
RAC Confirmation Rules: भारतीय रेलवे से रोजाना करोड़ों लोग सफर करते हैं। उनमें से कुछ लाखों लोगों को RAC सीट मिलती है। RAC एक तरह की वो सीट होती है, जिसमें एक ही नंबर पर दो लोगों की सीट मिलती है। आसान शब्दों में कहें, तो एक सीट पर दो लोग सफर करते हैं। इस सीट को लेकर आज भी कई लोगों में कन्फ्यूजन है कि क्या RAC की सीट बीच सफर में कन्फर्म होती है या नहीं?
अगर आप भी इसी सवाल का जवाब खोज रहे हैं, तो चलिए आपको बताते हैं कि क्या RAC की सीट बीच सफर में कन्फर्म होती है या फिर पूरे सफर आपको किसी और के साथ एक ही सीट पर सफर करना होगा।भारतीय रेलवे के नियम के अनुसार अगर किसी यात्री को RAC की सीट मिली है, तो वो सफर के दौरान फुल बर्थ में भी बदल सकती है।
रेलवे के नियम के मुताबिक RAC यानी Reservation Against Cancellation एक ऐसा स्टेटस है जिसमें यात्री को ट्रेन में चढ़ने का अधिकार मिल जाता है, लेकिन उसे पूरी बर्थ नहीं मिलती है, लेकिन अगर उसकी RAC कम है, तो उसकी सीट बीच सफर में भी कन्फर्म हो सकती है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं।
मान लीजिए आपको दिल्ली से गोरखपुर सफर कर रहे हैं, आपने जब रिजर्वेशन करवाया, तो आपको 20 RAC मिली थी, लेकिन जब चार्ट बना तो आपकी RAC 2 रह गई। अब आप इस RAC के साथ ट्रेन में सफर कर सकते हैं। इसके अलावा अगर ट्रेन चलने के बाद अगर दो लोगों ने टिकट कैंसिल करवा दी या फिर ट्रेन नहीं पकड़ पाए, जिनकी सीट कन्फर्म है। अगर ऐसा हुआ, तो आपकी RAC कन्फर्म टिकट में बदल सकती है। ऐसा होने से आपको किसी के साथ आधी सीट शेयर करके सफर नहीं करना पडे़गा।
यात्रा के दौरान टीटी सबसे पहले यह देखता है कि किन कन्फर्म पैसेंजर्स ने ट्रेन बोर्ड नहीं की या बीच सफर में उतर गए हैं। इन बर्थ्स को vacant मानकर, रेलवे नियमों के हिसाब से पहले RAC नंबर वाले यात्रियों को फुल बर्थ दी जाती है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपका RAC नंबर छोटा है और रूट पर कैंसिलेशन या नो‑शो ज़्यादा होते हैं, तो आपके लिए बीच सफर में ही कन्फर्म बर्थ मिलने के बेहतर मौके बने रहते हैं।
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