PPF vs EPF vs NPS: रिटायरमेंट के लिए कौन सा निवेश प्लान है बेस्ट, जानिए डिटेल

PPF vs EPF vs NPS: रिटायरमेंट के बाद फाइनेंशियली सिक्योर रखने के लिए पहले से सेविंग्स करने की जरूरत रहती है। अक्सर सेविंग्स स्कीम्स को लेकर हम कंफ्यूज रहते हैं कि किस पर अधिक फायदे की उम्मीद है। आइये जानते हैं NPS, EPF या PPF में कहां निवेश करना होगा बेहतर।

Jitendra Singh
अपडेटेड27 Mar 2026, 01:27 PM IST
Retirement Savings Scheme: NPS, PPF या EPF में फर्क समझना जरूरी है।
Retirement Savings Scheme: NPS, PPF या EPF में फर्क समझना जरूरी है।

Retirement Savings Scheme: रिटायरमेंट के बाद हर कोई चाहता है कि उसकी नियमित इनकम हो। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं में निवेश कर अपना भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं। इस बीच बहुत से लोग कंफ्यूज रहते हैं कि किस योजना में निवेश करने पर ज्यादा फायदा मिलेगा। इन दिनों NPS, EPF और PPF की काफी चर्चा हो रही है। अगर आप भी इन योजनाओं में निवेश करते हैं तो आइये जानते हैं आपके लिए कौन सी योजना बेहतर रहेगी।

हर स्कीम की अपनी खासियत, टैक्स बेनिफिट और रिटर्न है। आज हम आपको इनकी खास‍ियत के साथ ही इनकी तुलना करके बताएंगे क‍ि आप अपनी जरूरत के हिसाब से कि‍स स्‍कीम को स‍िलेक्‍ट कर सकते हैं। तीनों ही स्‍कीम की यह तुलना मार्च 2026 के लेटेस्‍ट रेट के आधार पर की जाएगी।

पीपीएफ (PPF)

पीपीएफ (PPF) एक सरकारी गारंटीड लॉन्ग टर्म सेविंग स्कीम है। यहां न‍िवेश करने पर र‍िस्‍क ब‍िल्‍कुल भी नहीं है। यह स्‍कीम उन लोगों के लिए बेस्ट है, जो स‍िक्‍योर रिटर्न चाहते हैं। इसमें न‍िवेश की अवध‍ि 15 साल की है। लेक‍िन आप इसे 5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ा सकते हैं। इसकी ब्‍याज दर को लेकर सरकार की तरफ से हर तीन महीने में र‍िव्‍यू क‍िया जाता है। अभी इसकी ब्‍याज दर 7.1 फीसदी प्रत‍ि वर्ष है। टैक्स बेनिफिट की बात करें तो इसमें न‍िवेश पर 80C के तहत 1.5 लाख तक के न‍िवेश पर छूट है। ब्याज और मैच्योरिटी पूरी तरह से टैक्स-फ्री है।

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NPS: बाजार से जुड़ा लेकिन ज्यादा रिटर्न देने वाला प्लान

National Pension System (NPS) अन्य दोनों योजनाओं से अलग है क्योंकि यह पूरी तरह मार्केट-लिंक्ड है। इसमें आपका पैसा शेयर बाजार, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है। रिटर्न यहां फिक्स नहीं होता, लेकिन औसतन 8 फीसदी से 12 फीसदी तक मिल सकता है। रिटायरमेंट के समय आप कुल फंड का 60 फीसदी टैक्स-फ्री निकाल सकते हैं। बाकी 40 फीसदी से एन्युइटी लेकर पेंशन हासिल कर सकते हैं। इसका फायदा यह है कि इसमें लंबी अवधि में ग्रोथ की संभावना ज्यादा रहती है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव का असर भी होता है।

EPF

कर्मचारी भविष्य निधि को संक्षेप में ईपीएफ कहते हैं। इसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ओर से ऑपरेट किया जाता है। ईपीएफ खाते में पैसा जमा करने पर रिटर्न की गारंटी सरकार देती है। 30 साल तक नौकरी करने के बाद जब कर्मचारी रिटायर होते हैं, तो उन्हें रिटायरमेंट के समय एकमुश्त रकम मिलती है। EPF में कंपनी और कर्मचारी दोनों की तरफ से बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 12 फीसदी कंट्रीब्यूशन किया जाता है।

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इस राशि पर सरकार सालाना ब्याज घोषित करती है, जो फिलहाल 8.25 फीसदी है। EPF में निवेश करने पर धारा 80c के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है। EPF की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप चाहें या न चाहें, आपकी बचत अपने-आप हो जाती है. रिटायरमेंट के समय यह रकम एकमुश्त मिलती है, जबकि जरूरत पड़ने पर घर खरीदने या मेडिकल खर्च के लिए आंशिक निकासी की सुविधा भी है।

कौन है सबसे बेहतर विकल्प?

अगर आप स्थिरता चाहते हैं तो EPF और PPF सबसे सुरक्षित हैं। ये उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं जो बाजार जोखिम से दूर रहना पसंद करते हैं। वहीं, NPS उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो लंबे समय में ज्यादा रिटर्न के लिए कुछ जोखिम उठा सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, तीनों योजनाओं का मिश्रण सबसे समझदारी भरा कदम है। EPF से स्थिरता, PPF से टैक्स-फ्री ग्रोथ और NPS से मार्केट का एक्सपोजर मिलकर आपकी रिटायरमेंट योजना को मजबूत बनाते हैं। आखिरकार, रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब एक विकल्प चुनना नहीं, बल्कि सही संतुलन बनाना है।

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