
RBI MPC Meeting: केंद्रीय बजट 2026 की घोषणा और ऐतिहासिक भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद अब पूरे देश की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक पर टिकी हैं। गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में यह महत्वपूर्ण बैठक 4 फरवरी से शुरू हो चुकी है। यह बैठक 6 फरवरी तक चलेगी। इसके बाद फैसलों का ऐलान किया जाएगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार इस मीटिंग में ब्याज दरों में कटौती की कम ही उम्मीद है। इससे पहले दिसंबर में हुई मीटिंग में रेपो रेट में 0.25% की कटौती करके इसे 5.25% कर दिया था।
RBI ने फरवरी 2025 में हुई मीटिंग में ब्याज दरों को 6.5% से घटाकर 6.25% कर दिया था। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की ओर से ये कटौती करीब 5 साल बाद की गई थी। दूसरी बार अप्रैल में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर 0.25% घटाई गई। जून में तीसरी बार दरों में 0.50% कटौती हुई। वहीं इसके बाद दिसंबर में 0.25% कटौती की। यानी, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने 4 बार में ब्याज दरें 1.25% घटाई।
बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा है, "इस महीने CPI और GDP की नई सीरीज जारी होने वाली है, जिसमें महंगाई और GDP ग्रोथ मौजूदा लेवल से ज्यादा हो सकती है इसलिए लग रहा है कि MPC रेट्स में कोई बदलाव नहीं होगा। ब्रोकरेज हाउस बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) का भी कुछ ऐसा ही मानना है। ग्रोथ आउटलुक के हिसाब से RBI MPC द्वारा रेपो रेट में और कटौती किए जाने की जरूरत कम महसूस हो रही है।
ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए रेट में कटौती होने की गुंजाइश बेशक थी, लेकिन यह भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर निर्भर था, जो ग्रोथ आउटलुक के लिए अनिश्चितता का एक प्रमुख सोर्स बना रहा। अब चूंकि डील हो गई है और यह डील ग्रोथ की निश्चितता को बढ़ाएगी इसलिए रेट कट की संभावना कम हो सकती है।
किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है।
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। बीते दिनों रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठकों का शेड्यूल जारी किया था। इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 बैठकें होनी हैं, ये इस वित्त वर्ष की आखिरी मीटिंग है। पहली बैठक 7-9 अप्रैल को हुई थी।
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