Asset Allocation: 198 करोड़ की संपत्ति, निवेश का अलग अंदाज! प्रशांत किशोर-जाह्नवी दास से सीखें पैसा लगाने का तरीका

Prashant Kishor Net Worth: प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव में 198 करोड़ रुपये की संपत्ति का हलफनामा दिया। उनकी और पत्नी की निवेश रणनीतियों में अलग है, जो निवेशकों को एसेट एलोकेशन और रिस्क मैनेजमेंट का पाठ पढ़ाती है।

Anuj Shrivastava
पब्लिश्ड15 Aug 2026, 05:14 PM IST
प्रशांत किशोर-जाह्नवी दास से सीखें पैसा लगाने का तरीका
प्रशांत किशोर-जाह्नवी दास से सीखें पैसा लगाने का तरीका

Prashant Kishor Property Affidavit: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान चुनाव आयोग को सौंपे अपने हलफनामे में परिवार की कुल करीब 198 करोड़ रुपये की संपत्ति का ब्यौरा दिया है। अगर इस हलफनामे को ध्यान से देखा जाए, तो ये काफी दिलचस्प है। प्रशांत किशोर और उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास ने बिल्कुल अलग-अलग रणनीतियों के तहत अपना पैसा लगाया है, जो आम निवेशकों के लिए एसेट एलोकेशन और रिस्क मैनेजमेंट का बेहतरीन सबक है।

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) अब विधायक बन गए हैं। उन्होंने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव जीत ली थी। पीके ने इस उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते वक्त चुनाव आयोग को जो हलफनामा सौंपा, उसमें परिवार की कुल संपत्ति करीब 198 करोड़ रुपये बताई गई है। सुर्खियां भले ही आंकड़े की बड़ी रकम पर बनीं, लेकिन पर्सनल फाइनेंस की नजर से इस हलफनामे में असली दिलचस्पी की बात कुछ और है। प्रशांत किशोर और उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास ने बिल्कुल अलग रणनीति के तहत निवेश किया है। यह फर्क आम निवेशक के लिए एसेट एलोकेशन, डायवर्सीफिकेशन और रिस्क मैनेजमेंट से जुड़े कई व्यावहारिक सबक छोड़ जाता है।

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पति का जमीन में भरोसा, पत्नी का कागजी निवेश में

हलफनामे के मुताबिक प्रशांत किशोर की करीब 96 करोड़ रुपये की संपत्ति में तीन-चौथाई से ज्यादा हिस्सा जो करीब 73.87 करोड़ रुपये होता है, सिर्फ जमीन-मकान मकान जैसी अचल संपत्तियों में लगा है, जबकि चल संपत्ति सिर्फ 22.19 करोड़ रुपये है। पत्नी जाह्नवी दास के मामले में तस्वीर बिल्कुल उलट है। उनकी करीब 102 करोड़ रुपये की संपत्ति में 89.52 करोड़ रुपये एफडी, म्यूचुअल फंड, बीमा, कंपनी हिस्सेदारी जैसी चल संपत्ति है और सिर्फ 12.42 करोड़ रुपये अचल संपत्ति में। स्पष्ट है कि एक ही परिवार में एक सदस्य का झुकाव ठोस संपत्ति की ओर और दूसरे का बाजार से जुड़े कागजी निवेश की ओर है। दोनों अपनी जगह ठीक हैं, बशर्ते किसी एक एसेट क्लास में जरूरत से ज्यादा पैसा न फंसे।

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प्रशांत किशोर की नेटवर्थ

बीमा में भारी दांव, जोखिम का सवाल

प्रशांत किशोर के पोर्टफोलियो में HDFC लाइफ की दो इंश्योरेंस पॉलिसियों में अकेले 5.34 करोड़ रुपये और LIC में करीब 19.87 लाख रुपये लगे हैं। यानी उनकी चल संपत्ति के एक बड़े हिस्से पर बीमा उत्पादों का कब्जा है। पर्सनल फाइनेंस सलाहकार आमतौर पर बीमा और निवेश को अलग रखने की सलाह देते हैं, क्योंकि बीमा-सह-निवेश पॉलिसियों में रिटर्न सीमित रहता है। किसी एक कैटेगरी में इतनी बड़ी रकम केंद्रित होना विविधीकरण के बुनियादी सिद्धांत के खिलाफ जाता है।

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अपनी ही कंपनी में सबसे बड़ा दांव

जाह्नवी दास के पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा हिस्सा वेधस वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड में है, जिसका बुक वैल्यू करीब 95.26 करोड़ रुपये बताया गया है और जिसमें परिवार की 100% हिस्सेदारी है। इसके अलावा प्रशांत किशोर ने इसी कंपनी को 8.31 करोड़ रुपये और पत्नी ने प्रशांत किशोर को 41.88 लाख रुपये का कर्ज भी दे रखा है। एक ही पारिवारिक कंपनी में इतनी बड़ी रकम और आपसी उधार का जुड़ना ये कॉन्सन्ट्रेशन रिस्क का क्लासिक उदाहरण है, भले ही कंपनी पर पूरा नियंत्रण परिवार के पास ही क्यों न हो।

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PPF और छोटी बचत की जगह बरकरार

बड़े आंकड़ों के बीच पत्नी के पोर्टफोलियो में डाकघर PPF में 58.75 लाख रुपये की मौजूदगी दिखाती है कि पारंपरिक, टैक्स-फ्री और सुरक्षित बचत योजनाओं की जगह बड़े पोर्टफोलियो में भी बनी रहती है। परिवार में आश्रित पुत्र के नाम पर भी अलग से 7.19 लाख रुपये की संपत्ति (FD और बचत खाते) दर्ज है, जो शुरू से ही अलग-अलग सदस्यों के नाम पर संपत्ति बांटने की सोच दिखाता है।

प्रशांत किशोर-जाह्नवी दास का हलफनामा असल में ये दिखाता है कि एक ही परिवार में भी दो लोग बिल्कुल अलग जोखिम-प्रोफाइल के साथ पैसा लगा सकते हैं एक रियल एस्टेट और बीमा की ओर झुका, दूसरा बाजार-आधारित निवेश और पारिवारिक कारोबार की ओर। आम निवेशक के लिए सबक यही है कि पोर्टफोलियो चाहे जितना भी बड़ा हो, एक ही एसेट क्लास या एक ही कंपनी में जरूरत से ज्यादा पूंजी केंद्रित करने से बचना जरूरी है।

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