
RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India, RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा आज (6 अगस्त 2025) सुबह 10 बजे मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की रिपोर्ट पेश करेंगे। फरवरी, अप्रैल और जून की तरह इस बार भी MPC से रेपो रेट में कटौती की उम्मीद जताई जा रही है। अगर इस बार भी कटौती हुई तो रेपो रेट में यह लगातार चौथी बार कटौती होगी। इस कटौती से आम लोगों को फायदा होगा। इसके साथ ही लोन की मांग में इजाफा होगा। पिछली एमपीसी मीटिंग में रेपो रेट में 50 आधार अंकों की कटौती कर रेपो रेट को 5.50 फीसदी कर दिया गया था।
एक्सपर्ट्स के अनुसार मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी इस बार भी रेपो रेट में 0.25% कटौती कर सकती है। यानी, आने वाले दिनों में लोन सस्ते हो सकते हैं। जानकारों का भी मानना है कि अमेरिका के टैरिफ वॉर और ग्लोबल अनिश्चितता से GDP ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। ऐसे में RBI एक आखिरी कटौती कर सकता है, ताकि ग्रोथ को सपोर्ट मिल सके। आज सुबह 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा इस मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी देंगे। MPC में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।
मौजूदा समय में रिटेल महंगाई (CPI) फरवरी से ही 4% से नीचे बनी हुई है और जून 2025 में 2.1% रही। वहीं अमेरिका की ओर से 7 अगस्त से भारतीय निर्यात पर 25% टैरिफ लगाने के फैसले के चलते नीति पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका का टैरिफ भारत के GDP में 0.2% तक असर डाल सकता है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि त्योहारी सीज़न और घरेलू आर्थिक मजबूती को देखते हुए, कर्ज की मांग बढ़ाने के लिए RBI 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है, लेकिन ज्यादातर आर्थिक संकेतकों को ध्यान में रखते हुए RBI की प्राथमिकता सतर्कता और स्थिरता पर रहेगी।
लगातार 3 बार में 1% की कटौती हो चुकी है RBI इस साल लगातार तीन बार में ब्याज दरों में 1% की कटौती कर चुका है। फरवरी में हुई मीटिंग में ब्याज दरों को 6.50% से घटाकर 6.25% कर दिया था। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की ओर से ये कटौती करीब 5 साल बाद की गई थी। दूसरी बार अप्रैल में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर 0.25% घटाई गई। तीसरी बार दरों में कटौती जून में हुई। फिलहाल रेपो रेट 5.50% पर है।
रेपो रेट घटने के बाद बैंक भी हाउसिंग और ऑटो जैसे लोन्स पर अपनी ब्याज दरें कम कर सकते हैं। आपके सभी लोन सस्ते हो सकते हैं और EMI भी घटेगी। ब्याज दरें कम होंगी तो हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी। ज्यादा लोग रियल एस्टेट में निवेश कर सकेंगे।
यह वह दर होती है जिस जिस पर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को कर्ज देता है। अगर रेपो रेट बढ़ाया जाता है तो साफ है कि बैंकों को रिजर्व बैंक से महंगी दर पर कर्ज मिलेगा। इस तरह कर्ज महंगे हो जायेंगे । ऐसे में अगर रेपो रेट में कटौती होती है तो आपके लोन की EMI भी कम हो जाएगी और आपको होम लोन और कार लोन सस्ते होंगे।
वह दर जिस पर बैंक रिजर्व बैंक को कर्ज देते हैं । अक्सर बैंक अपना सरलतम कैश रिजर्व बैंक को देना पसंद करते हैं क्योंकि एक तो उन्हें ब्याज मिलता है और ऊपर से पैसा एकदम सुरक्षित रहता है।
बैंकों को अपनी जमा का जो हिस्सा केंद्रीय बैंक के पास रखना होता है। उसे नकद आरक्षित अनुपात कहते हैं। अगर सीआरआर बढ़ाया जाता है तो इसका मतलब यह है कि बैंकों को ज्यादा बड़ी राशि रिजर्व बैंक के पास रखनी होगी । यानी बाजार में पूँजी प्रवाह कम हो जायेगा ।
एसएलआर के तहत बैंकों को अपने पास की जमा राशि का एक निश्चित हिस्सा अनिवार्य रूप से सरकारी प्रतिभूतियों में लगाना होता है।
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