
Encumbrance Certificate: आम आदमी के लिए घर खरीदना किसी सपने से कम नहीं है। आज कल की इस बढ़ती महंगाई के बीच बहुत से लोगों को घर लेने के लिए लोन लेना होता है। अगर आप भी घर खरीद रहे हैं तो आपको जानकारी होनी चाहिए कि बिल्डर से कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स लेना बहुत जरूरी है। प्रॉपर्टी में किया जाने वाला निवेश काफी बड़ा होता है। लिहाजा इस प्रक्रिया के दौरान की गई कोई भी गलती भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।
ऐसे में खरीदार के लिए प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट्स की जांच करते समय सभी तरह की सावधानियां बरतना जरूरी हो जाता है। ऐसे ही एक नॉन एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट (Non Encumbrance Certificate) डॉक्यूमेंट्स होता है। यह प्रॉपर्टी से जुड़ी रजिस्ट्री और म्यूटेशन जितना ही बेहद खास होता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए जितना जरूरी रजिस्ट्री पेपर और म्यूटेशन के डॉक्यूमेंट होते हैं। उतना ही महत्वपूर्ण नॉन एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट भी होता है। दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों के खरीदारों के लिए यह और भी जरूरी है। ऐसे में बिल्डर से घर खरीदते समय नॉन एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट जरूर हासिल करें। किसी संपत्ति को खरीदने के लिए जितना जरूरी रजिस्ट्री पेपर और म्यूटेशन के डॉक्यूमेंट होते हैं, उतना ही महत्वपूर्ण नॉन एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट भी होता है। बिल्डर से घर खरीदते समय प्रॉपर्टी का नॉन एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट प्राप्त करें।
एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट अपने आप में एक तरह का रिकार्ड है। जिसमें आपकी प्रॉपर्टी से जुड़े सभी फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन का ब्यौरा शामिल रहता है। वहीं नॉन-एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट एक तरह का कानूनी कागजात है। इसमें यह घोषित किया जाता है कि आपकी प्रापर्टी के खिलाफ किसी प्रकार का रजिस्टर्ड एन्कम्ब्रन्स यानी कर्ज बकाया नहीं है। एक बार जब आप होम लोन चुका देते हैं, तो आपके एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट में सभी रिपेमेंट डिटेल दिखाई देता हैं। अमूमन एक नॉन एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट में किसी प्रॉपर्टी से जुड़ी 12 साल के लेनदेन की जानकारियां होती हैं। मतलब इसमें प्रॉपर्टी का पूरा इतिहास होता है। जैसे उसे किसने खरीदा, किसने बेचा, कितना मूल्य रहा और क्या उस पर कोई लोन है या नहीं।
न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक, नॉन एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट को पाने के लिए तहसील में जाकर एक फॉर्म भरना पड़ेगा। इस फॉर्म पर दो रुपये का एक नॉन जुडिशियल टिकट भी लगता है। फॉर्म के साथ सर्टिफिकेट लेने का कारण, एड्रेस प्रूफ की अटेस्टेड कॉपी भी लगानी होगी। फॉर्म में सर्वे नंबर, लोकेाशन के साथ संपत्ति से जुड़े अन्य विवरण भी होने चाहिए। अप्लीकेशन पूरी तरह तैयार करने के बाद सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में जमा कराना होगा। इसके 20 से 30 दिन के भीतर आपको सर्टिफिकेट मिल जाएगा।
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