RBI Floating rate bond: हर 6 महीने में फिक्स्ड इनकम! FD से भी ज्यादा कमाई, क्या आपने चेक किया ये ऑप्शन?

RBI Floating Rate Bonds: सुरक्षित निवेश और बैंक FD से बेहतर रिटर्न की तलाश करने वाले निवेशकों के लिए RBI का यह खास विकल्प काफी चर्चा में है। सरकारी गारंटी और आकर्षक ब्याज दरों के साथ आने वाली यह योजना मध्यम वर्ग और सीनियर सिटीजन्स के लिए निवेश का एक ठोस जरिया बन सकती है। 

Priya Shandilya
अपडेटेड17 Apr 2026, 01:25 PM IST
RBI Floating rate bond: हर 6 महीने में खाते में आएगा पैसा, FD से भी ज्यादा कमाई, क्या आपने चेक किया ये ऑप्शन?
RBI Floating rate bond: हर 6 महीने में खाते में आएगा पैसा, FD से भी ज्यादा कमाई, क्या आपने चेक किया ये ऑप्शन?

RBI Floating Rate Bonds: आज के दौर में हर कोई चाहता है कि उसका पैसा सुरक्षित भी रहे और उस पर मुनाफा भी बढ़िया मिले। अक्सर लोग सुरक्षित निवेश के नाम पर सिर्फ बैंक FD तक रुक जाते हैं, लेकिन बाजार में एक ऐसा विकल्प भी है जो सरकारी गारंटी के साथ आता है और रिटर्न के मामले में FD को भी पीछे छोड़ देता है। हम बात कर रहे हैं RBI फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स की। आइए जानते हैं कि ये बॉन्ड्स कैसे काम करते हैं और आपको इनसे क्या फायदा हो सकता है।

क्या होते हैं ये बॉन्ड

RBI फ्लोटिंग रेट बॉन्ड्स एक खास तरह के सरकारी बॉन्ड हैं, जिन्हें पहली बार सितंबर 1995 में जारी किया गया था। इनकी मैच्योरिटी 7 साल की होती है। इनकी सबसे खास बात यह है कि इनका ब्याज (कूपन रेट) फिक्स नहीं होता, बल्कि बदलता रहता है। यह दर नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) की ब्याज दर से जुड़ी होती है, जिसमें 0.35% अतिरिक्त जोड़ा जाता है।

अभी कितना मिल रहा है रिटर्न

फिलहाल NSC पर 7.7% सालाना ब्याज मिल रहा है। इसमें 0.35% जोड़ने के बाद RBI फ्लोटिंग रेट बॉन्ड्स का रिटर्न 8.05% सालाना हो जाता है। यह रिटर्न कई बड़े बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा है। यहां तक कि PPF जैसे लोकप्रिय निवेश विकल्प से भी यह बेहतर रिटर्न दे रहा है।

सरकार ने दरें क्यों नहीं बदलीं

सरकार ने अप्रैल से जून 2026 तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरों की समीक्षा की थी। हालांकि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण 10 साल के सरकारी बॉन्ड (G-sec) की यील्ड बढ़ी है, फिर भी सरकार ने लगातार आठवीं बार इन स्कीम्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया।

FD से क्यों बेहतर है

इन बॉन्ड्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये बेहतर ब्याज दर देते हैं और नियमित आय (कैश फ्लो) में मदद करते हैं। जो लोग हर छह महीने में ब्याज पाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प बन सकता है।

कितना सुरक्षित है निवेश

ये बॉन्ड्स भारत सरकार द्वारा समर्थित होते हैं, इसलिए इन्हें लगभग रिस्क-फ्री माना जाता है। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि इनका ब्याज फिक्स नहीं होता, यह NSC की दर के साथ बदलता रहता है और हर छह महीने में अपडेट होता है।

कमाई कब और कैसे होगी?

इन बॉन्ड्स में निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को है जिन्हें रेगुलर इनकम की जरूरत होती है। इसमें ब्याज का भुगतान साल में दो बार, 1 जनवरी और 1 जुलाई को सीधे आपके बैंक खाते में किया जाता है। ध्यान रहे कि इसमें 'क्युमुलेटिव' यानी ब्याज पर ब्याज जुड़ने वाला विकल्प नहीं मिलता, इसलिए यह उन लोगों के लिए बेस्ट है जो हर छह महीने में अपनी कमाई हाथ में चाहते हैं।

निवेश की सीमा और पात्रता

  • कौन निवेश कर सकता है: कोई भी भारतीय निवासी (18 साल से ऊपर) अकेले या जॉइंट नाम से इसमें पैसा लगा सकता है। हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) भी इसके लिए पात्र हैं। हालांकि, अनिवासी भारतीय (NRIs) इसमें निवेश नहीं कर सकते।
  • कितना पैसा लगा सकते हैं: आप कम से कम 1,000 रुपये से शुरुआत कर सकते हैं। निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है, जो इसे बड़े निवेशकों के लिए भी आकर्षक बनाता है।
  • जरूरी डॉक्यूमेंट्स: आवेदन के साथ आपको अपना फोटो, एड्रेस प्रूफ और आईडी प्रूफ (जैसे वोटर आईडी, पैन कार्ड, पासपोर्ट या अन्य सरकारी पहचान पत्र) बैंक में जमा करने होंगे।

टैक्स और लॉक-इन पीरियड की शर्तें

इन बॉन्ड्स से होने वाली ब्याज की कमाई पूरी तरह टैक्सेबल है। यह आपकी 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' में जोड़ी जाएगी और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से इस पर टैक्स लगेगा। अगर आप टैक्स बचाने के लिए पात्र हैं, तो आप फॉर्म 15G या 15H जमा कर सकते हैं।

जहां तक पैसे निकालने की बात है, इन बॉन्ड्स की मैच्योरिटी अवधि 7 साल है। सीनियर सिटीजन्स (60 साल से ऊपर) के लिए इसमें समय से पहले पैसे निकालने की कुछ छूट दी गई है, लेकिन समय से पहले पैसे निकालने पर पिछले छह महीने के ब्याज का 50% पेनल्टी के रूप में काट लिया जाता है।

RBI फ्लोटिंग रेट बॉन्ड्स उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प हैं जो सुरक्षित निवेश के साथ बेहतर रिटर्न चाहते हैं। लेकिन निवेश करने से पहले अपनी जरूरत, जोखिम क्षमता और पैसे की जरूरत जरूर समझ लें, क्योंकि इसमें लॉक-इन लंबा होता है और रिटर्न पूरी तरह फिक्स नहीं है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।

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