RBI का मास्टरस्ट्रोक: सरकारी बॉन्ड मार्केट में मचेगी हलचल, 2027 तक फ्लैट होगा यील्ड कर्व

RBI open market operation purchase impact on bond yield: आरबीआई की तरफ से नकदी बढ़ाने के उपायों से सरकारी बॉन्ड मार्केट में रौनक लौट आई है। वित्त वर्ष 2027 तक बॉन्ड यील्ड कर्व के सपाट होने की उम्मीद है, जिससे निवेशकों को बड़ी राहत मिल सकती है।

Shivam Shukla
अपडेटेड26 Dec 2025, 03:51 PM IST
सरकारी बॉन्ड
सरकारी बॉन्ड

Government bond yield curve flattening FY27: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया कदमों से सरकारी बॉन्ड मार्केट की तस्वीर बदलने वाली है। जानकारों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 तक सरकारी बॉन्ड यील्ड कर्व फ्लैट हो सकता है। आरबीआई की तरफ से अल्ट्रा-लॉन्ग सेगमेंट में बॉन्ड की सप्लाई के दबाव को कम करने की कोशिशों से यह बदलाव देखने को मिल सकता है।

क्यों बढ़ गई थी लॉन्ग टर्म बॉन्ड यील्ड?

वित्त वर्ष 2026 में अब तक अल्ट्रा-लॉन्ग पीरिएड वाली सिक्योरिटीज पर यील्ड में बढ़त देखी गई थी। इसकी मुख्य वजह बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों की ओर से निवेश में आई कमी थी। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता के मुताबिक, ज्यादा सप्लाई और कमजोर डिमांड की वजह से यह दबाव बना था। बीमा कंपनियों के पास पैसा आने की रफ्तार धीमी हुई है और टैक्स नियमों में बदलाव से उनके गारंटीकृत प्रोडक्ट्स की मांग घटी है। वहीं, पेंशन फंड अब इक्विटी यानी शेयर बाजार में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं।

RBI का मास्टरप्लान, 2 लाख करोड़ का इंजेक्शन

नकदी के संकट को दूर करने के लिए RBI ने बड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक दिसंबर के अंत से जनवरी 2026 के बीच 2 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड (OMO) खरीदेगा। इसके साथ ही 10 बिलियन डॉलर का 'डॉलर-रुपया बाय-सेल स्वैप' भी किया जाएगा। इन फैसलों के बाद सरकारी बॉन्ड यील्ड में अप्रैल के बाद की सबसे बड़ी तेजी (9 आधार अंकों की गिरावट) देखी गई है। यह बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

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सिस्टम में नकदी की मौजूदा स्थिति

15 दिसंबर को एडवांस टैक्स पेमेंट के बाद बैंकिंग सिस्टम में पैसों की कमी हो गई थी। हालांकि, सरकारी खर्च बढ़ने से दिसंबर के अंत तक सिस्टम में फिर से सरप्लस नकदी आने की उम्मीद है। आंकड़ों के मुताबिक, 15 दिसंबर को कोर लिक्विडिटी 3.2 ट्रिलियन रुपये थी। 19 दिसंबर को 50,000 करोड़ रुपये की बॉन्ड खरीद के बाद इसके बढ़कर 3.7 ट्रिलियन रुपये होने का अनुमान है।

वित्त वर्ष 2026 में अब तक की बड़ी कार्रवाई

इस साल आरबीआई ने मार्केट में पैसा पहुंचाने के लिए कई टूल्स का इस्तेमाल किया है। शुद्ध रूप से ओएमओ (OMO) खरीद के जरिए 3.7 ट्रिलियन रुपये और सीआरआर (CRR) कटौती के जरिए 2.6 ट्रिलियन रुपये सिस्टम में डाले गए हैं। इसके अलावा दिसंबर में 5 बिलियन डॉलर का बाय-सेल स्वैप भी किया गया है। इन कदमों से उम्मीद है कि अगले साल लॉन्ग टर्म यील्ड सामान्य स्तर पर आ जाएगी।

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