RBI: भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने बैंकों, NBFC और दूसरे रेगुलेटेड लेंडर्स के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की हैं। ये नियम उन मामलों से जुड़े हैं, जब कोई कर्जदार लोन नहीं चुका पाता और बैंक या वित्तीय संस्थान उसकी जमीन, मकान या दूसरी अचल संपत्ति पर कब्जा कर लेते हैं। RBI ने कहा है कि सामान्य परिस्थितियों में बैंक और NBFC गैर-वित्तीय संपत्तियां जैसे मकान, जमीन या मशीनरी अपने पास नहीं रखते। लेकिन कुछ विशेष मामलों में, जब कोई लोन NPA यानी Non-Performing Asset बन जाता है और कर्जदार भुगतान बंद कर देता है, तब रिकवरी प्रक्रिया के तहत ऐसी संपत्तियां कब्जे में ली जा सकती हैं।
ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक ऐसी संपत्तियों को “Specified Non-Financial Assets” यानी SNFA कहा जाएगा। RBI ने स्पष्ट किया है कि ये संपत्तियां केवल रिकवरी प्रक्रिया के हिस्से के रूप में ही हासिल की जा सकती हैं। बैंक या NBFC इन्हें निवेश या कारोबार करने के लिए नहीं रख सकते।
केंद्रीय बैंक ने कहा है कि कई बार वित्तीय संस्थान लंबे समय तक ऐसी संपत्तियां अपने पास रखते हैं, जिससे पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन से जुड़े सवाल पैदा होते हैं। इसी वजह से अब इनके लिए एक स्पष्ट और व्यवस्थित फ्रेमवर्क लाने का प्रस्ताव दिया गया है।
बैंक 7 साल तक रख सकते हैं संपत्ति
RBI ने प्रस्ताव रखा है कि ऐसी संपत्तियों को एक तय समय सीमा के भीतर बेचना जरूरी होगा। ड्राफ्ट नियमों के अनुसार बैंक और NBFC अधिकतम सात साल तक ही ऐसी संपत्तियां अपने पास रख सकेंगे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कब्जे में ली गई संपत्तियों का समय पर निपटान हो सके। ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि ऐसी संपत्तियों की नियमित वैल्यूएशन करनी होगी। RBI के मुताबिक कब्जे में ली गई संपत्तियों का कम से कम हर दो साल में “distress sale basis” पर दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा। अगर संपत्ति की वैल्यू घटती है तो उसका असर तुरंत प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में दिखाना होगा।
कौन नहीं खरीद पाएगा प्रॉपर्टी?
RBI ने यह भी साफ किया है कि वैल्यूएशन बढ़ने की स्थिति में होने वाले फायदे को तुरंत मान्यता नहीं दी जाएगी। यानी बैंक केवल संभावित मुनाफा दिखाकर अपनी बैलेंस सीट मजबूत नहीं दिखा सकेंगे। ड्राफ्ट नियमों में एक और अहम प्रस्ताव रखा गया है। RBI ने कहा है कि कब्जे में ली गई संपत्तियों को मूल कर्जदार या उससे जुड़े पक्षों को वापस नहीं बेचा जा सकेगा। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इससे धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी। RBI ने फिलहाल इन नियमों को ड्राफ्ट के रूप में जारी किया है और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। हितधारक 26 मई तक अपने सुझाव भेज सकते हैं। इसके बाद केंद्रीय बैंक अंतिम नियम जारी करेगा।