
RBI Repo Rate Cut: आज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक के फैसले सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा महंगाई के नए अनुमान को लेकर हो रही है। क्योंकि अगर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) वाकई नीचे जाता रहा, तो आने वाले महीनों में रोजमर्रा के सामान की कीमतें और काबू में रह सकती हैं। वहीं दूसरी तरफ, लगातार हो रही रेपो रेट कटौती की वजह से फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पैसा लगाने वालों को आगे चलकर ब्याज दरों में गिरावट का असर देखने का डर भी है। मतलब, इस पॉलिसी का अलग-अलग लोगों की जेब पर अलग तरह से असर पड़ सकता है।
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) का कहना है कि देश में महंगाई का दबाव लगातार कम हो रहा है। GST दरों में हाल की कटौतियों, खाने-पीने की चीजों की बेहतर सप्लाई और उत्पादन में सुधार की वजह से इन्फ्लेशन में गिरावट दिख रही है। इसी को देखते हुए RBI ने FY26 के लिए CPI इन्फ्लेशन अनुमान को 2.6% से घटाकर 2% कर दिया है।
Q3 FY26: 0.6% (पहले 1.8%)
Q4 FY26: 2.9% (पहले 4%)
Q1 FY27: 3.9% (पहले 4.5%)
Q2 FY27: 4%
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बेहतर खाद्य आपूर्ति, GST दरों में कटौती और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों में नरमी की वजह से महंगाई का दबाव हल्का हुआ है। इसका मतलब है कि रोजमर्रा का सामान और सस्ता होने की संभावना है।
MPC ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती करके इसे 5.25% कर दिया है। इस साल यह चौथी कटौती है, जिससे कुल मिलाकर 125 bps की कमी हो चुकी है।
फरवरी: 25 bps कट
अप्रैल: 25 bps कट
जून: 50 bps कट
दिसंबर: 25 bps कट
साल की शुरुआत में रेपो रेट 6.5% था, जो अब घटकर 5.25% हो गया है। इसका असर होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन पर पड़ेगा, EMI कम होगी और उधारी सस्ती होगी।
RBI ने FY26 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7.3% भी कर दिया है, यानी देश की अर्थव्यवस्था उम्मीद से तेज गति पकड़ रही है।
बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) ने पहले ही FD ब्याज दरें कम कर दी थीं। अब चौथी रेपो कटौती के बाद उम्मीद है कि FD रेट्स और नीचे आ सकती हैं। पुराने FD निवेशकों पर इसका असर नहीं पड़ेगा, लेकिन नए निवेशकों को कम ब्याज और कम मैच्योरिटी अमाउंट मिल सकता है। रेपो रेट कट का असर FD रेट्स पर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन आने वाले महीनों में ज्यादातर बैंक अपने ऑफर बदल सकते हैं।
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