पश्चिम एशिया में तनाव, रुपये पर दबाव, और बढ़ते आयात बिल के बीच एक खबर ने वित्तीय बाजारों में हलचल मचा दी। ब्लूमबर्ग इकॉनोमिक्स ने दावा किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मई 2026 में करीब 12 अरब डॉलर का सोना बेचकर विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की कोशिश की। लेकिन आरबीआई ने मंगलवार को आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। केंद्र का पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने भी इस रिपोर्ट को भ्रामक बताया।
ब्लूमबर्ग का दावा
ब्लूमबर्ग इकॉनोमिक्स के भारत केंद्रित वरिष्ठ अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा के आधार पर आकलन किया कि 22 मई, 2026 को समाप्त हुए दो हफ्तों में आरबीआई ने लगभग 12 अरब डॉलर का सोना बेचा और इसके एक हिस्से से करीब 7.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा संपत्ति जोड़ी।
गुप्ता का तर्क है कि भारत ने हाल ही में सोने पर आयात शुल्क बढ़ाया था, जिससे आरबीआई के सोने का मूल्यांकन सामान्यतः बढ़ना चाहिए था, लेकिन आंकड़ों में उलटा, गिरावट दिखी। इसे उन्होंने सक्रिय बिकवाली का संकेत माना।
यह रिपोर्ट ऐसे समय आई जब अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होने से भारत पर कच्चे तेल के आयात का बोझ बढ़ा हुआ है और रुपया 20 मई को 96.923 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर को छू चुका था।
RBI का जवाब- सोना वहीं है, जहां था
आरबीआई ने 3 जून, 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया कि सोने की बिक्री की खबरें सही नहीं हैं। आरबीआई के मासिक बुलेटिन में प्रकाशित नवीनतम आंकड़ों के अनुसार भौतिक सोना भंडार 880.52 मीट्रिक टन पर अपरिवर्तित है। आरबीआई ने आम जनता से अपील की कि वे ऐसे मामलों में केवल आरबीआई की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
PIB फैक्ट-चेक- सोने की हिस्सेदारी बढ़ी है, घटी नहीं
पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक में कहा कि आरबीआई के अनुसार भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी सितंबर 2025 के अंत में 13.92% से बढ़कर 31 मार्च, 2026 को 16.70% और 22 मई, 2026 को 16.85% हो गई। यह आंकड़ा ब्लूमबर्ग के दावे को सीधे काटता है, यदि सोना बेचा गया होता तो हिस्सेदारी घटती, बढ़ती नहीं।
RBI बुलेटिन डेटा क्या कहता है?
आरबीआई के मई 2026 बुलेटिन के अनुसार सोने का भौतिक भंडार इस प्रकार रहा।
आंकड़े स्पष्ट कहते हैं कि सोने का भंडार 3 अप्रैल, 2026 से अपरिवर्तित 880.52 टन बना हुआ है। डॉलर मूल्य में उतार-चढ़ाव अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों और विनिमय दर के बदलाव के कारण है, न कि बिक्री के कारण।
आंकड़ा एक, व्याख्याएं दो
ब्लूमबर्ग का विश्लेषण मूल्यांकन में आई गिरावट को बिक्री मान बैठा, जबकि आरबीआई का भौतिक भंडार (टन में) बताता है कि एक भी ग्राम सोना नहीं बिका। यह मामला याद दिलाता है कि अप्रत्यक्ष अनुमान और आधिकारिक डेटा में फर्क होता है। निवेशकों और पाठकों के लिए सबसे भरोसेमंद स्रोत आरबीआई का मासिक बुलेटिन ही है।