Property Tax: प्रॉपर्टी टैक्स का कैसे होता है कैलकुलेशन? जानिए फॉर्मूले से लेकर पेनल्टी तक पूरी डिटेल

Property Tax: प्रॉपर्टी टैक्स एक स्थानीय कर है, जो घर, फ्लैट या जमीन के मालिकों से नगर निगम की ओर से वसूला जाता है। इसकी राशि प्रॉपर्टी के लोकेशन, आकार और उपयोग के आधार पर तय होती है। समय पर भुगतान न करने पर पेनल्टी लग सकती है। ऐसे में इसके नियमों को जानना बहुत जरूरी है।

Jitendra Singh
अपडेटेड14 Apr 2026, 03:00 PM IST
Property Tax: प्रॉपर्टी टैक्स को हाउस टैक्स भी कहा जाता है।
Property Tax: प्रॉपर्टी टैक्स को हाउस टैक्स भी कहा जाता है।

Property Tax: भारत में घर या जमीन का मालिक होना न केवल एक निवेश माना जाता है, बल्कि इसके साथ कुछ वित्तीय जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax) का भुगतान करना है। कई लोग इसे लेकर भ्रम में रहते हैं कि यह टैक्स क्या होता है, किसे देना पड़ता है और इसकी गणना कैसे की जाती है। आइए विस्तार से समझते हैं।

प्रॉपर्टी टैक्स एक स्थानीय कर (Local Tax) है, जिसे नगर निगम या स्थानीय प्रशासन की ओर से वसूला जाता है। यह टैक्स किसी भी रियल एस्टेट प्रॉपर्टी जैसे घर, फ्लैट, दुकान या जमीन के मालिक पर लगाया जाता है। इस टैक्स से मिलने वाली राशि का उपयोग शहर में बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, पानी, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी सेवाओं के विकास और रखरखाव में किया जाता है।

किन लोगों को देना होता है प्रॉपर्टी टैक्स?

प्रॉपर्टी टैक्स का पेमेंट उस व्यक्ति को करना होता है, जिसके नाम पर प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड होती है। यानी अगर आपने घर, फ्लैट, प्लॉट या कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदी है, तो आपको हर साल यह टैक्स देना अनिवार्य है। चाहे आप उस प्रॉपर्टी में खुद रह रहे हों या उसे किराए पर दिया हो। दोनों ही स्थिति में टैक्स देना होता है। हालांकि, कुछ मामलों में छूट भी दी जाती है। जैसे कि धार्मिक संस्थान, सरकारी भवन या कुछ राज्यों में वरिष्ठ नागरिकों और विकलांग व्यक्तियों को आंशिक राहत मिल सकती है।

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प्रॉपर्टी टैक्स का कैलकुलेशन (Calculation) कैसे करें?

हर नगर निगम का अपना अलग तरीका हो सकता है, इसकी वजह से अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरह की प्रॉपर्टी के हिसाब से टैक्स अलग-अलग हो सकता है. हालांकि, भारत में ज्यादातर जगह एक सामान्य फॉर्मूला (Generic Formula) अपनाया जाता है।

प्रॉपर्टी टैक्स = (बेस वैल्यू × बिल्ट-अप एरिया × एज फैक्टर × टाइप ऑफ बिल्डिंग × कैटेगरी ऑफ यूज) - डेप्रिसिएशन

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आइए इन शब्दों को सरल भाषा में समझते हैं:

बेस वैल्यू (Base Value): आपके इलाके में प्रॉपर्टी की प्रति वर्ग फुट तय की गई सरकारी कीमत।

बिल्ट-अप एरिया (Built-up Area): घर का कुल क्षेत्रफल, जिसमें दीवारें और कारपेट एरिया दोनों शामिल हैं।

एज फैक्टर (Age Factor): इमारत कितनी पुरानी है? नई इमारतों पर अक्सर टैक्स ज्यादा होता है।

टाइप ऑफ बिल्डिंग (Type of Building): क्या प्रॉपर्टी रिहायशी (Residential) है, कमर्शियल (Commercial) या इंडस्ट्रियल (Industrial)?

कैटेगरी ऑफ यूज (Category of Use): घर में आप खुद रहते हैं (Self-occupied), किराए पर दिया है (Rented) या वह खाली (Vacant) पड़ा है?

डेप्रिसिएशन (Depreciation): पुरानी इमारतों की टूट-फूट को देखते हुए टैक्स में कुछ कटौती की जाती है, जिसे डेप्रिसिएशन कहते हैं।

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हाउसिंग प्रॉपर्टी के लिए प्रॉपर्टी टैक्स कैसे तय होता है?

आवासीय संपत्ति के प्रॉपर्टी टैक्स की गणना करते समय कई फैक्टर्स को ध्यान में रखा जाता है:

लोकेशन : प्राइम एरिया या शहर के केंद्र में स्थित प्रॉपर्टीज पर अधिक टैक्स लगता है।

प्रॉपर्टी की उम्र: नई प्रॉपर्टीज पर अधिक टैक्स हो सकता है, लेकिन उन्हें अधिक डेप्रिसिएशन का लाभ भी मिल सकता है।

प्रॉपर्टी का आकार: बड़ी प्रॉपर्टीज पर अधिक टैक्स लगता है।

उपयोग: पर्सनल यूज और किराए पर दी गई प्रॉपर्टीज पर टैक्स अलग हो सकता है।

प्रॉपर्टी का प्रकार: इंडिपेंडेंट हाउस या अपार्टमेंट के अनुसार टैक्स अलग हो सकता है।

प्रॉपर्टी टैक्स देरी से भरने पर पेनल्टी

प्रॉपर्टी मालिकों को पेनल्टी से बचने के लिए समय पर प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान करना चाहिए। उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, देर से भुगतान करने पर राज्य या नगर निगम की पॉलिसी के अनुसार 5% से 20% तक ब्याज या जुर्माना लग सकता है। यह अतिरिक्त शुल्क मूल प्रॉपर्टी टैक्स के ऊपर लगाया जाता है। उदाहरण के तौर पर, पिछले साल अप्रैल में ब्रुहट बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) ने घोषणा की थी कि जो प्रॉपर्टी मालिक अपना प्रॉपर्टी टैक्स समय पर नहीं भरेंगे, उन्हें बकाया राशि के बराबर जुर्माना और सालाना 15% तक ब्याज देना होगा।

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कितना टैक्स देना होता है?

प्रॉपर्टी टैक्स की दर आमतौर पर 5% से 20% के बीच हो सकती है, लेकिन यह पूरी तरह स्थानीय निकाय पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, प्राइम लोकेशन में स्थित कमर्शियल प्रॉपर्टी पर टैक्स अधिक होता है, जबकि रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर अपेक्षाकृत कम।

प्रॉपर्टी टैक्स कैसे जमा करें?

आज के डिजिटल दौर में प्रॉपर्टी टैक्स भरना काफी आसान हो गया है। अधिकांश नगर निगम ऑनलाइन भुगतान की सुविधा देते हैं। आप संबंधित नगर निगम की वेबसाइट पर जाकर:

  • प्रॉपर्टी आईडी या नंबर दर्ज करें
  • टैक्स डिटेल्स चेक करें
  • - ऑनलाइन पेमेंट (नेट बैंकिंग, UPI, कार्ड) करें

इसके अलावा, ऑफलाइन भुगतान के लिए नगर निगम कार्यालय में जाकर भी टैक्स जमा किया जा सकता है।

टैक्स में छूट कैसे मिलती है?

कई नगर निगम समय से पहले टैक्स भरने पर छूट (rebate) देते हैं। इसके अलावा, खाली पड़ी प्रॉपर्टी, वरिष्ठ नागरिक या महिला मालिकों के लिए कुछ राज्यों में विशेष छूट का प्रावधान भी होता है।

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