Banking: सरकारी बैंकों ने पांच साल में 5.82 लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज राइट ऑफ किया - वित्त राज्य मंत्री

PSU Banks Loans Write off: सरकारी बैंकों ने पिछले 5 वित्त वर्षों में करीब 5.82 लाख करोड़ रुपये के खराब लोन को राइट ऑफ किया है। सरकार ने बताया है कि वर्ष 2020-21 के दौरान सबसे अधिक 1.33 लाख करोड़ रुपये की राशि राइट ऑफ की गई। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में इस बात की जानकारी दी।

Jitendra Singh
अपडेटेड13 Aug 2025, 07:17 PM IST
PSU banks loans write off: बट्टा में जो राशि जाती है, उसे माफ नहीं किया जाता है।
PSU banks loans write off: बट्टा में जो राशि जाती है, उसे माफ नहीं किया जाता है। (Livemint)

PSU Banks Loans Write Off: पिछले 5 वित्त वर्षों के दौरान सरकारी बैंकों ने 5.82 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज को राइट-ऑफ (बट्टा) कर दिया है। संसद में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस बात की जानकारी दी। चौधरी ने एक लिखित जवाब देते हुए कहा कि 2024-25 के दौरान सरकारी बैंकों से राइट ऑफ की गई ऋण की राशि 91,260 करोड़ रुपये थी। पिछले पिछले वित्त वर्ष में यह 1.15 लाख करोड़ रुपये हो गई। चौधरी ने ये भी साफ किया कि राइट-ऑफ का मतलब कर्ज माफ करना नहीं होता, बल्कि बैंक इस रकम को वसूल करने की कोशिश इसके बाद भी जारी रखते हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, सरकार ने बताया कि साल 2020-21 के दौरान सबसे अधिक 1.33 लाख करोड़ रुपये की राशि राइट ऑफ की गई। यह आंकड़ा अगले साल घटकर 1.16 लाख करोड़ रुपये और वर्ष 2022-23 में 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। राइट-ऑफ के उलट, सरकारी बैंकों ने पिछले 5 साल में लगभग 1.65 लाख करोड़ रुपये की वसूली की है। यह वसूली पिछले पांच वित्त वर्षों में कुल बट्टे खाते में डाली गई राशि का लगभग 28 फीसदी है। बैंकों का कहना है कि वसूली की प्रक्रिया जारी है और कई मामलों में लंबा समय लग सकता है।

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माफी नहीं तो फिर क्या है राइट-ऑफ?

लोन राइट-ऑफ का मतलब है कि बैंक यह मान लेता है कि उधार लिया गया पैसा (लोन) वापस नहीं मिलेगा। इसलिए वह उस लोन को अपनी बैलेंस शीट से हटा देता है। यह तब होता है, जब कोई उधारकर्ता लंबे समय तक EMI नहीं चुकाता, या दिवालिया हो जाता है, या बैंक को लगता है कि पैसा वसूल करना मुश्किल है। ऐसे लोन को राइट-ऑफ करने से बैंक अपने खातों को साफ करता है और टैक्स या वित्तीय लाभ ले सकता है।

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कर्ज की होती है वसूली

अगर आप सोच रहे हैं कि राइट-ऑफ करने से लोन लेने वालों की देनदारियां खत्म हो गई हैं, तो ऐसा नहीं है। इस पैसे की वसूली के अलग-अलग तरह के प्रयास होते हैं। पंकज चौधरी ने बताया कि राइट-ऑप के बाद भी बैंक कई कानूनी रास्ते अपनाते हैं। इसमें सिविल कोर्ट में केस दर्ज करना, डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) में मामले दाखिल करना और दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में केस दाखिल करना शामिल है। इसके अलावा, SARFAESI एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाती है। सिर्फ 2024-25 में इस कानून के तहत 2,15,709 मामलों में कार्रवाई कर 32,466 करोड़ रुपये की वसूली की गई है।

मुद्रा योजना में 21.68 लाख करोड़ का लोन

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में पंकज चौधरी ने बताया कि पिछले 5 साल में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत देशभर में 21.68 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज दिया गया है। यह योजना छोटे और मझोले कारोबारियों को बिना गारंटी लोन देने के लिए शुरू की गई थी।

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लोन लेने वाले का क्रेडिट स्कोर हो सकता है खराब

जिसने लोन लिया है, उसका क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है। ऐसा होने पर भविष्य में लोन लेना मुश्किल हो जाएगा। बैंक या एजेंसी लोन लेने वाले से बार-बार संपर्क कर सकते हैं या कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।

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