EPFO: नौकरीपेशा से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों सब्सक्राइबर्स को बड़ी राहत मिली है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए PF के तौर पर जमा हो रही आपकी पूंजी पर ब्याज दरों का ऐलान कर दिया है। इस वित्त वर्ष के लिए EPF पर 8.25 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा। सरकार ने पहले से चली आ रही ब्याज दर में कोई कटौती नहीं की है और इसे 8.25 फीसदी पर बरकरार रखा है।
दिल्ली में आयोजित केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की 239वीं बैठक में ईपीएफ की ब्याज दर को लेकर यह फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया (Mansukh Mandaviya) ने की। ब्याज दर में आखिरी बार साल 2024 में बदलाव किया गया था, जब इसे वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 8.15 फीसदी से बढ़ाकर 8.25 फीसदी कर दिया गया था।
पिछले वर्षों में ब्याज दर का उतार-चढ़ाव
1. ईपीएफओ ने 2019-20 के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर को 2018-19 के लिए निर्धारित 8.65 प्रतिशत से घटाकर सात वर्षों में सबसे कम 8.5 प्रतिशत कर दिया था।
2. वित्त वर्ष 2016-17 में अपने ग्राहकों को 8.65 प्रतिशत और 2017-18 में 8.55 प्रतिशत ब्याज दर प्रदान की थी। 2015-16 में ब्याज दर थोड़ी अधिक यानी 8.8 प्रतिशत थी।
3. वित्त वर्ष 2013-14 और 2014-15 दोनों वर्षों में 8.75 प्रतिशत की ब्याज दर दी, जो 2012-13 की 8.5 प्रतिशत दर से अधिक थी। 2011-12 में ब्याज दर 8.25 प्रतिशत थी।
अटके हुए लावारिस पैसे खुद आएंगे खाते में
अक्सर नौकरी बदलने या पुराने खातों को भूल जाने के कारण छोटे बैलेंस (1000 रुपये या उससे कम) वाले खाते 'इनऑपरेटिव' हो जाते हैं। बोर्ड ने ऐसे खातों के लिए एक 'ऑटो-क्लेम सेटलमेंट' प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। ऐसे में अब 1000 रुपये तक की लावारिस राशि के लिए आपको कोई फॉर्म भरने या दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी। ईपीएफओ सीधे आपके आधार से जुड़े बैंक खाते में यह पैसा भेज देगा। पहले चरण में लगभग 1.33 लाख खातों के ₹5.68 करोड़ सीधे ट्रांसफर किए जाएंगे।
कब मिलेंगे पैसे?
सीबीटी के फैसले के बाद प्रस्तावित ब्याज दर को अंतिम स्वीकृति के लिए वित्त मंत्रालय को भेजा जाएगा। औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद 7 करोड़ से अधिक ईपीएफओ सदस्यों के खातों में नई ब्याज दर के अनुसार रकम जमा की जाएगी। ईपीएफ पर ब्याज की गणना मासिक आधार पर की जाती है, लेकिन इसे वित्त वर्ष के आखिर में अकाउंट में जमा किया जाता है। हालांकि, जो खाते 36 महीने तक निष्क्रिय रहते हैं, उन पर आगे ब्याज नहीं मिलता और उन्हें डॉर्मेंट माना जाता है।
कंपनियों के लिए एमनेस्टी स्कीम
उन ट्रस्टों और संस्थानों के लिए एक 'एमनेस्टी स्कीम' (माफी योजना) शुरू की गई है, जिन्होंने अब तक नियमों का पालन नहीं किया था। इससे अदालती चक्करों में फंसे हजारों कर्मचारियों के पीएफ मामलों का समाधान अगले 6 महीनों में हो सकेगा।
डिजिटल सुधार और भर्ती
ईपीएफओ ने अपनी डिजिटल प्रणाली को CITES 2.0 में अपग्रेड किया है, जिससे क्लेम सेटलमेंट की गति तेज होगी। इसके साथ ही ईपीएफओ में खाली पदों को तेजी से भरने के लिए अब IBPS के जरिए परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी, ताकि ग्राहकों को बेहतर सर्विस मिल सके।