत्वपूर्ण है।
ELSS को समझें
सबसे पहले बात करें ELSS की। ELSS एक म्यूचुअल फंड आधारित योजना है, जिसमें निवेश का बड़ा हिस्सा शेयर बाजार में लगाया जाता है। यह टैक्स बचत के लिए लोकप्रिय विकल्प है क्योंकि इसकी लॉक-इन अवधि सिर्फ 3 साल है, जो कि 80C की सभी योजनाओं में सबसे कम है। ELSS में निवेश पर उतार-चढ़ाव का जोखिम होता है, लेकिन लंबी अवधि में उच्च रिटर्न पाने की संभावना भी अधिक रहती है। हालांकि 1.25 लाख रुपए से अधिक के लाभ पर 12.5% LTCG टैक्स लागू होता है।
PPF के विकल्प को समझें
दूसरी ओर PPF उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जो सुरक्षित और स्थिर निवेश चाहते हैं। यह सरकारी गारंटी के साथ आता है, इसलिए जोखिम लगभग शून्य माना जाता है। हालांकि इसकी लॉक-इन अवधि 15 साल की होती है, जिससे पैसे की तरलता सीमित हो जाती है। PPF की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें निवेश, ब्याज और परिपक्वता राशि तीनों ही पूर्णतः टैक्स फ्री रहते हैं (EEE स्टेटस)। मौजूदा ब्याज दर 7.1% है।
क्या है NPS?
NPS उन लोगों के लिए लाभदायक है जो रिटायरमेंट योजना बनाना चाहते हैं और नियमित पेंशन की तलाश में हैं। इसके जरिए व्यक्ति नौकरी के दौरान निवेश करता है और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन प्राप्त करता है। 60% राशि टैक्स फ्री निकल सकती है, जबकि शेष 40% राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य है। यह इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी बॉन्ड के मिश्रण में निवेश करता है, इसलिए जोखिम मध्यम और रिटर्न औसत 8-10% वार्षिक रहता है। इसमें 80C के तहत 1.5 लाख और 80CCD (1B) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपए तक टैक्स छूट मिलती है।
कौन बेहतर है?
इसका जवाब व्यक्ति के लक्ष्य पर निर्भर करता है। कम जोखिम और टैक्स फ्री रिटर्न चाहिए तो PPF, तेज रिटर्न और संपत्ति वृद्धि चाहिए तो ELSS और स्थिर रिटायरमेंट आय के लिए NPS बेहतर विकल्प है।