RBI Financial Stability Report: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को जारी अपनी छमाही वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में बैंकिंग सेक्टर को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) अनुपात में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। सितंबर 2025 तक यह घटकर 2.1 प्रतिशत पर आ गया, जो कई दशकों का सबसे निचला स्तर है।
रिजर्व बैंक का अनुमान है कि सामान्य परिस्थितियों में यह सुधार आगे भी जारी रहेगा और मार्च 2027 तक सकल एनपीए अनुपात घटकर 1.9 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। ये बैंकिंग सेक्टर की मजबूती और वित्तीय स्थिरता का संकेत माना जा रहा है।
रिपोर्ट में लगाया गया बड़ा अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, 46 बैंकों का संयुक्त सकल एनपीए अनुपात सितंबर 2025 के 2.1 प्रतिशत से घटकर मार्च 2027 में 1.9 प्रतिशत हो सकता है। हालांकि, यदि आर्थिक स्थिति प्रतिकूल रहती है, तो यह अनुपात 3.2 प्रतिशत से 4.2 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।पूंजी की स्थिति पर रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों में पूंजी जोखिम-भारित परिसंपत्तियों का अनुपात (सीआरएआर) के पास नुकसान सहने के लिए पर्याप्त पूंजी मौजूद है। सितंबर 2025 तक सार्वजनिक क्षेत्र बैंकों में यह 16 प्रतिशत और निजी बैंकों में 18.1 प्रतिशत है। इससे बैंक आर्थिक झटकों का सामना कर सकते हैं।
कितना हो सकती है मार्च में एससीबी?
रिजर्व बैंक के अनुसार, यदि आर्थिक हालात बहुत खराब हो जाते हैं, तो भी अधिकांश बैंक टिके रह सकते हैं। हालांकि, ऐसे हालात में कुछ बैंकों की पूंजी कम हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सामान्य परिस्थितियों के तहत, 46 प्रमुख अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) का कुल सीआरएआर सितंबर 2025 में 17.1 प्रतिशत से घटकर मार्च 2027 तक 16.8 प्रतिशत हो सकता है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि वृद्धि में नरमी और वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए प्रतिकूल परिदृश्यों के तहत यह घटकर क्रमशः 14.5 प्रतिशत और 14.1 प्रतिशत तक हो सकता है।
इसमें यह भी कहा गया है कि दबाव परीक्षण से पता चला है कि निजी बैंकों और विदेशी बैंकों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पूंजी में अपेक्षाकृत अधिक कमी आई है।रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि गंभीर संकट की स्थिति में, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की कुल संपत्ति में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले छह बैंक सीआरएआर के मामले में न्यूनतम स्तर से नीचे जा सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का कुछ बड़े कर्जदारों पर निर्भर रहना कम हुआ है, जो एक सकारात्मक संकेत है। कुल कर्ज में बड़े कर्जदारों की हिस्सेदारी लगभग 44 प्रतिशत बनी हुई है, लेकिन खराब कर्ज में उनकी हिस्सेदारी घटकर 33.8 प्रतिशत रह गई है।कमाई के मामले में रिपोर्ट बताती है कि बैंकों की ब्याज से होने वाली आय की बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी पड़ी है। सितंबर 2025 में यह वृद्धि घटकर 2.3 प्रतिशत रह गई। इसकी एक वजह ब्याज दरों में कटौती है।